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(संकटकालीन समय)
(बस्ती उजाड़ने का विरोध)
 
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मन खुर्द जनता कॉलोनी एक अपेक्षित और गंदी बस्ती थी। उसी इलाके की सफाई की ओर किसी का ध्यान नहीं था। न व्यवस्था, न वहाँ के रहने वाले इस ओर सोचते थे। ऐसे में जॉकिन ने साथ के लड़कों को इकट्ठा करके उन्हें साथ लिया और सबने मिलकर कॉलोनी का कूड़ा करकट उठाकर बाम्बे म्यूनिसिपल कॉरपारेशेन के आगे जमा कर लिया। अगले दिन बीएमसी के लोग जॉकिन के पास उन्हें पकड़ने आए। जॉकिन ने हठपूर्वक कहा कि "हम अपनी कॉलोनी की सफाई खुद कर लेंगे, लेकिन बीएमकी को कूड़ा उठाने आना चाहिए। जॉकिन के हठ के आगे बीएमकी को झुकना पड़ा और यहीं से जॉकिन के मन में इस बस्ती के लिए कुछ करने का विचार आया।
 
मन खुर्द जनता कॉलोनी एक अपेक्षित और गंदी बस्ती थी। उसी इलाके की सफाई की ओर किसी का ध्यान नहीं था। न व्यवस्था, न वहाँ के रहने वाले इस ओर सोचते थे। ऐसे में जॉकिन ने साथ के लड़कों को इकट्ठा करके उन्हें साथ लिया और सबने मिलकर कॉलोनी का कूड़ा करकट उठाकर बाम्बे म्यूनिसिपल कॉरपारेशेन के आगे जमा कर लिया। अगले दिन बीएमसी के लोग जॉकिन के पास उन्हें पकड़ने आए। जॉकिन ने हठपूर्वक कहा कि "हम अपनी कॉलोनी की सफाई खुद कर लेंगे, लेकिन बीएमकी को कूड़ा उठाने आना चाहिए। जॉकिन के हठ के आगे बीएमकी को झुकना पड़ा और यहीं से जॉकिन के मन में इस बस्ती के लिए कुछ करने का विचार आया।
 
