तेजी बच्चन: Difference between revisions

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'''तेजी बच्चन [[हरिवंश राय बच्चन]] की पत्नी और आजकल भारतीय सिनेमा के महानायक [[अमिताभ बच्चन]] की माँ''' थीं।  
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'''तेजी बच्चन''' (जन्म- 12 अगस्त, 1914 लायलपुर ([[पाकिस्तान]]) - मृत्यु- 21 दिसम्बर, 2007 [[मुंबई]]) [[हरिवंश राय बच्चन]] की पत्नी और भारतीय सिनेमा के महानायक [[अमिताभ बच्चन]] की माँ थीं।  
==परिचय==
==परिचय==
तेजी बच्चन का जन्म 1914 में फैसलाबाद में एक [[सिख]] परिवार में हुआ था, जो अब [[पाकिस्तान]] में है। पंजाबी परिवार में जन्मी तेजी सूरी हरिवंश राय बच्चन की जिंदगी में दूसरी पत्नी बन कर आई थीं। पहली पत्नी 'श्यामा' के निधन के बाद बच्चन ने तेजी से प्रेम विवाह किया था। यह शादी 1941 में हुई थी। तब से 2003 में हरिवंश राय के निधन तक तेजी ने हर कदम पर पति का साथ निभाया। वर्ष 2003 में 96 वर्ष की उम्र में डा. हरिवंश राय बच्चन के निधन के बाद से ही तेजी का स्वास्थ्य गिरता गया।  
तेजी बच्चन का जन्म 1914 में फैसलाबाद में एक [[सिख]] परिवार में हुआ था, जो अब [[पाकिस्तान]] में है। पंजाबी परिवार में जन्मी तेजी सूरी हरिवंश राय बच्चन की जिंदगी में दूसरी पत्नी बन कर आई थीं। पहली पत्नी 'श्यामा' के निधन के बाद बच्चन ने तेजी से प्रेम विवाह किया था। यह शादी 1941 में हुई थी। तब से 2003 में हरिवंश राय के निधन तक तेजी ने हर कदम पर पति का साथ निभाया। वर्ष 2003 में 96 वर्ष की उम्र में डा. हरिवंश राय बच्चन के निधन के बाद से ही तेजी का स्वास्थ्य गिरता गया।  
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बच्‍चन भी तेजी का बहुत ख़्याल रखते थे और बेहद सम्‍मान भी करते थे। वे हरिवंश राय बच्‍चन को 'बच्‍चन' संबोधन से ही बुलाती थीं। हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन अपने युवा दिनों में साहित्य सम्मेलनों में बहुत मशहूर हुआ करते थे। दोनों की आवाज़ और कवि बच्चन की दिल को छू लेने वाली कविताएँ लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं।
बच्‍चन भी तेजी का बहुत ख़्याल रखते थे और बेहद सम्‍मान भी करते थे। वे हरिवंश राय बच्‍चन को 'बच्‍चन' संबोधन से ही बुलाती थीं। हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन अपने युवा दिनों में साहित्य सम्मेलनों में बहुत मशहूर हुआ करते थे। दोनों की आवाज़ और कवि बच्चन की दिल को छू लेने वाली कविताएँ लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं।
==दिल्ली प्रवास==
==दिल्ली प्रवास==
वे दमे की मरीज थीं और [[मुम्बई|मुम्‍बई]] का नमी वाला वातावरण उन्हें कभी रास नहीं आया। इसलिए वे मुंबई की बजाय [[दिल्ली]] में रहना पंसद करती थी। [[अमिताभ बच्चन|अमिताभ]] के फिल्म उद्योग में पैर जमाने के शुरुआती दौर में वे हरिवंश राय बच्‍चन के साथ दिल्‍ली में ही रहती थी बाकी परिवार मुम्‍बई में रहता था।  
वे दमे की मरीज थीं और [[मुम्बई|मुम्‍बई]] का नमी वाला वातावरण उन्हें कभी रास नहीं आया। इसलिए वे मुंबई की बजाय [[दिल्ली]] में रहना पंसद करती थी। [[अमिताभ बच्चन|अमिताभ]] के फिल्म उद्योग में पैर जमाने के शुरुआती दौर में वे हरिवंश राय बच्‍चन के साथ दिल्‍ली में ही रहती थी बाकी [[परिवार]] मुम्‍बई में रहता था।  
==स्वाभत: धार्मिक==
==धार्मिक स्वभाव==
वह भी बच्‍चन जी की ही तरह [[राम]] और [[हनुमान]] भक्‍त थीं।  
वह भी बच्‍चन जी की ही तरह [[राम]] और [[हनुमान]] भक्‍त थीं।  
==गायन व अभिनय==
==गायन व अभिनय==
तेजी एक [[अभिनेत्री]] भी थी। वे कॉलेज के दिनों में नाटकों में भाग लेती थीं। तेजी बच्चन अच्छी गायिका भी थीं और उन्होंने कई बार मंच पर अपनी कला का जौहर भी दिखाया था। यही नहीं विवाह के बाद भी वे [[इलाहाबाद]] और [[दिल्‍ली]] में कई बार मंचों पर अभिनय के लिए उतरीं हैं। हरिवंश राय बच्चन ने शेक्सपीयर के कई नाटकों का अनुवाद किया था और तेजी बच्चन ने कई नाटकों में अभिनय भी किया था। अमिताभ में अभिनय के संस्‍कार अपनी माँ से ही आए हैं।  
