पहेली 27 फ़रवरी 2018: Difference between revisions
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||'[[भरतमुनि]]' [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] के प्रसिद्ध प्रणेता हुए हैं। उनका समय विवादास्पद है। उन्हें 500 ई.पू. से 100 ई सन् के बीच किसी समय का माना जाता है। [[भरतमुनि]] का 'नाट्यशास्त्र' भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ है। इसमें नाट्यशास्त्र, संगीतशास्त्र, छंदशास्त्र, [[अलंकार]], [[रस]] आदि सभी का सांगोपांग प्रतिपादन किया गया है। 'भारतीय नाट्यशास्त्र' अपने विषय का आधारभूत ग्रन्थ माना जाता है। विद्वानों का मत है कि भरतमुनि द्वारा रचित पूरा नाट्यशास्त्र अब उपलब्ध नहीं है। जिस रूप में वह उपलब्ध है, उसमें लोग काफ़ी क्षेपक बताते हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[भरतमुनि]], [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] | ||[[चित्र:Natyasastra.jpg|right|100px|border|नाट्यशास्त्र]]'[[भरतमुनि]]' [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] के प्रसिद्ध प्रणेता हुए हैं। उनका समय विवादास्पद है। उन्हें 500 ई.पू. से 100 ई सन् के बीच किसी समय का माना जाता है। [[भरतमुनि]] का 'नाट्यशास्त्र' भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ है। इसमें नाट्यशास्त्र, संगीतशास्त्र, छंदशास्त्र, [[अलंकार]], [[रस]] आदि सभी का सांगोपांग प्रतिपादन किया गया है। 'भारतीय नाट्यशास्त्र' अपने विषय का आधारभूत ग्रन्थ माना जाता है। विद्वानों का मत है कि भरतमुनि द्वारा रचित पूरा नाट्यशास्त्र अब उपलब्ध नहीं है। जिस रूप में वह उपलब्ध है, उसमें लोग काफ़ी क्षेपक बताते हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[भरतमुनि]], [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] | ||
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