==बस्ती उजाड़ने का विरोध==
 
==बस्ती उजाड़ने का विरोध==
वर्ष [[1969]] में जॉकिन ने मुम्बई स्लम डवैलर्स फेडरेशन का गठन किया और यह निर्णय लिया कि वह इस संस्था का रजिस्ट्रेशन वगैरह नहीं कराएँगे, बस काम करेंगे। [[1974]] में यह मुम्बई स्लम डवैलर्स फेडरेशन विकसित होकर 'नेशनल स्लम डवैलर्स फेडरेशन (NSDF) बन गई। जॉकिन के इस अभियान में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ में आया, जब एटौमिक एनर्जी कमीशन के हित में जनता कॉलोनी को उजाड़कर विस्थापित करने की योजना बनी। जॉकिन ने इसका विरोध किया और वह इस मामले को [[उच्चतम न्यायालय]] तक ले गए। जहाँ से उन्हें स्टे आर्डर मिला; लेकिन [[प्रधानमंत्री]] [[इंदिरा गाँधी]] एटोमिक एनर्जी कमीशन के पक्ष में रुचि रखती थी। इस पर [[1975]] में जॉकिन इंदिरा गाँधी से मिलने [[दिल्ली]] आए; लेकिन जब उनत्तीस दिन इंतजार के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई तो वह अपने साथियों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए। एक लम्बे संघर्ष के बाद उनको बहुत से सांसदों तथा सत्तारूढ़ दल की सहानुभूमि मिली, लेकिन इंदिरा गाँधी ने कॉलोनी उजाड़ने पर अपनी सहमति दे दी। इस पर जॉकिन ने विरोध स्वरूप लाल अक्षरों में लिखे पर्चे बाँटे। वह एटोमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन से भी मिले। लेकिन उन्होंने यही कहा कि कल सुबह उस कॉलोनी का उजड़ना भगवान भी नहीं रोक सकता। यह जॉकिन का साहस भरा कदम था कि उन्होंने सुबह साढ़े चार बजे तक कोर्ट से स्टे आर्डर लाकर चेयरमैन को थमा दिया। इस सिद्धांत वाली लड़ाई को जॉकिन हार गए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला नहीं सुनाया। जॉकिन गिरफ्तार कर लिए गए। आशंका बनी कि बह जान से मार दिए जाएँगे। इस पर बी.बी.सी. ने पूरे संसार में इस काण्ड की घोषणा की और यह बताया कि जॉकिन की जान खतरे में है। जॉकिन अर्पुथम ने यही ठीक समझा कि वह [[भारत]] से कुछ समय के लिए निकल जाएँ। [[1976]] में वह फिलीपींस चले गए।<ref name="a"/>
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वर्ष [[1969]] में जॉकिन ने '''मुम्बई स्लम डवलैपर्स फेडरेशन''' का गठन किया और यह निर्णय लिया कि वह इस संस्था का रजिस्ट्रेशन वगैरह नहीं कराएँगे, बस काम करेंगे। [[1974]] में यह मुम्बई स्लम डवलैपर्स फेडरेशन विकसित होकर 'नेशनल स्लम डवलैपर्स फेडरेशन' (NSDF) बन गई। जॉकिन के इस अभियान में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ में आया, जब एटौमिक एनर्जी कमीशन के हित में जनता कॉलोनी को उजाड़कर विस्थापित करने की योजना बनी। जॉकिन ने इसका विरोध किया और वह इस मामले को [[उच्चतम न्यायालय]] तक ले गए। जहाँ से उन्हें स्टे आर्डर मिला; लेकिन [[प्रधानमंत्री]] [[इंदिरा गाँधी]] एटोमिक एनर्जी कमीशन के पक्ष में रुचि रखती थी। इस पर [[1975]] में जॉकिन इंदिरा गाँधी से मिलने [[दिल्ली]] आए; लेकिन जब उनत्तीस दिन इंतजार के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई तो वह अपने साथियों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए। एक लम्बे संघर्ष के बाद उनको बहुत से [[सांसद|सांसदों]] तथा सत्तारूढ़ दल की सहानुभूमि मिली, लेकिन इंदिरा गाँधी ने कॉलोनी उजाड़ने पर अपनी सहमति दे दी। इस पर जॉकिन ने विरोध स्वरूप लाल अक्षरों में लिखे पर्चे बाँटे। वह एटोमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन से भी मिले। लेकिन उन्होंने यही कहा कि कल सुबह उस कॉलोनी का उजड़ना भगवान भी नहीं रोक सकता। यह जॉकिन का साहस भरा कदम था कि उन्होंने सुबह साढ़े चार बजे तक कोर्ट से स्टे आर्डर लाकर चेयरमैन को थमा दिया। इस सिद्धांत वाली लड़ाई को जॉकिन हार गए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला नहीं सुनाया। जॉकिन गिरफ्तार कर लिए गए। आशंका बनी कि बह जान से मार दिए जाएँगे। इस पर बी.बी.सी. ने पूरे संसार में इस काण्ड की घोषणा की और यह बताया कि जॉकिन की जान खतरे में है। जॉकिन अर्पुथम ने यही ठीक समझा कि वह [[भारत]] से कुछ समय के लिए निकल जाएँ। [[1976]] में वह फिलीपींस चले गए।<ref name="a"/>
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फिलीपींस में जॉकिन ने मनीला में 'टोंडो फोर शेयर एरिया' में झुग्गी प्रबंधन की ट्रेनिंग ली। उन्होंने फिलीपींस इक्यूमीनिकल काउंसिल फॉर कम्यूनिटी आर्गेनाइजेशन से भी जानकारी जुटाई और पूरी तरह सीख-समझकर [[1978]] में वह फिर [[भारत]] लौटे। वह सीख चुके थे कि विरोध की नीति हठ से नहीं निभाई जा सकती है। फिलीपींस से लौटने के बाद [[1980]] के दशक में जॉकिन के स्लम सुधार कार्यक्रम का विस्तार हुआ और एनएसडीएफ की साझेदारी 'सासायटी फॉर द प्रोमोशन ऑफ एरिया रिसोर्स सेंटर-SPARC' तथा 'महिला मिलन' संस्थाओं से हुई। [[1984]] के आस-पास, एनएसडीएफ के साथ बहुत से दूसरे एनजीओएस का साथ जुड़ गया, जिससे जॉकिन में गहरे विश्वास का संचार हुआ। [[1994]] में जॉकिन ने अपना काम [[पूना]] में भी शुरू कर दिया, जहाँ राजेंद्र नगर कॉलोनी के सामने भी इसी तरह उजाड़ हो जाने का खतरा मण्डरा रहा था।
  
