चाँद से मेरी दोस्ती हरगिज़ न हुई होती,
अगर रात जागने और सड़कों पर फ़ालतू भटकने की,
लत न लग गई होती मुझे स्कूल के ही दिनों में।
उसकी कई आदतें तो,
तक़रीबन मुझसे मिलती-जुलती-सी हैं,
मसलन वह भी अपनी कक्षा का एक बैक-बेंचर छात्र है,
अध्यापक का चेहरा ब्लैक बोर्ड की ओर घुमा नहीं
कि दबे पाँव निकल भागे बाहर...