जिग्मे दोरजी वांग्चुक: Difference between revisions

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'''जिग्मे दोरजी वांग्चुक''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Jigme Dorji Wangchuck'', जन्म: [[2 मई]], [[1929]]; मृत्यु: [[21 जुलाई]], [[1972]], नैरोबी, [[केन्या]]) [[भूटान]] के तीसरे राजा थे। उन्होंने भूटान को बाहरी दुनिया से जोड़ने का आधुनिकीकरण शुरू किया और लोकतांत्रिककरण की ओर पहला कदम उठाया। जिग्मे दोरजी वांग्चुक भूटान के इतिहास में सबसे प्रभावशाली सम्राटों में से एक थे।  


*भूटान के राजा जिग्म दोरजी वांग्चुक का जन्म 1929 में त्रोंगा में थरूपांग पैलेस में हुआ था। इनके पिता राजा जिग्मे वांग्चुक थे, और इनकी माता राजकुमारी फ़ुन्शो चोडेन थीं।
*भूटान के राजा जिग्मे दोरजी वांग्चुक का जन्म 1929 में त्रोंगा में थरूपांग पैलेस में हुआ था। इनके पिता राजा जिग्मे वांग्चुक थे, और इनकी माता राजकुमारी फ़ुन्शो चोडेन थीं।
*इनकी प्रारम्भिक शिक्षा रॉयल पैलेस में हुई और फिर बाद में वह [[भारत]] के कलिपोंग शहर में निजी शिक्षा के लिए चले गये इसके बाद, वह अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए [[इंग्लैंड]] गए।
*इनकी प्रारम्भिक शिक्षा रॉयल पैलेस में हुई और फिर बाद में वह [[भारत]] के [[कलिंपोंग|कलिपोंग शहर]] में निजी शिक्षा के लिए चले गये। इसके बाद वह अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए [[इंग्लैंड]] गए।
*उन्होंने [[1951]] में गोंगजीम (लॉर्ड चेंबरलीन) सोनम तोबैय की बेटी असी केसांग चोडेन वांग्चुक से विवाह किया। इनके दो बेटियां और एक बेटा था।
*उन्होंने [[1951]] में गोंगजीम (लॉर्ड चेंबरलीन) सोनम तोबैय की बेटी असी केसांग चोडेन वांग्चुक से [[विवाह]] किया। ये दो बेटियां और एक बेटे के पिता थे।
*जिग्मे दोरजी वांग्चुक ने [[1961]] में, एक आर्थिक नियोजन पहल की स्थापना की जो कि पांच साल की अवधि में भूटान की अर्थव्यवस्था के लिए योजना बना रही थी और दो साल बाद उन्होंने रॉयल सलाहकार परिषद या लोदी त्सोगेडे के साथ-साथ नए संविधान की स्थापना में मदद की। उसी वर्ष में, उन्होंने रॉयल भूटान सेना की भी स्थापना की। उन्होंने महामहिम द ड्रैक ग्यालपो का खिताब ग्रहण किया और सेना प्रमुख के कमांडर बन गए।
*जिग्मे दोरजी वांग्चुक ने [[1961]] में रॉयल सलाहकार परिषद या लोदी त्सोगेडे के साथ-साथ नए संविधान की स्थापना में मदद की। उसी वर्ष में उन्होंने रॉयल भूटान सेना की भी स्थापना की। उन्होंने महामहिम द ड्रैक ग्यालपो का खिताब ग्रहण किया और सेना प्रमुख के कमांडर बन गए।
*इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान भूटान में शिक्षा के क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया। [[1967]] में, उन्होंने सिष्टोखा रिगज़ुंग लोबद्र की स्थापना करने में मदद की, जिसे बाद में भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन संस्थान के रूप में जाना जाने लगा। यह पारंपरिक भूटानी शिक्षा के लिए जगह बन गई। उन्होंने सार्वजनिक स्कूलों की स्थापना में भी मदद की।
*इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान भूटान में शिक्षा के क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया। [[1967]] में उन्होंने सिष्टोखा रिगज़ुंग लोबद्र की स्थापना करने में मदद की, जिसे बाद में भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन संस्थान के रूप में जाना जाने लगा। यह पारंपरिक भूटानी शिक्षा के लिए जगह बन गई। उन्होंने सार्वजनिक स्कूलों की स्थापना में भी मदद की।
*[[1954]] में उन्हें [[भारत]] के दूसरे सबसे उच्च नागरिक पुरस्कार [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया।
*जिग्मे दोरजी वांग्चुक [[भारत]] के [[गणतंत्र दिवस]] पर [[1954]] में मुख्य अतिथि के रूप में भारत आये थे।
*1954 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे उच्च नागरिक पुरस्कार [[पद्म विभूषण]] से सम्मानित किया गया।
*[[21 जुलाई]], [[1972]] को नैरोबी, केन्या में उनका 43 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
*[[21 जुलाई]], [[1972]] को नैरोबी, केन्या में उनका 43 वर्ष की आयु में निधन हो गया।



