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(मृत्यु)
 
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|अन्य जानकारी=इन्हें 'भारत का राष्ट्रीय अध्यापक' और [[महात्मा गांधी]] का 'आध्यात्मिक उत्तराधिकारी' समझा जाता है।
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'''विनोबा भावे''' ([[अंग्रेज़ी]]:''Vinoba Bhave'', जन्म: [[11 सितंबर]], 1895 - मृत्यु: [[15 नवम्बर]] 1982) [[महात्मा गांधी]] के आदरणीय अनुयायी, [[भारत]] के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे।
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'''विनोबा भावे''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Vinoba Bhave'', जन्म: [[11 सितंबर]], 1895; मृत्यु: [[15 नवम्बर]] 1982) [[महात्मा गांधी]] के आदरणीय अनुयायी, [[भारत]] के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं '[[भूदान यज्ञ]]' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे। इनकी समस्‍त ज़िंदगी साधु संयासियों जैसी रही, इसी कारणवश ये एक संत के तौर पर प्रख्‍यात हुए। विनोबा भावे अत्‍यंत विद्वान एवं विचारशील व्‍यक्तित्‍व वाले शख्‍स थे। [[महात्मा गाँधी]] के परम शिष्‍य 'जंग ए आज़ादी' के इस योद्धा ने [[वेद]], [[वेदांत]], [[गीता]], [[रामायण]], [[क़ुरआन]], [[बाइबिल]] आदि अनेक धार्मिक ग्रंथों का उन्‍होंने गहन गंभीर अध्‍ययन मनन किया। अर्थशास्‍त्र, राजनीति और दर्शन के आधुनिक सिद्धांतों का भी विनोबा भावे ने गहन अवलोकन चिंतन किया गया।<ref name="TRI"/>
 
==जीवन परिचय==
 
==जीवन परिचय==
विनोबा भावे का जन्म  [[11 सितंबर]], 1895 को गाहोदे, [[गुजरात]], [[भारत]] में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम '''विनायक नरहरि भावे''' था।
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विनोबा भावे का जन्म  [[11 सितंबर]], 1895 को गाहोदे, [[गुजरात]], [[भारत]] में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम '''विनायक नरहरि भावे''' था। एक कुलीन [[ब्राह्मण]] परिवार जन्मे विनोबा ने 'गांधी आश्रम' में शामिल होने के लिए [[1916]] में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। [[गाँधी जी]] के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।  
==तपस्वी रूप==
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====प्रारम्भिक जीवन====
एक कुलीन [[ब्राह्मण]] परिवार जन्मे विनोबा ने 'गांधी आश्रम' में शामिल होने के लिए 1916 में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। [[गाँधी जी]] के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।
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विनायक की बुद्धि अत्‍यंत प्रखर थी। गणित उसका सबसे प्‍यारा विषय बन गया। हाई स्‍कूल परीक्षा में गणित में सर्वोच्‍च अंक प्राप्‍त किए। बड़ौदा में ग्रेजुएशन करने के दौरान ही विनायक का मन वैरागी बनने के लिए अति आतुर हो उठा। [[1916]] में मात्र 21 वर्ष की आयु में गृहत्‍याग कर दिया और साधु बनने के लिए [[काशी]] नगरी की ओर रूख किया। काशी नगरी में वैदिक पंडितों के सानिध्‍य में शास्‍त्रों के अध्‍ययन में जुट गए। [[महात्मा गाँधी]] की चर्चा देश में चारों ओर चल रही थी कि वह [[दक्षिण अफ्रीका|दक्षिणी अफ्रीका]] से [[भारत]] आ गए हैं और आज़ादी का बिगुल बजाने में जुट गए हैं। अखंड स्‍वाध्‍याय और ज्ञानाभ्‍यास के दौरान विनोबा का मन गाँधी जी  से मिलने के लिए किया तो वह पंहुच गए [[अहमदाबाद]] के कोचरब आश्रम में। जब पंहुचे तो गाँधी जी सब्‍जी काट रहे थे। इतना प्रख्‍यात नेता सब्‍जी काटते हुए मिलेगा, ऐसा तो कदाचित विनोबा ने सोचा न था। बिना किसी उपदेश के स्‍वालंबन और श्रम का पाठ पढ़ लिया। इस मुलाकात के बाद तो जीवन भर के लिए वह बापू के ही हो गए।<ref name="TRI"/>
 
