अगोचर
अगोचर (विशेषण) [नास्ति गोचरो यस्य-न. ब.][1]
- जो इन्द्रियों द्वारा प्रत्यक्ष न हो, अस्पष्ट,-वाचामगोचरां हर्षावस्थामस्पृशत्-दश. 169;-रं'
- 1. अतीन्द्रिय
- 2. अदृश्य, अज्ञेय
- 3. ब्रह्म
- REDIRECTसाँचा:इन्हें भी देखें
|
|
|
|
|
टीका टिप्पणी और संदर्भ
- ↑ संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश |लेखक: वामन शिवराम आप्टे |प्रकाशक: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002 |पृष्ठ संख्या: 07 |
संबंधित लेख