अप्तोर्याम:

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अप्तोर्यामः (पुल्लिंग)-मनू (न.) [अप्तोः शरीरस्य पावकत्वात् याम इव-अलुक् समासः]

  • एक यज्ञ का नाम, सामवेद के एक मंत्र का नाम जो उक्त यज्ञ की समाप्ति पर बोला जाता है; ज्योतिष्टोम यज्ञ का अंतिम या सातवाँ भाग।[1]


  1. REDIRECTसाँचा:इन्हें भी देखें


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश |लेखक: वामन शिवराम आप्टे |प्रकाशक: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002 |पृष्ठ संख्या: 72 |

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