==जेल यात्रा==
 
==जेल यात्रा==
1920 और 1930 के दशक में भावे कई बार जेल गए और 1940 के दशक में ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण पाँच साल के लिए जेल जाना पड़ा। उन्हें सम्मानपूर्वक आचार्य की उपाधि दी गई।
+
बापू के सानिध्‍य और निर्देशन में विनोबा के लिए ब्रिटिश जेल एक तीर्थधाम बन गई। सन् [[1921]] से लेकर [[1942]] तक अनेक बार जेल यात्राएं हुई। सन् 1922 में [[नागपुर]] का झंडा सत्‍याग्रह किया। ब्रिटिश हुकूमत ने सीआरपीसी की धारा 109 के तहत विनोबा को गिरफ़्तार किया। इस धारा के तहत आवारा गुंडों को गिरफ्तार किया जाता है। नागपुर जेल में विनोबा को पत्थर तोड़ने का काम दिया गया। कुछ महीनों के पश्‍चात अकोला जेल भेजा गया। विनोबा का तो मानो तपोयज्ञ प्रारम्‍भ हो गया। 1925 में हरिजन सत्‍याग्रह के दौरान जेल यात्रा हुई। [[1930]] में गाँधी के नेतृत्व में राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने [[नमक सत्याग्रह]] को अंजाम दिया।<ref name="TRI"/>[[चित्र:Gandhi-and-vinoba.jpg|thumb|left|[[महात्मा गाँधी]] और विनोबा भावे]]
==भूमि का दान==
+
==गाँधी जी और विनोबा भावे==
विनोबा भावे का 'भूदान आंदोलन' का विचार 1951 में जन्मा। जब वह [[आन्ध्र प्रदेश]] के गाँवों में भ्रमण कर रहे थे, भूमिहीन अस्पृश्य लोगों या हरिजनों के एक समूह के लिए ज़मीन मुहैया कराने की अपील के जवाब में एक ज़मींदार ने उन्हें एक एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव किया। इसके बाद वह गाँव-गाँव घूमकर भूमिहीन लोगों के लिए भूमि का दान करने की अपील करने लगे और उन्होंने इस दान को गांधीजी के अहिंसा के सिद्धान्त से संबंधित कार्य बताया। भावे के अनुसार, यह भूमि सुधार कार्यक्रम हृदय परिवर्तन के तहत होना चाहिए न कि इस ज़मीन के बँटवारे से बड़े स्तर पर होने वाली [[कृषि]] के तार्किक कार्यक्रमों में अवरोध आएगा, लेकिन भावे ने घोषणा की कि वह हृदय के बँटवारे की तुलना में ज़मीन के बँटवारे को ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने लोगों को 'ग्रामदान' के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें ग्रामीण लोग अपनी भूमि को एक साथ मिलाने के बाद उसे सहकारी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्गठित करते।
+
