मसुलीपट्टम: Difference between revisions

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*1686 ई. में इस पर डचों ने अधिकार कर लिया, किंतु 1690 ई. में [[मद्रास]] सरकार ने [[मुग़ल]] बादशाह से मसुलीपट्टम में पुनः फैक्ट्री खोलने की अनुमति प्राप्त कर ली।
*1686 ई. में इस पर डचों ने अधिकार कर लिया, किंतु 1690 ई. में [[मद्रास]] सरकार ने [[मुग़ल]] बादशाह से मसुलीपट्टम में पुनः फैक्ट्री खोलने की अनुमति प्राप्त कर ली।
*1750 ई. में फ्रांसीसियों ने इस पर अधिकार कर लिया, किंतु 1759 ई. में पुनः यह [[अंग्रेज|अंग्रेजों]] के अधिकार में आ गया।  
*1750 ई. में फ्रांसीसियों ने इस पर अधिकार कर लिया, किंतु 1759 ई. में पुनः यह [[अंग्रेज|अंग्रेजों]] के अधिकार में आ गया।  
*मध्यकाल में यहाँ की छींट बहुत प्रसिद्ध थी। यहाँ से मुख्यतः सूती वस्त्र, गलीचे एवं धागा निर्यात किया जाता था।  
*मध्यकाल में यहाँ की [[छींट]] बहुत प्रसिद्ध थी। यहाँ से मुख्यतः सूती वस्त्र, गलीचे एवं धागा निर्यात किया जाता था।  


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Revision as of 09:49, 5 March 2011

  • मसुलीपट्टम तमिलनाडु में कृष्णा नदी के मुहाने पर मालाबार तट का प्रसिद्ध बन्दरगाह है।
  • इसका (मसुलीपट्टम) का उत्कर्ष 17 वीं शताब्दी में हुआ था।
  • यह गोलकुण्डा का सबसे अच्छा बन्दरगाह माना जाता था।
  • ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 1632 ई. में व्यापार के लिए गोलकुण्डा राज्य से फ़रमान प्राप्त किया।
  • 1686 ई. में इस पर डचों ने अधिकार कर लिया, किंतु 1690 ई. में मद्रास सरकार ने मुग़ल बादशाह से मसुलीपट्टम में पुनः फैक्ट्री खोलने की अनुमति प्राप्त कर ली।
  • 1750 ई. में फ्रांसीसियों ने इस पर अधिकार कर लिया, किंतु 1759 ई. में पुनः यह अंग्रेजों के अधिकार में आ गया।
  • मध्यकाल में यहाँ की छींट बहुत प्रसिद्ध थी। यहाँ से मुख्यतः सूती वस्त्र, गलीचे एवं धागा निर्यात किया जाता था।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

भारतीय ऐतिहासिक स्थल कोश, पेज न. (276)