दीपक पारेख का कॅरियर: Difference between revisions

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'''दीपक पारेख''' एच. डी. एफ. सी. (हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन) के चेयरमैन (अध्यक्ष) हैं। अपने अथक परिश्रम से उन्होंने एच. डी. एफ. सी. को एक सफल और बड़ी अन्तर्राष्टीय वित्तीय कंपनी बनाया। [[11 जनवरी]] से [[17 जुलाई]] [[2009]] तक उन्होंने सत्यम कम्प्यूटर्स में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी कार्य किया। वह कड़ी मेहनत, उत्साह और निरंतर सुधार में विश्वास रखते हैं।  
'''दीपक पारेख''' एच. डी. एफ. सी. (हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन) के चेयरमैन (अध्यक्ष) हैं। अपने अथक परिश्रम से उन्होंने एच. डी. एफ. सी. को एक सफल और बड़ी अन्तर्राष्टीय वित्तीय कंपनी बनाया। [[11 जनवरी]] से [[17 जुलाई]] [[2009]] तक उन्होंने सत्यम कम्प्यूटर्स में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी कार्य किया। वह कड़ी मेहनत, उत्साह और निरंतर सुधार में विश्वास रखते हैं।  
==कॅरियर==
==कॅरियर==

Latest revision as of 11:55, 20 October 2017

दीपक पारेख विषय सूची


दीपक पारेख का कॅरियर
जन्म 18 अक्टूबर, 1944
जन्म भूमि मुंबई
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र उद्योगपति
शिक्षा चार्टर्ड अकाउंटेंट
पुरस्कार-उपाधि पद्म भूषण
प्रसिद्धि चेयरमैन, एच. डी. एफ. सी. (हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भारत के मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर ऋण प्रदान करके उनके घर के सपने को साकार करने में भी दीपक पारेख का बड़ा योगदान है।
अद्यतन‎

दीपक पारेख एच. डी. एफ. सी. (हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन) के चेयरमैन (अध्यक्ष) हैं। अपने अथक परिश्रम से उन्होंने एच. डी. एफ. सी. को एक सफल और बड़ी अन्तर्राष्टीय वित्तीय कंपनी बनाया। 11 जनवरी से 17 जुलाई 2009 तक उन्होंने सत्यम कम्प्यूटर्स में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी कार्य किया। वह कड़ी मेहनत, उत्साह और निरंतर सुधार में विश्वास रखते हैं।

कॅरियर

दीपक ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर अर्न्स्ट एंड यंग मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज में अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर से किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने ग्रिंडलेज और चेस मेनहट्टन बैंक में बतौर सहायक प्रतिनिधि (दक्षिण एशिया) कार्य किया। सन 1978 में वह एच. डी. एफ. सी. में शामिल हो गए और 1985 में प्रबंध निदेशक के पद पर पदोन्नत हुए। उनके अथक परिश्रम को देखते हुए कंपनी ने सन 1993 में उन्हें चेयरमैन (अध्यक्ष) बना दिया। इसके अलावा, सन 1997 में उन्हें ऑय. डी. ऍफ़. सी. (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड) का नॉन-एग्जीक्यूटिव (गैर-कार्यकारी) अध्यक्ष भी बना दिया गया। उन्होंने ग्लैक्सो इंडिया लिमिटेड के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर सन 2008 तक कार्य किया और कैस्ट्रॉल इंडिया के बोर्ड पर भी रहे। इसके अलावा, दीपक भारत के अन्य कई मशहूर कंपनियों जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के बोर्ड पर भी हैं।[1]

दीपक, कॉर्पोरेट जगत के अलावा, भारत सरकार द्वारा गठित की गयी कई समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं। सन 1964 में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया जिसका उद्देश्य ‘यूनिट स्कीम’ को विकसित करने की दिशा में सुझाव देना था। दीपक को इस समिति का चेयरमैन बनाया गया। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रतिभूति बाजार विनियमन पर एक एडवाइजरी ग्रुप का गठन किया गया जिसका चेयरमैन दीपक पारेख को बनाया गया। उन्होंने नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन के पद पर भी कार्य किया। वह डब्लू एन एस ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड और लाफार्ज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों में भी डायरेक्टर रह चुके हैं। वह एक्साइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ‘अल्टरनेट डायरेक्टर’ और इंडो-जर्मन चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स के डायरेक्टर भी हैं। दीपक ने सिंगापुर टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर भी कार्य किया है।[1]

योगदान

दीपक पारेख ने भारत के वित्तीय क्षेत्र के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने फ्रांसीसी कंपनियों को स्थापित करने में भी अपना योगदान दिया है। फ्रांस की सरकार के अनुसार, श्री पारेख के अथक प्रयासों से भारत और फ्रांस के आर्थिक संबंधों में सुधार हुआ है। भारत के मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर ऋण प्रदान करके उनके घर के सपने को साकार करने में भी दीपक पारेख का बड़ा योगदान है।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 आदि गोदरेज (हिन्दी) itshindi.com। अभिगमन तिथि: 15 अक्टूबर, 2017।

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