[[12 मार्च]] [[1930]] को गाँधी जी ने [[दांडी मार्च]] शुरू किया। विनोबा फिर से जेल पंहुच गए। इस बार उन्‍हें धुलिया जेल रखा गया। [[सी. राजगोपालाचारी|राजगोपालाचार्य]] जिन्‍हें राजाजी भी कहा जाता था, उन्‍होंने विनोबा के विषय में 'यंग इंडिया' में लिखा था कि विनोबा को देखिए देवदूत जैसी पवित्रता है उसमें। आत्‍मविद्वता, तत्‍वज्ञान और धर्म के उच्‍च शिखरों पर विराजमान है वह। उसकी [[आत्मा]] ने इतनी विनम्रता ग्रहण कर ली है कि कोई ब्रिटिश अधिकारी यदि पहचानता नहीं तो उसे विनोबा की महानता का अंदाजा नहीं लगा सकता। जेल की किसी भी श्रेणी में उसे रख दिया जाए वह जेल में अपने साथियों के साथ कठोर श्रम करता रहता है। अनुमान भी नहीं होता कि य‍ह मानव जेल में चुपचाप कितनी यातनाएं सहन कर रहा है। [[11 अक्टूबर]] [[1940]] को गाँधी द्वारा व्‍यक्तिगत सत्‍याग्रह के प्रथम सत्‍याग्रही के तौर पर विनोबा को चुना गया। प्रसिद्धि की चाहत से दूर विनोबा इस सत्‍याग्रह के कारण बेहद मशहूर हो गए। उनको गांव गांव में युद्ध विरोधी तक़रीरें करते हुए आगे बढ़ते चले जाना था। ब्रिटिश सरकार द्वारा [[21 अक्टूबर]] को विनोबा को गिरफ़्तार किया गया। सन् [[1942]] में [[9 अगस्त]] को वह गाँधी और [[कांग्रेस]] के अन्‍य बड़े नेताओं के साथ गिरफ़्तार किये गये। इस बार उनको पहले नागपुर जेल में फिर वेलूर जेल में रखा।<ref name="TRI"/>
==भूमि सुधार==
+
==बहुभाषी व्यक्तित्त्व==
आपके भूदान आन्दोलन से प्रेरित होकर [[हरदोई]] जनपद के [[सर्वोदय आश्रम टडियांवा]] द्वारा [[उत्तर प्रदेश]] के 25 जनपदों में श्री [[रमेश भाई]] के नेतृत्व में उसर भूमि सुधार कार्यक्रम सफलता पूर्वक चलाया गया।  
+
जेल में ही विनोबा ने 46 वर्ष की आयु में [[अरबी भाषा|अरबी]] और [[फारसी भाषा]] का अध्‍ययन आरम्‍भ किया और [[क़ुरआन]] पढ़ना भी शुरू किया। अत्‍यंत कुशाग्र बुद्धि के विनोबा जल्‍द ही हाफ़िज़ ए क़ुरआन बन गए। [[मराठी भाषा|मराठी]], [[संस्कृत]], [[हिंदी]], [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[बंगला भाषा|बंगला]], [[अंग्रेज़ी]], फ्रेंच भाषाओं में तो वह पहले ही पारंगत हो चुके थे। विभिन्‍न भाषाओं के तकरीबन पचास हजार पद्य विनोबा को बाक़ायदा कंठस्‍थ थे। समस्‍त अर्जित ज्ञान को अपनी ज़िंदगी में लागू करने का भी उन्‍होंने अप्रतिम एवं अथ‍क प्रयास किया।<ref name="TRI">{{cite web |url=http://troindia.blogspot.in/2012/06/blog-post_14.html |title=विनोबा भावे |accessmonthday=22 जून |accessyear=2013 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=The Realty of India |language=हिन्दी }}</ref>
==मौन व्रत==
+
 