फिलीपींस में जॉकिन ने मनीला में टौण्डो फोर शेयर एरिया में झुग्गी प्रबंधन की ट्रेनिंग ली। उन्होंने फिलीपींस इक्यूमीनिकल काउंसिल फॉर कम्यूनिटी आर्गेनाइजेशन से भी जानकारी जुटाई और पूरी तरह सीख-समझकर [[1978]] में वह फिर [[भारत]] लौटे। वह सीख चुके थे कि विरोध की नीति हठ से नहीं निभाई जा सकती है। फिलीपींस से लौटने के बाद [[1980]] के दशक में जॉकिन के स्लम सुधार कार्यक्रम का विस्तार हुआ और एनएसडीएफ की साझेदारी 'सासायटी फॉर द प्रोमोशन ऑफ एरिया रिसोर्स सेंटर-SPARC' तथा 'महिला मिलन' संस्थाओं से हुई। [[1984]] के आस-पास, एनएसडीएफ के साथ बहुत से दूसरे एनजीओएस का साथ जुड़ गया, जिससे जॉकिन में गहरे विश्वास का संचार हुआ। [[1994]] में जॉकिन ने अपना काम [[पूना]] में भी शुरू कर दिया, जहाँ राजेंद्र नगर कॉलोनी के सामने भी इसी तरह उजाड़ हो जाने का खतरा मण्डरा रहा था।
 
 
==संकटकालीन समय==
 
==संकटकालीन समय==
 
[[1973]] में, सत्ताइस [[वर्ष]] की उम्र में जॉकिन का [[विवाह]] हुआ। उनका वैवाहिक जीवन उनके लिए सार्वजनिक जिम्मेदारी के बाद ही अपना स्थान रखता था। उनकी पत्नी नाताल डिसूजा, असंतोष के बावजूद उनका साथ देती थीं। उन्होंने वह समय भी देखा था, जब उन्हें जॉकिन के काम के लिए अपनी साड़ी बेचनी पड़ी थी। जॉकिन ने भी अपना टाइपराइटर उसी दौर में गिरवी रखा था। इसके बावजूद वह कभी लालच में नहीं पड़े। लेकिन आवास की सुविधा को ठुकराया, राजनैतिक क्षेत्र में उतरने के प्रस्ताव को ठुकराया और कभी डिगे नहीं। कमज़ोर वह बस एक बार हुए, जब [[बम्बई]] मामले के पहले उन्होंने [[बंगलौर]] में आत्महत्या की कोशिश की, जो सफल नहीं हुई।<ref name="a"/>
 
