कंपोज़िटी: Difference between revisions
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Latest revision as of 12:16, 20 July 2018
[[चित्र:Compositae.jpg|thumb|250px|right|कंपोज़िटी कुल के पुष्प]] कंपोज़िटी (अंग्रेज़ी: Compositae) फूल वाले पौधों का एक कुल है। हिन्दी में यह कुल संग्रथित कुल कहा जाता है। इस कुल में अन्य कुलों की अपेक्षा बहुत अधिक पौधे हैं और ये विश्वव्यापी भी हैं। इस परिवार के कुछ सदस्य आर्थिक लाभ के हैं।
प्रजातियाँ
इस कुल में लगभग 950 प्रजातियाँ और 20,000 प्रत्येक फूल वस्तुत: कई पुष्पों का गुच्छ होता है। साधारण गेंदा नामक फूल का पौधा इसी कुल में है। परंतु इस कुल के पौधों में बड़ी भिन्नता होती है। अधिकांश पौधे शाक के समान हैं। किंतु संसार के उष्ण भागों में झाड़ियाँ और वृक्ष भी इस कुल में पाए जाते हैं।[1]
पादप परिचय
इस कुल के पौधे आरोही होते हैं। पत्तियाँ बहुधा गुच्छों में होती हैं। जिन पौधों में तने लंबे होते हैं, उनमें पत्तियाँ साधारणत: एकांतर होती हैं। जड़ बहुधा मोटी होती है और कभी-कभी उसमें कंद होता है, जैसे 'डालया' में। कुछ पौधों के तनों में दूध के सदृश: रस रहता है। फूल शीर्षों में एकत्र रहते हैं। ये चारों ओर हरे निपत्रों से घिरे रहते हैं। जब फूल कलिकावस्था में रहता है तो इन्हीं से उसकी रक्षा होती है। ये ही बाह्यदल-पुंज का काम देते हैं। ये फूल के शीर्ष परागण के लिए अत्युत्तम रूप से व्यवस्थित होते हैं। फूलों के एक साथ एकत्र रहने के कारण किसी एक कीट के आ जाने से अनेक का परागण हो जाता है। वर्तिका की जड़ पर मकरंद निकालता है और दलपुंज नलिका के कारण वर्षा से अथवा ओस से बहने नहीं पाता। छोटे होंठ के कीट भी इस मकरंद को प्राप्त नहीं कर सकते, क्योंकि दलपुंज नलिका लंबी होती है।
परागण की क्रिया
फूल का जीवनेतिहास दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। आरंभ में तो फूल नर का काम करते हैं और अंत में नारी का। इस प्रकार इन फूलों में साधारणत: परपरागण होता है, स्वयं परागण नहीं। परंतु कुछ फूलों में एक तीसरी अवस्था भी होती है, जिसमें वर्तिकाग्र पीछे मुड़ जाता है और बचे खुचे परागणों को, जो नीचे की वर्तिका पर पड़े रहते हैं, छू देता है। यदि परपरागण नहीं हुआ रहता तो इस प्रकार स्वयंपरागण हो जाता है।[1]
फल वितरण
फलों के वितरण की विधियाँ भी अनेक होती हैं। कुछ फलों में बीज में रोएँ लगे रहते हैं, जिससे वे दूर-दूर तक उड़ जाते हैं। कुछ में काँटे होते हैं, जिनसे वे पशुओं की खाल में चिपककर अन्यत्र पहुँच जाते हैं। कभी-कभी बीज अपने स्थान पर ही पड़े रहते हैं और पौधे को झटका लगने पर इधर-उधर बिखर जाते हैं।
इस परिवार के कुछ सदस्य आर्थिक लाभ के हैं, जैसे 'लैक्ट्यूका सैटाइवा'[2], 'चिकरी (सिकोरियम'[3] 'हाथी चोक'[4]। बहुत से सदस्य अपने सुंदर फूल के कारण उद्यान में उगाए जाते हैं, जैसे ज़िन्निआ, सूरजमुखी, गेंदा, डालिया इत्यादि। कुछ औषधि के भी काम में आते हैं। 'आरटीमिज़िया वल्गेरिस'[5] से 'सैंटोनिन' दवा बनती है। पाईथ्रोम से कीट मारने का चूर्ण बनाया जाता है। यह पुष्प प्रसिद्ध गुलदाउदी[6] की प्रजाति का है। पार्थेनियम की एक जाति से एक प्रकार का रबर होता है।
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