[[1975]] में पूरे [[वर्ष]] भर अपने अनुयायियों के राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के मुद्दे पर भावे ने मौन व्रत रखा। [[1979]] के एक आमरण अनशन के परिणामस्वरूप सरकार ने समूचे [[भारत]] में गो-हत्या पर निषेध लगाने हेतु क़ानून पारित करने का आश्वासन दिया।
+
भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री [[अटल बिहारी वाजपेयी]] ने विनोबा जी पर निम्न पद्यात्मक पंक्तियाँ लिखीं
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'''धन्य तू विनोबा ! '''
 +
<poem>
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जन की लगाय बाजी गाय की बचाई जान,
 +
धन्य तू विनोबा ! तेरी कीरति अमर है।
 +
दूध बलकारी, जाको पूत हलधारी होय,
 +
सिंदरी लजात मल – मूत्र उर्वर है।
 +
घास–पात खात दीन वचन उचारे जात,
 +
मरि के हू काम देत चाम जो सुघर है।
 +
बाबा ने बचाय लीन्ही दिल्ली दहलाय दीन्ही,
 +
बिना लाव लस्कर समर कीन्हो सर है।
 +
</poem>
 +
 
 +
==साहित्यिक योगदान==
 +
विनोबा भावे एक महान् विचारक, लेखक और विद्वान थे जिन्होंने ना जाने कितने लेख लिखने के साथ-साथ संस्कृत भाषा को आमजन मानस के लिए सहज बनाने का भी सफल प्रयास किया। विनोबा भावे एक बहुभाषी व्यक्ति थे। उन्हें लगभग सभी भारतीय भाषाओं का ज्ञान था। वह एक उत्कृष्ट वक्ता और समाज सुधारक भी थे। विनोबा भावे के अनुसार [[कन्नड़ लिपि]] विश्व की सभी 'लिपियों की रानी' है। विनोबा भावे ने [[गीता]], [[क़ुरआन]], [[बाइबिल]] जैसे धर्म ग्रंथों के अनुवाद के साथ ही इनकी आलोचनाएं भी की। विनोबा भावे भागवत गीता से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। वो कहते थे कि गीता उनके जीवन की हर एक सांस में है। उन्होंने गीता को मराठी भाषा में अनुवादित भी किया था।<ref>{{cite web |url=http://politics.jagranjunction.com/2011/12/05/gandhi-follower-and-social-worker-vinoba-bhave-profile/ |title=महान विचारक और समाज सुधारक विनोबा भावे |accessmonthday=22 जून |accessyear=2013 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=जागरण जंक्शन|language=हिन्दी }}</ref>
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==भूदान आन्दोलन==
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{{main|भूदान आन्दोलन}}
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[[चित्र:Acharya-Vinoba-Bhave.jpg|thumb|[[भूदान आन्दोलन|भूदान आंदोलन]] के दौरान विनोबा भावे]]
 +
विनोबा भावे का 'भूदान आंदोलन' का विचार [[1951]] में जन्मा। जब वह [[आन्ध्र प्रदेश]] के गाँवों में भ्रमण कर रहे थे, भूमिहीन अस्पृश्य लोगों या हरिजनों के एक समूह के लिए ज़मीन मुहैया कराने की अपील के जवाब में एक ज़मींदार ने उन्हें एक एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव किया। इसके बाद वह गाँव-गाँव घूमकर भूमिहीन लोगों के लिए भूमि का दान करने की अपील करने लगे और उन्होंने इस दान को गांधीजी के अहिंसा के सिद्धान्त से संबंधित कार्य बताया। भावे के अनुसार, यह भूमि सुधार कार्यक्रम हृदय परिवर्तन के तहत होना चाहिए न कि इस ज़मीन के बँटवारे से बड़े स्तर पर होने वाली [[कृषि]] के तार्किक कार्यक्रमों में अवरोध आएगा, लेकिन भावे ने घोषणा की कि वह हृदय के बँटवारे की तुलना में ज़मीन के बँटवारे को ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने लोगों को 'ग्रामदान' के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें ग्रामीण लोग अपनी भूमि को एक साथ मिलाने के बाद उसे सहकारी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्गठित करते। आपके भूदान आन्दोलन से प्रेरित होकर [[हरदोई]] जनपद के [[सर्वोदय आश्रम टडियांवा]] द्वारा [[उत्तर प्रदेश]] के 25 जनपदों में श्री [[रमेश भाई]] के नेतृत्व में उसर भूमि सुधार कार्यक्रम सफलता पूर्वक चलाया गया।
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==मौलिक कार्यक्रम==  
 
==मौलिक कार्यक्रम==  
विनोबा भावे के मौलिक कार्यक्रम और जीवन के उनके दर्शन को एक लेखों की श्रृंखला में समझाया गया है, जिन्हें 'भूदान यज्ञ' ([[1953]]) नामक एक पुस्तक में संगृहीत एवं प्रकाशित किया गया है।
+
विनोबा भावे के मौलिक कार्यक्रम और जीवन के उनके दर्शन को एक लेखों की शृंखला में समझाया गया है, जिन्हें 'भूदान यज्ञ' ([[1953]]) नामक एक पुस्तक में संग्रहीत एवं प्रकाशित किया गया है।
 
