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||[[चित्र:Jainism-Symbol.jpg|right|80px|जैन धर्म का प्रतीक]][[जैन धर्म]] [[भारत]] की श्रमण परम्परा से निकला [[धर्म]] और [[दर्शन]] है। 'जैन' उन्हें कहते हैं, जो 'जिन' के अनुयायी हों। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने-जीतना। 'जिन' माने जीतने वाला, जिन्होंने अपने मन को जीत लिया, अपनी वाणी को जीत लिया और अपनी काया को जीत लिया, वे हैं 'जिन'। जैन धर्म अर्थात् 'जिन' भगवान् का धर्म। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों ने अपने-अपने समय में धर्म मार्ग से च्युत हो रहे जनसमुदाय को संबोधित किया और उसे धर्ममार्ग में लगाया। इसी से इन्हें 'धर्ममार्ग-मोक्षमार्ग का नेता' और 'तीर्थ प्रवर्त्तक' अर्थात् '[[तीर्थंकर]]' कहा गया है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[जैन धर्म]]</quiz>
 
||[[चित्र:Jainism-Symbol.jpg|right|80px|जैन धर्म का प्रतीक]][[जैन धर्म]] [[भारत]] की श्रमण परम्परा से निकला [[धर्म]] और [[दर्शन]] है। 'जैन' उन्हें कहते हैं, जो 'जिन' के अनुयायी हों। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने-जीतना। 'जिन' माने जीतने वाला, जिन्होंने अपने मन को जीत लिया, अपनी वाणी को जीत लिया और अपनी काया को जीत लिया, वे हैं 'जिन'। जैन धर्म अर्थात् 'जिन' भगवान् का धर्म। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों ने अपने-अपने समय में धर्म मार्ग से च्युत हो रहे जनसमुदाय को संबोधित किया और उसे धर्ममार्ग में लगाया। इसी से इन्हें 'धर्ममार्ग-मोक्षमार्ग का नेता' और 'तीर्थ प्रवर्त्तक' अर्थात् '[[तीर्थंकर]]' कहा गया है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[जैन धर्म]]</quiz>
 
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{{पहेली क्रम |पिछली=[[पहेली 29 नवम्बर 2019]]|अगली=[[पहेली 01 दिसम्बर 2019]]}}
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1. jain parampara ke anusar jain dharm men kul kitane tirthnkar hue hain?

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jain dharm ka pratik
jain dharm bharat ki shraman parampara se nikala dharm aur darshan hai. 'jain' unhen kahate hain, jo 'jin' ke anuyayi hon. 'jin' shabd bana hai 'ji' dhatu se. 'ji' mane-jitana. 'jin' mane jitane vala, jinhonne apane man ko jit liya, apani vani ko jit liya aur apani kaya ko jit liya, ve hain 'jin'. jain dharm arthath 'jin' bhagavanh ka dharm. jain dharm ke 24 tirthnkaron ne apane-apane samay men dharm marg se chyut ho rahe janasamuday ko snbodhit kiya aur use dharmamarg men lagaya. isi se inhen 'dharmamarg-mokshamarg ka neta' aur 'tirth pravarttak' arthath 'tirthnkar' kaha gaya hai.dhyan denadhik janakari ke lie dekhen:-jain dharm

apake kul ank hai 0 / 0



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