कोलम्बो योजना

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कोलम्बो योजना की स्थापना वर्ष 1950 में की गई थी। इसका मुख्यालय कोलम्बो में है। इस योजना का उद्देश्य नव स्वतंत्रता प्राप्त एशियाई सदस्य देशों के विकास को बढ़ावा देना था।

  • इसका आरम्भ सात राष्ट्रमण्डल देशों के समूह के रूप में हुआ था। आज इसमें 26 सदस्य देश हैं।[1]
  • कोलम्बो योजना के तहत भारत ने अनेक नेपाली नागरिकों को प्रशिक्षण दिया है। आज़ादी के बाद से ही भारत नेपाल को हर तरह का प्रशिक्षण, तकनीकी और गैर तकनीकी सहयोग देता रहा है।
  • भारत ने नेपाल की कई परियोजनाओं में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया है। इनमें देवी घाट, त्रिशुल करनाली और पंचेश्वर जल विद्युत परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं।
  • त्रिभुवन गणपथ, काठमांडु त्रिशुली मार्ग तथा त्रिभुवन हवाई अड्डे के निर्माण में भी भारत ने नेपाल को भरपूर सहयोग किया है। इसके अलावा भारत नेपाल के भू वैज्ञानिक अनुसंधान तथा खनिज खोजबीन के काम में भी मदद करता है। भारत ने काठमांडु घाटी के एक उपनगर पाटन में एक औद्योगिक बस्ती की भी स्थापना की है।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कोलम्बो योजना (हिन्दी) गूगल बुक्स। अभिगमन तिथि: 23 दिसम्बर, 2014।
  2. नए परिप्रेक्ष्य में भारत-नेपाल संबंध (हिन्दी) आजतक तहक़ीक़ात। अभिगमन तिथि: 23 दिसम्बर, 2014।

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