==सम्मान एवं पुरस्कार==
 
==सम्मान एवं पुरस्कार==
विनोबा को [[1958]] में प्रथम [[रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान [[भारत रत्न]] से [[1983]] में मरणोपरांत सम्मानित किया।
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विनोबा को [[1958]] में [[रेमन मैग्सेसे पुरस्कार|प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान [[भारत रत्न]] से [[1983]] में मरणोपरांत सम्मानित किया।
==मृत्यु==
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==मौन व्रत==
विनोबा जी ने जब यह देख लिया कि वृद्धावस्था ने उन्हें आ घेरा है तो उन्होंने अन्न [[जल]] त्याग दिया।  जब आचार्य विनोवा जी ने अन्न और जल त्याग दिया तो उनके समर्थकों ने उनसे चैतन्यावस्था में बने रहने के लिये उर्जा के स्त्रोत की जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि वे वायु आकाश आदि से उर्जा ग्रहण करते हैं। आचार्य विनोवा ने कहा कि मृत्यु का दिवस विषाद का दिवस नहीं अपितु उत्सव का दिवस है इसलिये उन्होंने अपनी मृत्यु के लिये की दीपावली का दिवस [[15 नवम्बर]] को निर्वाण दिवस के रूप में चुना। इस प्रकार अन्न जल त्यागने के कारण एक सप्ताह के अन्दर ही [[15 नवम्बर]] [[1982]], वर्धा, [[महाराष्ट्र]] में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये।
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[[चित्र:Vinova_samadhi_pawnar.JPG|[[विनोबा भावे]] समाधि स्थल [[पवनार आश्रम]]|thumb|250px]]
विनोवा जी के शरीर त्यागने के उपरांत [[पवनार आश्रम]] के सभी बहनों ने
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[[1975]] में पूरे [[वर्ष]] भर अपने अनुयायियों के राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के मुद्दे पर भावे ने मौन व्रत रखा। [[1979]] के एक आमरण अनशन के परिणामस्वरूप सरकार ने समूचे [[भारत]] में गो-हत्या पर निषेध लगाने हेतु क़ानून पारित करने का आश्वासन दिया।
उन्हे संयुक्त रूप से [[मुखाग्नि]] दी।
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==निधन==
इतिहास में इस तरह की मृत्यु के उदाहरण गिने चुने ही मिलते है। इस प्रकार मरने की क्रिया को '''[[प्रायोपवेश]]''' कहते है।  
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विनोबा जी ने जब यह देख लिया कि वृद्धावस्था ने उन्हें आ घेरा है तो उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया।  जब आचार्य विनोवा जी ने अन्न और जल त्याग दिया तो उनके समर्थकों ने उनसे चैतन्यावस्था में बने रहने के लिये [[ऊर्जा]] के स्त्रोत की जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि वे [[वायु]] [[आकाश]] आदि से ऊर्जा ग्रहण करते हैं। आचार्य विनोबा ने कहा कि 'मृत्यु का दिवस विषाद का दिवस नहीं अपितु उत्सव का दिवस' है इसलिये उन्होंने अपनी मृत्यु के लिये [[दीपावली]] का दिवस [[15 नवम्बर]] को निर्वाण दिवस के रूप में चुना। इस प्रकार अन्न जल त्यागने के कारण एक सप्ताह के अन्दर ही [[15 नवम्बर]] [[1982]], [[वर्धा ज़िला|वर्धा]], [[महाराष्ट्र]] में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये। विनोबा जी के शरीर त्यागने के उपरांत [[पवनार आश्रम]] के सभी बहनों ने उन्हें संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी। इतिहास में इस तरह की मृत्यु के उदाहरण गिने चुने ही मिलते है। इस प्रकार मरने की क्रिया को '''[[प्रायोपवेश]]''' कहते है।  
 
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
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==बाहरी कड़ियाँ==
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*[http://www.vinobabhave.org/en/ आधिकारिक वेबसाइट]
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*[http://burabhala.wordpress.com/2009/09/11/%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A5/ भूदान आंदोलन के प्रणेता थे विनोबा भावे]
 +
*[http://hindi.webdunia.com/kidsworld-prompterpersonality/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%87-1120910038_1.htm महान् स्वतंत्रता सेनानी : विनोबा भावे]
 +
*[http://www.vbuhazaribag.org/website/index.html Vinoba Bhave University]
 +
*[http://www.mkgandhi.org/vinoba/vinoba.htm ACHARYA VINOBA BHAVE]
 +
*[http://www.mkgandhi.org/vinoba/bio.htm Vinoba Bhave - A life Sketch]
 +
*[http://www.mkgandhi.org/vinoba/pics.htm Selected Photographs of Vinoba Bhave]
 +
*[http://rmaward.asia/awardees/bhave-vinoba/ Bhave, Vinoba]
 
==संबंधित लेख==
 
==संबंधित लेख==
 
{{भारत रत्‍न}}{{भारत रत्‍न2}}{{समाज सुधारक}}{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{स्वतन्त्रता सेनानी}}
 
{{भारत रत्‍न}}{{भारत रत्‍न2}}{{समाज सुधारक}}{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{स्वतन्त्रता सेनानी}}
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[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]
 
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]
 
[[Category:रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]]
 
