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विनोबा भावे का जन्म [[11 सितंबर]], [[1895]] को गाहोदे ([[गुजरात]]), [[भारत]] में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। विनोबा भावे [[महात्मा गांधी]] के आदरणीय अनुयायी, भारत के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे।
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विनोबा भावे का जन्म [[11 सितंबर]], [[1895]] को गाहोदे ([[गुजरात]]), [[भारत]] में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। विनोबा भावे [[महात्मा गांधी]] के आदरणीय अनुयायी, [[भारत]] के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे।
 
==तपस्वी रूप==
 
==तपस्वी रूप==
 
एक कुलीन ब्राह्मण परिवार जन्मे विनोबा ने गांधी आश्रम में शामिल होने के लिए [[1916]] में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। गाँधीजी के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।
 
एक कुलीन ब्राह्मण परिवार जन्मे विनोबा ने गांधी आश्रम में शामिल होने के लिए [[1916]] में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। गाँधीजी के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।
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विनोबा भावे का भूदान आंदोलन का विचार [[1951]] में जन्मा। जब वह [[आन्ध्र प्रदेश]] के गाँवों में भ्रमण कर रहे थे, भूमिहीन अस्पृश्य लोगों या हरिजनों के एक समूह के लिए ज़मीन मुहैया कराने की अपील के जवाब में एक ज़मींदार ने उन्हें एक एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद वह गाँव-गाँव घूमकर भूमिहीन लोगों के लिए भूमि का दान करने की अपील करने लगे और उन्होंने इस दान को गांधीजी के अहिंसा के सिद्धान्त से संबंधित कार्य बताया। भावे के अनुसार, यह भूमि सुधार कार्यक्रम हृदय परिवर्तन के तहत होना चाहिए न कि इस ज़मीन के बँटवारे से बड़े स्तर पर होने वाली कृषि के तार्किक कार्यक्रमों में अवरोध आएगा, लेकिन भावे ने घोषणा की कि वह हृदय के बँटवारे की तुलना में ज़मीन के बँतवारे को ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने लोगों को 'ग्रामदान' के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें ग्रामीण लोग अपनी भूमि को एक साथ मिलाने के बाद उसे सहकारी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्गठित करते।
 
विनोबा भावे का भूदान आंदोलन का विचार [[1951]] में जन्मा। जब वह [[आन्ध्र प्रदेश]] के गाँवों में भ्रमण कर रहे थे, भूमिहीन अस्पृश्य लोगों या हरिजनों के एक समूह के लिए ज़मीन मुहैया कराने की अपील के जवाब में एक ज़मींदार ने उन्हें एक एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद वह गाँव-गाँव घूमकर भूमिहीन लोगों के लिए भूमि का दान करने की अपील करने लगे और उन्होंने इस दान को गांधीजी के अहिंसा के सिद्धान्त से संबंधित कार्य बताया। भावे के अनुसार, यह भूमि सुधार कार्यक्रम हृदय परिवर्तन के तहत होना चाहिए न कि इस ज़मीन के बँटवारे से बड़े स्तर पर होने वाली कृषि के तार्किक कार्यक्रमों में अवरोध आएगा, लेकिन भावे ने घोषणा की कि वह हृदय के बँटवारे की तुलना में ज़मीन के बँतवारे को ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने लोगों को 'ग्रामदान' के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें ग्रामीण लोग अपनी भूमि को एक साथ मिलाने के बाद उसे सहकारी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्गठित करते।
 
==मौन व्रत==
 
==मौन व्रत==
[[1975]] में पूरे वर्ष भर अपने अनुयायियों के राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के मुद्दे पर भावे ने मौन व्रत रखा। [[1979]] के एक आमरण अनशन के परिणामस्वरूप सरकार ने समुचे भारत में गो-हत्या पर निषेध लगाने हेतु क़ानून पारित करने का आश्वासन दिया।
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[[1975]] में पूरे वर्ष भर अपने अनुयायियों के राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के मुद्दे पर भावे ने मौन व्रत रखा। [[1979]] के एक आमरण अनशन के परिणामस्वरूप सरकार ने समुचे [[भारत]] में गो-हत्या पर निषेध लगाने हेतु क़ानून पारित करने का आश्वासन दिया।
 