[[1973]] में, सत्ताइस [[वर्ष]] की उम्र में जॉकिन का [[विवाह]] हुआ। उनका वैवाहिक जीवन उनके लिए सार्वजनिक जिम्मेदारी के बाद ही अपना स्थान रखता था। उनकी पत्नी नाताल डिसूजा, असंतोष के बावजूद उनका साथ देती थीं। उन्होंने वह समय भी देखा था, जब उन्हें जॉकिन के काम के लिए अपनी साड़ी बेचनी पड़ी थी। जॉकिन ने भी अपना टाइपराइटर उसी दौर में गिरवी रखा था। इसके बावजूद वह कभी लालच में नहीं पड़े। लेकिन आवास की सुविधा को ठुकराया, राजनैतिक क्षेत्र में उतरने के प्रस्ताव को ठुकराया और कभी डिगे नहीं। कमज़ोर वह बस एक बार हुए, जब [[बम्बई]] मामले के पहले उन्होंने [[बंगलौर]] में आत्महत्या की कोशिश की, जो सफल नहीं हुई।<ref name="a"/>

17:27, 17 सितम्बर 2019 के समय का अवतरण

jaaukin arputham
jaaukin arputham
poora nam jaaukin arputham
janm 15 sitambar, 1946
janm bhoomi kolar zila, karnatak
pati/patni natal di sooja
karm bhoomi bharat
puraskar-upadhi 'reman maigsese puraskar' (2000)
prasiddhi samaj sevak
nagarikata bharatiy
any janakari jaaukin arputham 1963 men mumbee a ge the. man khurd janata kaauloni men unhonne dera jamaya. yah ek avaidh jhuggi basti thi, jahan unhonne badheegiri tatha doosare kam kie. vahan ke doosare ladakon logon ke sath baind parti banaee, jo dalade ke dabbon aur dhapali se ga-baja kar kuchh kamaee karate the.

jaaukin arputham (angrezi: Jockin Arputham, janm- 15 sitambar, 1946, kolar zila, karnatak) ka adhikansh jivan mumbee ki jhuggi bastiyon men sudhar aur vahan ke vasiyon ki samasyaon se joojhane aur unake adhikaron ke sngharsh men bita. unaki jindagi behad utar-chadhav se shuroo huee thi. gandhivadi vicharon se prerit jaaukin arputham ne apane andolan se jhuggi basti men basane vale logon ke jivan men ashcharyajanak parivartan kar dikhae aur unake isi snkalp ke lie unhen varsh 2000 ka 'reman maigsese puraskar' pradan kiya gaya.

parichay

jaaukin arputham ka janm 15 sitambar, san 1946 ko karnatak ke kolar zile men arudayapuram men hua tha. unake mata-pita kaitholik vicharadhara ko manane lage the. jaaukin ki jindagi behad utar-chadhav se shuroo huee thi aur unaka adhikansh jivan mumbee ki jhuggi bastiyon men sudhar aur vahan ke vasiyon ki samasyaon se joojhane aur unake adhikaron ke sngharsh men bita. jis samay jaaukin ka janm hua, unake pita kolar gold pheld men phoramain ke roop men kam kar rahe the, sath hi unhen pnchayat ka president bhi niyukt kiya gaya tha. unaka yah ohada us samay behad rutabe vala tha. us samay ke mukhyamntri kamaraj se unake sambndh the, is nate unaka rajanaitik prabhav bhi tha. aise men indiyan kaitholik ke padariyon dvara snchalit kolar gold phild skool men padhate samay jaaukin ke daen-baen do ardali skool jate the. halanki skool unake ghar ke ekadam pas men hi tha, phir bhi basta, pani ki botal adi lekar chalate ardali unake pita ki shan ke pratik the.[1]