[[Category:रेमन मैग्सेसे पुरस्कार]]
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[[Category:विनोबा भावे]]
 
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10:47, 15 नवम्बर 2017 के समय का अवतरण

vinoba bhave
vinayak narahari bhave
poora nam vinayak narahari bhave
janm 11 sitnbar, 1895
janm bhoomi gahode, gujarat, bharat
mrityu 15 navambar, 1982
mrityu sthan vardha, maharashtr
abhibhavak narahari bhave
karm bhoomi bharat
karm-kshetr svatntrata senani, vicharak, samaj sudharak
bhasha marathi, snskrit, hindi, arabi, farasi, gujarati, bngala, angrezi, phrench adi.
puraskar-upadhi bharat ratn, pratham reman maigsese puraskar
vishesh yogadan bhoodan andolan dvara samaj men bhoosvamiyon aur bhoomihinon ke bich ki gahari khaee ko patane ka ek anootha prayas kiya.
nagarikata bharatiy
snbndhit lekh pavanar ashram, bhoodan andolan, vinoba bhave ke anamol vachan, vinoba bhave ke prerak prasng
andolan 'bhoodan ygy' namak andolan ke snsthapak the.
jel yatra 1920 aur 1930 ke dashak men bhave kee bar jel ge aur 1940 men unhen panch sal ke lie jel jana pada.
any janakari inhen 'bharat ka rashtriy adhyapak' aur mahatma gandhi ka 'adhyatmik uttaradhikari' samajha jata hai.
bahari kadiyan adhikarik vebasait

vinoba bhave (angrezi: Vinoba Bhave, janm: 11 sitnbar, 1895; mrityu: 15 navambar 1982) mahatma gandhi ke adaraniy anuyayi, bharat ke ek sarvadhik jane-mane samaj sudharak evn 'bhoodan ygy' namak andolan ke snsthapak the. inaki samash‍t zindagi sadhu snyasiyon jaisi rahi, isi karanavash ye ek snt ke taur par prakhh‍yat hue. vinoba bhave ath‍ynt vidvan evn vicharashil vh‍yaktith‍v vale shakhh‍s the. mahatma gandhi ke param shishh‍y 'jng e azadi' ke is yoddha ne ved, vedant, gita, ramayan, quran, baibil adi anek dharmik grnthon ka unh‍honne gahan gnbhir adhh‍yayan manan kiya. arthashash‍tr, rajaniti aur darshan ke adhunik siddhanton ka bhi vinoba bhave ne gahan avalokan chintan kiya gaya.[1]

jivan parichay

vinoba bhave ka janm 11 sitnbar, 1895 ko gahode, gujarat, bharat men hua tha. vinoba bhave ka mool nam vinayak narahari bhave tha. ek kulin brahman parivar janme vinoba ne 'gandhi ashram' men shamil hone ke lie 1916 men haee skool ki padhaee bich men hi chhod di. gandhi ji ke upadeshon ne bhave ko bharatiy gramin jivan ke sudhar ke lie ek tapasvi ke roop men jivan vyatit karane ke lie prerit kiya.

prarambhik jivan

vinayak ki buddhi ath‍ynt prakhar thi. ganit usaka sabase ph‍yara vishay ban gaya. haee sh‍kool pariksha men ganit men sarvochh‍ch ank praph‍t kie. badauda men grejueshan karane ke dauran hi vinayak ka man vairagi banane ke lie ati atur ho utha. 1916 men matr 21 varsh ki ayu men grihath‍yag kar diya aur sadhu banane ke lie kashi nagari ki or rookh kiya. kashi nagari men vaidik pnditon ke sanidhh‍y men shash‍tron ke adhh‍yayan men jut ge. mahatma gandhi ki charcha desh men charon or chal rahi thi ki vah dakshini aphrika se bharat a ge hain aur azadi ka bigul bajane men jut ge hain. akhnd sh‍vadhh‍yay aur gyanabhh‍yas ke dauran vinoba ka man gandhi ji se milane ke lie kiya to vah pnhuch ge ahamadabad ke kocharab ashram men. jab pnhuche to gandhi ji sabh‍ji kat rahe the. itana prakhh‍yat neta sabh‍ji katate hue milega, aisa to kadachit vinoba ne socha n tha. bina kisi upadesh ke sh‍valnban aur shram ka path padh liya. is mulakat ke bad to jivan bhar ke lie vah bapoo ke hi ho ge.[1]

