बुंदेलखंड का इतिहास: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search
[unchecked revision][unchecked revision]
m (Text replace - "॰" to ".")
Line 4: Line 4:
'''[[खजुराहो ज़िला]] छतरपुर'''  [[खजुराहो]] में आज भी अनेक भव्य वास्तुकृतियाँ अवशिष्ट हैं।  
'''[[खजुराहो ज़िला]] छतरपुर'''  [[खजुराहो]] में आज भी अनेक भव्य वास्तुकृतियाँ अवशिष्ट हैं।  


'''[[महोवा-ज़िला]] [[हमीरपुर]] तथा [[कालंजर]]'''  कालंजर में राज्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत क़िला था। शेरशाह इस क़िले की घेराबन्दी के समय 1545 ई॰ के समय यहीं मारा गया था।
'''[[महोवा-ज़िला]] [[हमीरपुर]] तथा [[कालंजर]]'''  कालंजर में राज्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत क़िला था। शेरशाह इस क़िले की घेराबन्दी के समय 1545 ई. के समय यहीं मारा गया था।


'''[[बाँदा ज़िला]]'''
'''[[बाँदा ज़िला]]'''

Revision as of 09:14, 25 August 2010

इतिहास

बुंदेलों का पूर्वज पंचम बुंदेला था। बुंदेलखंड बुंदेल राजपूतों के नाम पर प्रसिद्ध है जिनके राज्य की स्थापना 14वीं शती में हुई थी। इससे पूर्व यह प्रदेश जुझौती अथवा जजाकभुक्ति नाम से जाना जाता था और चन्देलों द्वारा नवीं से चौदहवीं शताब्दी तक शासित होता रहा। श्री गोरेलाल तिवारी का मत है कि बुंदेलखंड नाम विंध्येलखंड का अपभ्रंश है। राज्य के प्रमुख नगर थे-

खजुराहो ज़िला छतरपुर खजुराहो में आज भी अनेक भव्य वास्तुकृतियाँ अवशिष्ट हैं।

महोवा-ज़िला हमीरपुर तथा कालंजर कालंजर में राज्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत क़िला था। शेरशाह इस क़िले की घेराबन्दी के समय 1545 ई. के समय यहीं मारा गया था।

बाँदा ज़िला

बुंदेली माटी में जन्‍मी अनेक विभूतियों ने न केवल अपना बल्कि इस अंचल का नाम ख़ूब रोशन किया और इतिहास में अमर हो गए। आल्हा-ऊदल, ईसुरी, कवि पद्माकर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, डॉ. हरिसिंह गौर आदि अनेक महान विभूतियाँ इसी क्षेत्र से संबद्ध हैं। अनेक इतिहास पुरुषों और आल्हा की बाबन लड़ाईयाँ बुंदेलखंड का प्रमाण हैं। यहाँ के वीर योद्धा बुन्देला कहलाए, बुन्देली यहाँ की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक चेतना की बोली रही है। यहाँ के लोग बुन्देली बोली बोलने के कारण ही बुन्देला कहलाए। बुन्देलखण्ड के रुपायन का गहरा सम्बन्ध महाराजा छत्रसाल के महत्त्वपूर्ण स्थान जेजामुक्ति से है।

मध्यकाल से पहले बुंदेलखंड शब्द इस नाम से प्रयोग में नहीं आया है। आधुनिक युग में ही इसके अन्य नाम और उनके उपयोग हुए हैं। बीसवीं शती के प्रारंभिक दशक में बुंदेलखंड का इतिहास महाराज रायबहादुर सिंह ने लिखा था। इसमे बुंदेलखंड के अन्तर्गत आने वाली जागीरों और उनके शासकों के नामों की गणना मुख्य थी। पन्ना दरबार के प्रसिद्ध कवि "कृष्ण" तथा दीवान प्रतिपाल सिंह ने अपने स्रोतों से बुंदेलखंड का इतिहास लिखा परन्तु वे विद्वान भी सामाजिक सांस्कृतिक चेतनाओं के प्रति उदासीन रहे।