bngalaur agaman

jaaukin ki shiksha abhi satavin kaksha tak hi pahunchi thi ki bhagy ne palata khaya. kolar gold phild men ane ke bad jaaukin ke pita ki jamin doosaron ke pas lij par thi. sharabakhori tatha takat ne nashe men choor jaaukin ke pita ke sath logon ne dhokha kiya aur unaki sari sampatti unake hath se nikal gee. us ghatana se jaaukin ki jindagi ekadam badahali men badal gee. behad garibi ki halat men itane bade parivar ka palan-poshan ekadam kathin ho gaya. unake man men apane pita ke lie bhi rosh panapane laga. parivar ki prishthabhoomi men vah dharmik vritti ke to rahe, lekin kaitholik parampara men unaka vishvas gahara nahin hua. ek din isi paristhiti men jaaukin ne ghoshana ki ki vah apane pita ke parivar ka hissa nahin bane rahana chahiye. us samay unaki umr mushkil se solah varsh ki thi. vah sirph satavin kaksha tak padhe the. unhonne ghar se das rupe churae aur bina tikat gadi men baithakar bngalaur a ge.

jhuggi basti men nivas

bngalaur men jaaukin ke mama ka ghar tha. vahan pahunchakar inhonne kuchh chhote-mote kam kie aur ek saste se skool men badheegiri ka kam sikh liya. jaaukin ke mama ka badheegiri ka achchha kam chal raha tha. jaaukin vahan aprentis lag ge, lekin jald hi unhen laga ki unako doosare karigaron ke mukabale kam vetan diya jata hai. jaaukin ne pahale mama ka ghar chhoda aur phir vah kam bhi chhod diya. kuchh din idhar-udhar doosare chhote-mote kam kiye aur karib do baras bngalaur rah kar vah 1963 men mumbee a ge. man khurd janata kaauloni men unhonne dera jamaya, yah ek avaidh jhuggi basti thi. yahan unhonne badheegiri tatha doosare chhote-mote kam kie. vahan ke doosare chhokare logon ke sath milakar baind parti banaee, jo dalade ke dabbon aur dhapali se ga-baja kar kuchh kamaee karate the. vahin jaaukin ne jhuggi valon ke anapadh bachchon ke lie ek skool jaisa thikana banaya aur unhen khud tichar banakar padhane lage. usamen kuchh doosare log bhi padhane ke lie age ae aur is tarah jaaukin vahan ki jindagi men aur vahan ke logon men ghulane-milane lage. unhonne khud bhi garibi ke din dekhe the aur dekh rahe the. unaki pent men pichhe se chhed the, jise vah kamij ko hath se nache khinchakar dhakane ka prayatn karate rahate the.[1]

man khurd janata kaauloni ek apekshit aur gndi basti thi. usi ilake ki saphaee ki or kisi ka dhyan nahin tha. n vyavastha, n vahan ke rahane vale is or sochate the. aise men jaaukin ne sath ke ladakon ko ikattha karake unhen sath liya aur sabane milakar kaauloni ka kooda karakat uthakar bambe myoonisipal kaaurapareshen ke age jama kar liya. agale din biemasi ke log jaaukin ke pas unhen pakadane ae. jaaukin ne hathapoorvak kaha ki "ham apani kaauloni ki saphaee khud kar lenge, lekin biemaki ko kooda uthane ana chahie. jaaukin ke hath ke age biemaki ko jhukana pada aur yahin se jaaukin ke man men is basti ke lie kuchh karane ka vichar aya.