jel yatra

bapoo ke sanidhh‍y aur nirdeshan men vinoba ke lie british jel ek tirthadham ban gee. sanh 1921 se lekar 1942 tak anek bar jel yatraen huee. sanh 1922 men nagapur ka jhnda sath‍yagrah kiya. british hukoomat ne siarapisi ki dhara 109 ke tahat vinoba ko giraftar kiya. is dhara ke tahat avara gundon ko giraphtar kiya jata hai. nagapur jel men vinoba ko patthar todane ka kam diya gaya. kuchh mahinon ke pashh‍chat akola jel bheja gaya. vinoba ka to mano tapoygy praramh‍bh ho gaya. 1925 men harijan sath‍yagrah ke dauran jel yatra huee. 1930 men gandhi ke netritv men rashh‍triy kangres ne namak satyagrah ko anjam diya.[1]
mahatma gandhi aur vinoba bhave

gandhi ji aur vinoba bhave

12 march 1930 ko gandhi ji ne dandi march shuroo kiya. vinoba phir se jel pnhuch ge. is bar unh‍hen dhuliya jel rakha gaya. rajagopalachary jinh‍hen rajaji bhi kaha jata tha, unh‍honne vinoba ke vishay men 'yng indiya' men likha tha ki vinoba ko dekhie devadoot jaisi pavitrata hai usamen. ath‍mavidvata, tath‍vgyan aur dharm ke uchh‍ch shikharon par virajaman hai vah. usaki atma ne itani vinamrata grahan kar li hai ki koee british adhikari yadi pahachanata nahin to use vinoba ki mahanata ka andaja nahin laga sakata. jel ki kisi bhi shreni men use rakh diya jae vah jel men apane sathiyon ke sath kathor shram karata rahata hai. anuman bhi nahin hota ki y‍h manav jel men chupachap kitani yatanaen sahan kar raha hai. 11 aktoobar 1940 ko gandhi dvara vh‍yaktigat sath‍yagrah ke pratham sath‍yagrahi ke taur par vinoba ko chuna gaya. prasiddhi ki chahat se door vinoba is sath‍yagrah ke karan behad mashahoor ho ge. unako ganv ganv men yuddh virodhi taqariren karate hue age badhate chale jana tha. british sarakar dvara 21 aktoobar ko vinoba ko giraftar kiya gaya. sanh 1942 men 9 agast ko vah gandhi aur kangres ke anh‍y bade netaon ke sath giraftar kiye gaye. is bar unako pahale nagapur jel men phir veloor jel men rakha.[1]

bahubhashi vyaktittv

jel men hi vinoba ne 46 varsh ki ayu men arabi aur pharasi bhasha ka adhh‍yayan aramh‍bh kiya aur quran padhana bhi shuroo kiya. ath‍ynt kushagr buddhi ke vinoba jalh‍d hi hafiz e quran ban ge. marathi, snskrit, hindi, gujarati, bngala, angrezi, phrench bhashaon men to vah pahale hi parngat ho chuke the. vibhinh‍n bhashaon ke takariban pachas hajar pady vinoba ko baqayada knthash‍th the. samash‍t arjit gyan ko apani zindagi men lagoo karane ka bhi unh‍honne apratim evn ath‍k prayas kiya.[1]

bharat ke poorv pradhan mntri shri atal bihari vajapeyi ne vinoba ji par nimn padyatmak pnktiyan likhin

dhany too vinoba !

jan ki lagay baji gay ki bachaee jan,
dhany too vinoba ! teri kirati amar hai.
doodh balakari, jako poot haladhari hoy,
sindari lajat mal – mootr urvar hai.
ghas–pat khat din vachan uchare jat,
mari ke hoo kam det cham jo sughar hai.
baba ne bachay linhi dilli dahalay dinhi,
bina lav laskar samar kinho sar hai.