==मौलिक कार्यक्रम==  
 
==मौलिक कार्यक्रम==  
 
विनोबा भावे के मौलिक कार्यक्रम और जीवन के उनके दर्शन को एक लेखों की श्रृंखला में समझाया गया है, जिन्हें भूदान यज्ञ ([[1953]]) नामक एक पुस्तक में संगृहीत एवं प्रकाशित किया गया है।
 
विनोबा भावे के मौलिक कार्यक्रम और जीवन के उनके दर्शन को एक लेखों की श्रृंखला में समझाया गया है, जिन्हें भूदान यज्ञ ([[1953]]) नामक एक पुस्तक में संगृहीत एवं प्रकाशित किया गया है।

15:15, 20 सितम्बर 2010 का अवतरण

vinoba bhave

vinoba bhave ka janm 11 sitnbar, 1895 ko gahode (gujarat), bharat men hua tha. vinoba bhave ka mool nam vinayak narahari bhave tha. vinoba bhave mahatma gandhi ke adaraniy anuyayi, bharat ke ek sarvadhik jane-mane samaj sudharak evn 'bhoodan ygy' namak andolan ke snsthapak the.

tapasvi roop

ek kulin brahman parivar janme vinoba ne gandhi ashram men shamil hone ke lie 1916 men haee skool ki padhaee bich men hi chhod di. gandhiji ke upadeshon ne bhave ko bharatiy gramin jivan ke sudhar ke lie ek tapasvi ke roop men jivan vyatit karane ke lie prerit kiya.

jel yatra

1920 aur 1930 ke dashak men bhave kee bar jel ge aur 1940 ke dashak men british shasan ke khilaf ahinsak andolan ka netritv karane ke karan panch sal ke lie jel jana pada. unhen sammanapoorvak achary ki upadhi di gee.

bhoomi ka dan

vinoba bhave ka bhoodan andolan ka vichar 1951 men janma. jab vah andhr pradesh ke ganvon men bhraman kar rahe the, bhoomihin asprishy logon ya harijanon ke ek samooh ke lie zamin muhaiya karane ki apil ke javab men ek zamindar ne unhen ek ekad zamin dene ka prastav diya. isake bad vah ganv-ganv ghoomakar bhoomihin logon ke lie bhoomi ka dan karane ki apil karane lage aur unhonne is dan ko gandhiji ke ahinsa ke siddhant se snbndhit kary bataya. bhave ke anusar, yah bhoomi sudhar karyakram hriday parivartan ke tahat hona chahie n ki is zamin ke bntavare se bade star par hone vali krishi ke tarkik karyakramon men avarodh aega, lekin bhave ne ghoshana ki ki vah hriday ke bntavare ki tulana men zamin ke bntavare ko zyada pasnd karate hain. halanki bad men unhonne logon ko 'gramadan' ke lie protsahit kiya, jisamen gramin log apani bhoomi ko ek sath milane ke bad use sahakari pranali ke antargat punargathit karate.

maun vrat

1975 men poore varsh bhar apane anuyayiyon ke rajanitik andolanon men shamil hone ke mudde par bhave ne maun vrat rakha. 1979 ke ek amaran anashan ke parinamasvaroop sarakar ne samuche bharat men go-hatya par nishedh lagane hetu qanoon parit karane ka ashvasan diya.

maulik karyakram

vinoba bhave ke maulik karyakram aur jivan ke unake darshan ko ek lekhon ki shrrinkhala men samajhaya gaya hai, jinhen bhoodan ygy (1953) namak ek pustak men sngrihit evn prakashit kiya gaya hai.

mrityu

vinoba bhave ki mrityu 15 navambar 1982, vardha maharashtr men huee thi.


panne ki pragati avastha
adhar
prarambhik
madhyamik
poornata
shodh

snbndhit lekh