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जिग्मे दोरजी वांग्चुक
पूरा नाम जिग्मे दोरजी वांग्चुक
जन्म 2 मई, 1929
जन्म भूमि थरूंग पैलेस, त्रोंगा
मृत्यु 21 जुलाई, 1972
मृत्यु स्थान नैरोबी, केन्या
अभिभावक पिता- राजा जिग्मे वांग्चुक और माता- राजकुमारी फ़ुन्शो चोडेन
पति/पत्नी असी केसांग चोडेन
संतान दो बेटियां और एक बेटा
प्रसिद्धि भूटान के तीसरे राजा
धर्म बौद्ध धर्म
अन्य जानकारी जिग्मे दोरजी वांग्चुक भारत में गणतंत्र दिवस पर 1954 में मुख्य अतिथि के रूप में आये थे।

जिग्मे दोरजी वांग्चुक (अंग्रेज़ी: Jigme Dorji Wangchuck, जन्म: 2 मई, 1929; मृत्यु: 21 जुलाई, 1972, नैरोबी, केन्या) भूटान के तीसरे राजा थे। उन्होंने भूटान को बाहरी दुनिया से जोड़ने का आधुनिकीकरण शुरू किया और लोकतांत्रिककरण की ओर पहला कदम उठाया। जिग्मे दोरजी वांग्चुक भूटान के इतिहास में सबसे प्रभावशाली सम्राटों में से एक थे।

  • भूटान के राजा जिग्मे दोरजी वांग्चुक का जन्म 1929 में त्रोंगा में थरूपांग पैलेस में हुआ था। इनके पिता राजा जिग्मे वांग्चुक थे, और इनकी माता राजकुमारी फ़ुन्शो चोडेन थीं।
  • इनकी प्रारम्भिक शिक्षा रॉयल पैलेस में हुई और फिर बाद में वह भारत के कलिपोंग शहर में निजी शिक्षा के लिए चले गये। इसके बाद वह अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इंग्लैंड गए।
  • उन्होंने 1951 में गोंगजीम (लॉर्ड चेंबरलीन) सोनम तोबैय की बेटी असी केसांग चोडेन वांग्चुक से विवाह किया। ये दो बेटियां और एक बेटे के पिता थे।
  • जिग्मे दोरजी वांग्चुक ने 1961 में रॉयल सलाहकार परिषद या लोदी त्सोगेडे के साथ-साथ नए संविधान की स्थापना में मदद की। उसी वर्ष में उन्होंने रॉयल भूटान सेना की भी स्थापना की। उन्होंने महामहिम द ड्रैक ग्यालपो का खिताब ग्रहण किया और सेना प्रमुख के कमांडर बन गए।
  • इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान भूटान में शिक्षा के क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया। 1967 में उन्होंने सिष्टोखा रिगज़ुंग लोबद्र की स्थापना करने में मदद की, जिसे बाद में भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन संस्थान के रूप में जाना जाने लगा। यह पारंपरिक भूटानी शिक्षा के लिए जगह बन गई। उन्होंने सार्वजनिक स्कूलों की स्थापना में भी मदद की।
  • जिग्मे दोरजी वांग्चुक भारत के गणतंत्र दिवस पर 1954 में मुख्य अतिथि के रूप में भारत आये थे।
  • 1954 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे उच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 21 जुलाई, 1972 को नैरोबी, केन्या में उनका 43 वर्ष की आयु में निधन हो गया।



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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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