तेजी एक [[अभिनेत्री]] भी थी। वे कॉलेज के दिनों में नाटकों में भाग लेती थीं। तेजी बच्चन अच्छी गायिका भी थीं और उन्होंने कई बार मंच पर अपनी कला का जौहर भी दिखाया था। यही नहीं विवाह के बाद भी वे [[इलाहाबाद]] और [[दिल्ली]] में कई बार मंचों पर अभिनय के लिए उतरीं हैं। हरिवंश राय बच्चन ने शेक्सपीयर के कई नाटकों का अनुवाद किया था और तेजी बच्चन ने कई नाटकों में अभिनय भी किया था। अमिताभ में अभिनय के संस्‍कार अपनी माँ से ही आए हैं।  
==सामाजिक कार्यकर्ता==
==सामाजिक कार्यकर्ता==
श्रीमती बच्चन [[इलाहाबाद]] में एक सामाजिक कार्यकर्ता और रंगकर्मी के रुप में जानी जाती थी। वह [[आनंद भवन इलाहाबाद|आनंद भवन]] भी आया-जाया करती थीं और वहीं उनकी मुलाकात [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] से हुई थी। श्रीमती बच्चन ने ही हरिवंश राय बच्चन का परिचय नेहरु जी से कराया था।<ref>{{cite web |url=http://hindi.in.com/hindi/news-news-video-/101291/0 |title=श्रीमती तेजी बच्‍चन का निधन |accessmonthday=16 दिसम्बर |accessyear=2011|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=हिंदी}}</ref>
श्रीमती बच्चन [[इलाहाबाद]] में एक सामाजिक कार्यकर्ता और रंगकर्मी के रुप में जानी जाती थी। वह [[आनंद भवन इलाहाबाद|आनंद भवन]] भी आया-जाया करती थीं और वहीं उनकी मुलाकात [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] से हुई थी। श्रीमती बच्चन ने ही हरिवंश राय बच्चन का परिचय नेहरु जी से कराया था।<ref>{{cite web |url=http://hindi.in.com/hindi/news-news-video-/101291/0 |title=श्रीमती तेजी बच्‍चन का निधन |accessmonthday=16 दिसम्बर |accessyear=2011|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=हिंदी}}</ref>
==नेहरू परिवार से सम्बंध==
==नेहरू परिवार से सम्बंध==
अपने समय में कवि हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की जोड़ी [[भारत]] की चर्चित और लोकप्रिय जोड़ी मानी जाती थी। हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन जवाहर लाल नेहरू और [[इंदिरा गांधी]] के बेहद क़रीब माने जाते थे। [[सोनिया गाँधी]] जब [[राजीव गाँधी]] से शादी करके पहली बार भारत आई तो स्वर्गीय इन्दिरा गाँधी ने उन्हें साड़ी पहनने से लेकर भारतीय संस्कारों, भारतीय परंपराओं और तीज त्यौहारों का महत्व जानने व समझने के लिए तेजी बच्चन के पास ही भेजा था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=870&Itemid=43 |title=तेजी बच्चन-संस्कार और शालीनता की प्रतिमूर्ति |accessmonthday=16 दिसम्बर |accessyear=2011|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=हिंदी}}</ref>
अपने समय में कवि हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की जोड़ी [[भारत]] की चर्चित और लोकप्रिय जोड़ी मानी जाती थी। हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन [[जवाहर लाल नेहरू]] और [[इंदिरा गांधी]] के बेहद क़रीब माने जाते थे। [[सोनिया गाँधी]] जब [[राजीव गाँधी]] से शादी करके पहली बार भारत आई तो स्वर्गीय इन्दिरा गाँधी ने उन्हें साड़ी पहनने से लेकर भारतीय संस्कारों, भारतीय परंपराओं और तीज त्यौहारों का महत्व जानने व समझने के लिए तेजी बच्चन के पास ही भेजा था।<ref name="HMI">{{cite web |url=http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=870&Itemid=43 |title=तेजी बच्चन-संस्कार और शालीनता की प्रतिमूर्ति |accessmonthday=16 दिसम्बर |accessyear=2011|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=हिन्दी मीडिया डॉट इन |language=हिंदी}}</ref>
==पुत्र प्रेम==
==पुत्र प्रेम==
