तपती पृथ्वी को प्रेम करना -अजेय: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search
[unchecked revision][unchecked revision]
m (Text replace - "अजेय् की रचनाएँ" to "अजेय की रचनाएँ")
No edit summary
Line 1: Line 1:
{{स्वतंत्र लेखन नोट}}
{| style="background:transparent; float:right"
{| style="background:transparent; float:right"
|-
|-

Revision as of 13:58, 22 November 2013

चित्र:Icon-edit.gif यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है भारतकोश का नहीं।
तपती पृथ्वी को प्रेम करना -अजेय
कवि अजेय
जन्म स्थान (सुमनम, केलंग, हिमाचल प्रदेश)
बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक वेबसाइट
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
अजेय की रचनाएँ

चाहता हूँ उड़ना

पहुँच जाना अंतरिक्ष में
एक ऐसी जगह
जहाँ से दिखती हो यह पृथ्वी
एक तपते चेहरे की तरह
और पूछना उस से
अब कैसा है दर्द ?

चाहता हूँ दो आत्मीय बाहें उसकी
और लपक कर गले मिलना
उसे थपथपाना कंधों के पास
और कहना—
अपना खयाल रखना !

सोचता हूँ दो गतिशील पैर उस के
लेकिन सधे हुए ऐसे
कि कुछ दूर तक छोड़ आएं
मुझे इस विदाई की घड़ी में
और बेआवाज़ एक ज़ुबान काँपती हुई
जो कहना चाहती हो
कि मेरी खबर लेते रहना !

इच्छा हुई है आज
कि प्रेम करूँ गरमा गरम
इस बीमार लड़्की के चेहरे सी पृथ्वी को
पीते हुए उस के अंतस की मीठी भाप
बचा लूँ आँख भर उस की ज़िन्दा उजास
इस से पहले कि कोई खींच ले जाए
अज्ञात नक्षत्रों के ठण्डे बियावानों में उसे
छू लूँ मिट्टी की सौंधी त्वचा उसकी
पूछ लूँ उसी से
कि इन छिटपुट चाहतों से बढ़ कर भला
क्या है कोई रिश्ता
पूरी ज़िन्दगी में --
चाहे वह पृथ्वी हो
अथवा कोई भी प्रेमिका


11.10.2007.


टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख