Difference between revisions of "एटली"

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[[भारत]] को स्वतंत्रता प्राप्त होने के समय [[ब्रिटेन]] के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे। एटली लेबर पार्टी का था। जिसके शासन काल में देश स्वतंत्र हुआ था। फरवरी, [[1947]] में ब्रिटेन के हाउस आफ कामन्स में भारत को स्वाधीन करने के विषय में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की थी कि "ब्रिटेन भारतीयों को स्वतंत्रता दे रहा है, क्योंकि अब भारतीय सेना ब्रिटिश राजसत्ता के प्रति राजभक्त नहीं रही है और ब्रिटेन भारत को अपने अधीन बनाये रखने के लिए अंग्रेज़ों की बहुत बड़ी सेना को भारत में रखने की स्थिति में नहीं है।"
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[[भारत]] को स्वतंत्रता प्राप्त होने के समय [[ब्रिटेन]] के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे। एटली लेबर पार्टी का था। जिसके शासन काल में देश स्वतंत्र हुआ था। फरवरी, [[1947]] में ब्रिटेन के हाउस आफ कामन्स में [[भारत]] को स्वाधीन करने के विषय में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की थी कि "ब्रिटेन भारतीयों को स्वतंत्रता दे रहा है, क्योंकि अब भारतीय सेना ब्रिटिश राजसत्ता के प्रति राजभक्त नहीं रही है और ब्रिटेन [[भारत]] को अपने अधीन बनाये रखने के लिए अंग्रेज़ों की बहुत बड़ी सेना को [[भारत]] में रखने की स्थिति में नहीं है।"
  
[[1946]] में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने जो कैबिनेट मिशन भारत भेजा था उसने भी इसे देश को तीन भागों का एक महासंघ बनाने की योजना दी थी। ब्रिटेन की संसद के आम चुनाव में चर्चिल की कंजरवेटिव पार्टी पराजित हो गई और क्लीमेंट एटली के नेतृत्व में लेबर पार्टी सत्ता में आ गई। एटली भारत को स्वाधीनता देना चाहते थे। उस समय भारत के गवर्नर जनरल और वायसराय लार्ड वावेल ने अपनी [[लंदन]] यात्रा में एटली से कहा था कि भारत में ब्रिटिश शासन के सम्मुख दो ही रास्ते है या तो भारत पर पूरी कठोरता से शासन किया जाए या जनता के प्रतिनिधियों को सत्ता सौंप दी जाए।  
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[[1946]] में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने जो कैबिनेट मिशन [[भारत]] भेजा था उसने भी इसे देश को तीन भागों का एक महासंघ बनाने की योजना दी थी। ब्रिटेन की संसद के आम चुनाव में चर्चिल की कंजरवेटिव पार्टी पराजित हो गई और क्लीमेंट एटली के नेतृत्व में लेबर पार्टी सत्ता में आ गई। एटली [[भारत]] को स्वाधीनता देना चाहते थे। उस समय [[भारत]] के गवर्नर जनरल और वायसराय लार्ड वावेल ने अपनी [[लंदन]] यात्रा में एटली से कहा था कि [[भारत]] में ब्रिटिश शासन के सम्मुख दो ही रास्ते है या तो [[भारत]] पर पूरी कठोरता से शासन किया जाए या जनता के प्रतिनिधियों को सत्ता सौंप दी जाए।  
  
 
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Revision as of 09:37, 20 September 2010

bharat ko svatantrata prapt hone ke samay briten ke pradhanamantri klimeant etali the. etali lebar parti ka tha. jisake shasan kal mean desh svatantr hua tha. pharavari, 1947 mean briten ke haus aph kamans mean bharat ko svadhin karane ke vishay mean unhoanne spasht shabdoan mean ghoshana ki thi ki "briten bharatiyoan ko svatantrata de raha hai, kyoanki ab bharatiy sena british rajasatta ke prati rajabhakt nahian rahi hai aur briten bharat ko apane adhin banaye rakhane ke lie aangrezoan ki bahut b di sena ko bharat mean rakhane ki sthiti mean nahian hai."

1946 mean briten ke pradhanamantri lard etali ne jo kaibinet mishan bharat bheja tha usane bhi ise desh ko tin bhagoan ka ek mahasangh banane ki yojana di thi. briten ki sansad ke am chunav mean charchil ki kanjaravetiv parti parajit ho gee aur klimeant etali ke netritv mean lebar parti satta mean a gee. etali bharat ko svadhinata dena chahate the. us samay bharat ke gavarnar janaral aur vayasaray lard vavel ne apani landan yatra mean etali se kaha tha ki bharat mean british shasan ke sammukh do hi raste hai ya to bharat par poori kathorata se shasan kiya jae ya janata ke pratinidhiyoan ko satta sauanp di jae.


panne ki pragati avastha
adhar
prarambhik
madhyamik
poornata
shodh