[[अमिताभ बच्चन|बिग बी]] 26 जुलाई, 1982 को कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान बुरी तरह जख्मी हो गए थे। दुनिया भर में उनके स्वस्थ होने की दुआएं की गई थीं। यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी विदेश दौरे को रद्द कर अमिताभ को देखने अस्पताल पहुंची थीं। लेकिन बहुत कम लोगों को यह तथ्य मालूम है कि अमिताभ की मां तेजी बच्चन के कहने पर महानायक की इस फिल्म की स्क्रिप्ट में क्लाइमेक्स ही चेंज कर दिया गया था। 'कुली' की मूल स्क्रिप्ट में अंत में अमिताभ बच्चन अभिनीत किरदार को मर जाना था, लेकिन तेजी बच्चन के अनुरोध पर यह सीन बदल दिया गया। इससे पहले अमिताभ कई फिल्मों के अंत में मरते हुए दिखाए गए थे, लेकिन कुली में तेजी बच्चन उन्हें मरते हुए नहीं देखना चाहती थीं, क्योंकि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके बेटे को नया जीवन मिला था। उन्होंने कुली के निर्देशक मनमोहन देसाई से आग्रह किया कि फिल्म के अंत में अमिताभ को मरते हुए न दिखाया जाए।   
[[अमिताभ बच्चन|बिग बी]] 26 जुलाई, 1982 को कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान बुरी तरह जख्मी हो गए थे। दुनिया भर में उनके स्वस्थ होने की दुआएं की गई थीं। यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी विदेश दौरे को रद्द कर अमिताभ को देखने अस्पताल पहुंची थीं। लेकिन बहुत कम लोगों को यह तथ्य मालूम है कि अमिताभ की मां तेजी बच्चन के कहने पर महानायक की इस फिल्म की स्क्रिप्ट में क्लाइमेक्स ही चेंज कर दिया गया था। 'कुली' की मूल स्क्रिप्ट में अंत में अमिताभ बच्चन अभिनीत किरदार को मर जाना था, लेकिन तेजी बच्चन के अनुरोध पर यह सीन बदल दिया गया। इससे पहले अमिताभ कई फिल्मों के अंत में मरते हुए दिखाए गए थे, लेकिन कुली में तेजी बच्चन उन्हें मरते हुए नहीं देखना चाहती थीं, क्योंकि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके बेटे को नया जीवन मिला था। उन्होंने कुली के निर्देशक मनमोहन देसाई से आग्रह किया कि फिल्म के अंत में अमिताभ को मरते हुए न दिखाया जाए।   
==पुष्पा भारती के विचार==
==पुष्पा भारती के विचार==
विगत पचास साल से [[इलाहबाद]] से लेकर [[मुंबई]] तक बच्चन परिवार पारिवारिक मित्र और तेजी बच्चन के हर सुख-दुःख में साथ रही पुष्पा भारती ने कहा कि इलाहाबाद में हमारे परिवार के बीच साहित्यिक नाते थे, लेकिन मुंबई आने के बाद हम पारिवारिक मित्र हो गए। उन्होंने कहा कि तेजी मनोविज्ञान की प्रोफेसर थी और साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी और वे युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करती थीं। उनके लिखे पत्र आज भी मेरे पास रखे हैं। उन्हें पढ़ने से पता चलता है कि उनकी भाषा में अद्‍भुत लालित्य था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=870&Itemid=43 |title=तेजी बच्चन-संस्कार और शालीनता की प्रतिमूर्ति|accessmonthday=16 दिसम्बर |accessyear=2011|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=हिंदी}}</ref>
विगत पचास साल से [[इलाहाबाद]] से लेकर [[मुंबई]] तक बच्चन परिवार पारिवारिक मित्र और तेजी बच्चन के हर सुख-दुःख में साथ रही पुष्पा भारती ने कहा कि इलाहाबाद में हमारे परिवार के बीच साहित्यिक नाते थे, लेकिन मुंबई आने के बाद हम पारिवारिक मित्र हो गए। उन्होंने कहा कि तेजी मनोविज्ञान की प्रोफेसर थी और साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी और वे युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करती थीं। उनके लिखे पत्र आज भी मेरे पास रखे हैं। उन्हें पढ़ने से पता चलता है कि उनकी [[भाषा]] में अद्‍भुत लालित्य था।<ref name="HMI"/>
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21 दिसम्बर 2007 [[शुक्रवार]] को लंबी बीमारी के बाद [[मुंबई]] के 'लीलावती अस्पताल' में उनका देहांत हो गया। वे 93 वर्ष की थीं।  