basti ujadane ka virodh

varsh 1969 men jaaukin ne mumbee slam davalaipars phedareshan ka gathan kiya aur yah nirnay liya ki vah is snstha ka rajistreshan vagairah nahin karaenge, bas kam karenge. 1974 men yah mumbee slam davalaipars phedareshan vikasit hokar 'neshanal slam davalaipars phedareshan' (NSDF) ban gee. jaaukin ke is abhiyan men ek mahattvapoorn mod men aya, jab etaumik enarji kamishan ke hit men janata kaauloni ko ujadakar visthapit karane ki yojana bani. jaaukin ne isaka virodh kiya aur vah is mamale ko uchchatam nyayalay tak le ge. jahan se unhen ste ardar mila; lekin pradhanamntri indira gandhi etomik enarji kamishan ke paksh men ruchi rakhati thi. is par 1975 men jaaukin indira gandhi se milane dilli ae; lekin jab unattis din intajar ke bad bhi unase mulakat nahin ho paee to vah apane sathiyon ko lekar bhookh hadatal par baith ge. ek lambe sngharsh ke bad unako bahut se sansadon tatha sattaroodh dal ki sahanubhoomi mili, lekin indira gandhi ne kaauloni ujadane par apani sahamati de di. is par jaaukin ne virodh svaroop lal aksharon men likhe parche bante. vah etomik enarji kamishan ke cheyaramain se bhi mile. lekin unhonne yahi kaha ki kal subah us kaauloni ka ujadana bhagavan bhi nahin rok sakata. yah jaaukin ka sahas bhara kadam tha ki unhonne subah sadhe char baje tak kort se ste ardar lakar cheyaramain ko thama diya. is siddhant vali ladaee ko jaaukin har ge. suprim kort ne unake paksh men phaisala nahin sunaya. jaaukin giraphtar kar lie ge. ashnka bani ki bah jan se mar die jaenge. is par bi.bi.si. ne poore snsar men is kand ki ghoshana ki aur yah bataya ki jaaukin ki jan khatare men hai. jaaukin arputham ne yahi thik samajha ki vah bharat se kuchh samay ke lie nikal jaen. 1976 men vah philipins chale ge.[1]

philipins men jaaukin ne manila men 'tondo phor sheyar eriya' men jhuggi prabndhan ki trening li. unhonne philipins ikyoominikal kaunsil phaaur kamyooniti argenaijeshan se bhi janakari jutaee aur poori tarah sikh-samajhakar 1978 men vah phir bharat laute. vah sikh chuke the ki virodh ki niti hath se nahin nibhaee ja sakati hai. philipins se lautane ke bad 1980 ke dashak men jaaukin ke slam sudhar karyakram ka vistar hua aur enesadieph ki sajhedari 'sasayati phaaur d promoshan aauph eriya risors sentar-SPARC' tatha 'mahila milan' snsthaon se huee. 1984 ke as-pas, enesadieph ke sath bahut se doosare enajioes ka sath jud gaya, jisase jaaukin men gahare vishvas ka snchar hua. 1994 men jaaukin ne apana kam poona men bhi shuroo kar diya, jahan rajendr nagar kaauloni ke samane bhi isi tarah ujad ho jane ka khatara mandara raha tha.

snkatakalin samay

1973 men, sattais varsh ki umr men jaaukin ka vivah hua. unaka vaivahik jivan unake lie sarvajanik jimmedari ke bad hi apana sthan rakhata tha. unaki patni natal disooja, asntosh ke bavajood unaka sath deti thin. unhonne vah samay bhi dekha tha, jab unhen jaaukin ke kam ke lie apani sadi bechani padi thi. jaaukin ne bhi apana taiparaitar usi daur men giravi rakha tha. isake bavajood vah kabhi lalach men nahin pade. lekin avas ki suvidha ko thukaraya, rajanaitik kshetr men utarane ke prastav ko thukaraya aur kabhi dige nahin. kamazor vah bas ek bar hue, jab bambee mamale ke pahale unhonne bngalaur men atmahatya ki koshish ki, jo saphal nahin huee.[1]

jaaukin ne ek lamba sngharshamay jivan jiya. is dauran unake prayas se slam kshetr men bahut sudhar hue, halanki yah poori tarah vanchhit roop men nahin pahuncha. phir bhi is disha men jaaukin desh-videsh ke logon ka dhyan akarshit kar sake. logon men svayn kam karane ki vritti jaga sake, yah mahattvapoorn bat hai.


panne ki pragati avastha
adhar
prarambhik
madhyamik
poornata
shodh

tika tippani aur sndarbh

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 maigsese puraskar vijeta bharatiy |lekhak: ashok gupta |prakashak: naya sahity, kashmiri get, dilli |snkalan: bharat diskavari pustakalay |prishth snkhya: 132 |

bahari kadiyan