कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search

कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति (अंग्रेज़ी: Kirti Stambha Inscriptions) का प्रशस्तिकार महेश भट्ट था। यह राणा कुंभा की प्रशस्ति है। इसमें बप्पा से लेकर राणा कुंभा तक की वंशावली का वर्णन है।

  • कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति में कुंभा की उपलब्धियों एवं उसके द्वारा रचित ग्रंथों का वर्णन मिलता है।
  • इस प्रशस्ति में चंडीशतक, गीतगोविंद की टीका संगीतराज आदि ग्रंथों का उल्लेख हुआ है।
  • प्रशस्ति में कुंभा को महाराजाधिराज अभिनव, भरताचार्य, हिंदुस्तान सुरतान, राय रायन, राणो, रासो छाप, गुरु दान गुरु, राजगुरु और सेल गुरु उपाधियों से पुकारा गया है।[1]
  • राणा कुंभा ने मालवा और गुजरात की सेना को हराने के बाद इस विजय के उपलक्ष में चित्तौड़ में विजय स्तंभ का निर्माण करवाया था।
  • विजय स्तंभ की पांचवी मंजिल पर उत्कीर्ण है-

उत्कीर्णकर्त्ता- जेता, पौमा, नापा, पूँजा, जइता।
महाराणा कुंभा की उपलब्धियां तथा युद्धों का वर्णन।।

  • 179वें श्लोक में गुजरात में मालवा की सम्मिलित सेना को पराजित करने का साक्ष्य है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. राजस्थान के अभिलेख (हिंदी) govtexamsuccess.com। अभिगमन तिथि: 13 दिसम्बर, 2021।

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः