अपसव्य,-सव्यक (विशेषण) [अपगत सव्य यत्र, ब. स.]
- 1. जो बायाँ न हो, दायाँ
- 2. विरुद्ध, विपरीत,-व्यम् (अव्य.) दाईं ओर, दाहिने कंधे के ऊपर से जनेऊ को शरीर के वाम भाग पर लटकाना (विप. सव्यमू-जब कि वह बाएं कंधे के ऊपर से लटकता है) °व्यं कृ दाहिनी ओर रखते किसी की परिक्रमा करना, जनेऊ को दाएँ क से लटकाना।[1]
- REDIRECTसाँचा:इन्हें भी देखें
टीका टिप्पणी और संदर्भ
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संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश |लेखक: वामन शिवराम आप्टे |प्रकाशक: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002 |पृष्ठ संख्या: 68 |
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