sahityik yogadan

vinoba bhave ek mahanh vicharak, lekhak aur vidvan the jinhonne na jane kitane lekh likhane ke sath-sath snskrit bhasha ko amajan manas ke lie sahaj banane ka bhi saphal prayas kiya. vinoba bhave ek bahubhashi vyakti the. unhen lagabhag sabhi bharatiy bhashaon ka gyan tha. vah ek utkrisht vakta aur samaj sudharak bhi the. vinoba bhave ke anusar kannad lipi vishv ki sabhi 'lipiyon ki rani' hai. vinoba bhave ne gita, quran, baibil jaise dharm grnthon ke anuvad ke sath hi inaki alochanaen bhi ki. vinoba bhave bhagavat gita se bahut jyada prabhavit the. vo kahate the ki gita unake jivan ki har ek sans men hai. unhonne gita ko marathi bhasha men anuvadit bhi kiya tha.[2]

bhoodan andolan

bhoodan andolan ke dauran vinoba bhave

vinoba bhave ka 'bhoodan andolan' ka vichar 1951 men janma. jab vah andhr pradesh ke ganvon men bhraman kar rahe the, bhoomihin asprishy logon ya harijanon ke ek samooh ke lie zamin muhaiya karane ki apil ke javab men ek zamindar ne unhen ek ekad zamin dene ka prastav kiya. isake bad vah ganv-ganv ghoomakar bhoomihin logon ke lie bhoomi ka dan karane ki apil karane lage aur unhonne is dan ko gandhiji ke ahinsa ke siddhant se snbndhit kary bataya. bhave ke anusar, yah bhoomi sudhar karyakram hriday parivartan ke tahat hona chahie n ki is zamin ke bntavare se bade star par hone vali krishi ke tarkik karyakramon men avarodh aega, lekin bhave ne ghoshana ki ki vah hriday ke bntavare ki tulana men zamin ke bntavare ko zyada pasnd karate hain. halanki bad men unhonne logon ko 'gramadan' ke lie protsahit kiya, jisamen gramin log apani bhoomi ko ek sath milane ke bad use sahakari pranali ke antargat punargathit karate. apake bhoodan andolan se prerit hokar haradoee janapad ke sarvoday ashram tadiyanva dvara uttar pradesh ke 25 janapadon men shri ramesh bhaee ke netritv men usar bhoomi sudhar karyakram saphalata poorvak chalaya gaya.

maulik karyakram

vinoba bhave ke maulik karyakram aur jivan ke unake darshan ko ek lekhon ki shrinkhala men samajhaya gaya hai, jinhen 'bhoodan ygy' (1953) namak ek pustak men sngrahit evn prakashit kiya gaya hai.

samman evn puraskar

vinoba ko 1958 men pratham reman maigsese puraskar se sammanit kiya gaya. bharat sarakar ne unhen desh ke sarvochch nagarik samman bharat ratn se 1983 men maranoparant sammanit kiya.

maun vrat

vinoba bhave samadhi sthal pavanar ashram

1975 men poore varsh bhar apane anuyayiyon ke rajanitik andolanon men shamil hone ke mudde par bhave ne maun vrat rakha. 1979 ke ek amaran anashan ke parinamasvaroop sarakar ne samooche bharat men go-hatya par nishedh lagane hetu qanoon parit karane ka ashvasan diya.

nidhan

vinoba ji ne jab yah dekh liya ki vriddhavastha ne unhen a ghera hai to unhonne ann-jal tyag diya. jab achary vinova ji ne ann aur jal tyag diya to unake samarthakon ne unase chaitanyavastha men bane rahane ke liye oorja ke strot ki janakari chahi to unhonne bataya ki ve vayu akash adi se oorja grahan karate hain. achary vinoba ne kaha ki 'mrityu ka divas vishad ka divas nahin apitu utsav ka divas' hai isaliye unhonne apani mrityu ke liye dipavali ka divas 15 navambar ko nirvan divas ke roop men chuna. is prakar ann jal tyagane ke karan ek saptah ke andar hi 15 navambar 1982, vardha, maharashtr men unhonne apane pran tyag diye. vinoba ji ke sharir tyagane ke uparant pavanar ashram ke sabhi bahanon ne unhen snyukt roop se mukhagni di. itihas men is tarah ki mrityu ke udaharan gine chune hi milate hai. is prakar marane ki kriya ko prayopavesh kahate hai.


panne ki pragati avastha
adhar
prarambhik
madhyamik
poornata
shodh

tika tippani aur sndarbh

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 1.4 vinoba bhave (hindi) The Realty of India. abhigaman tithi: 22 joon, 2013.
  2. mahan vicharak aur samaj sudharak vinoba bhave (hindi) jagaran jnkshan. abhigaman tithi: 22 joon, 2013.

snbndhit lekh