Revision as of 14:07, 18 December 2011

तेजी बच्चन
पूरा नाम तेजी बच्चन
जन्म 12 अगस्त, सन 1914
जन्म भूमि लायलपुर (पाकिस्तान)
मृत्यु 21 दिसंबर, 2007
मृत्यु स्थान मुंबई, महाराष्ट्र
पति/पत्नी हरिवंश राय बच्चन
संतान अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी तेजी एक अभिनेत्री भी थी। वे कॉलेज के दिनों में नाटकों में भाग लेती थीं। तेजी बच्चन अच्छी गायिका भी थीं और उन्होंने कई बार मंच पर अपनी कला का जौहर भी दिखाया था।

तेजी बच्चन (जन्म- 12 अगस्त, 1914 लायलपुर (पाकिस्तान) - मृत्यु- 21 दिसम्बर, 2007 मुंबई) हरिवंश राय बच्चन की पत्नी और भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की माँ थीं।

परिचय

तेजी बच्चन का जन्म 1914 में फैसलाबाद में एक सिख परिवार में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। पंजाबी परिवार में जन्मी तेजी सूरी हरिवंश राय बच्चन की जिंदगी में दूसरी पत्नी बन कर आई थीं। पहली पत्नी 'श्यामा' के निधन के बाद बच्चन ने तेजी से प्रेम विवाह किया था। यह शादी 1941 में हुई थी। तब से 2003 में हरिवंश राय के निधन तक तेजी ने हर कदम पर पति का साथ निभाया। वर्ष 2003 में 96 वर्ष की उम्र में डा. हरिवंश राय बच्चन के निधन के बाद से ही तेजी का स्वास्थ्य गिरता गया।

पहली मुलाकात

तेजी से बच्चन की मुलाकात बरेली में एक मित्र 'ज्ञानप्रकाश जौहरी' के घर हुई, जिनकी पत्नी लाहौर के 'फतेहचंद कॉलेज' में प्राचार्य थीं और तेजी उसी कॉलेज में मनोविज्ञान पढ़ाती थीं। तेजी बच्चन की कविताओं की प्रशंसक थीं, इसलिए दोनों के बीच प्रेम और विवाह होने में देर नहीं लगी। 24 जनवरी 1942 को इलाहाबाद के जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में उन्होंने अपना विवाह रजिस्टर कराया। उस समय के रूढ़िवादी समाज में यह एक विवादास्पद विवाह था। तेजी के पिता खजानसिंह लंदन से बैरिस्टरी करके आए थे और उन्होंने लायलपुर में प्रैक्टिस की थी। सरदार खजानसिंह बाद में 'पटियाला राज्य' के रेवेन्यू मिनिस्टर बने और अंततः लाहौर जा बसे। तेजी एक मातृविहीन बालिका थीं। शुरू में कवि बच्चन से तेजी का विवाह खजानसिंह को पसंद नहीं आया था, लेकिन बाद में संबंध सामान्य हो गए।

परस्पर सम्मान की भावना

बच्‍चन भी तेजी का बहुत ख़्याल रखते थे और बेहद सम्‍मान भी करते थे। वे हरिवंश राय बच्‍चन को 'बच्‍चन' संबोधन से ही बुलाती थीं। हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन अपने युवा दिनों में साहित्य सम्मेलनों में बहुत मशहूर हुआ करते थे। दोनों की आवाज़ और कवि बच्चन की दिल को छू लेने वाली कविताएँ लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं।

दिल्ली प्रवास

वे दमे की मरीज थीं और मुम्‍बई का नमी वाला वातावरण उन्हें कभी रास नहीं आया। इसलिए वे मुंबई की बजाय दिल्ली में रहना पंसद करती थी। अमिताभ के फिल्म उद्योग में पैर जमाने के शुरुआती दौर में वे हरिवंश राय बच्‍चन के साथ दिल्‍ली में ही रहती थी बाकी परिवार मुम्‍बई में रहता था।

धार्मिक स्वभाव

वह भी बच्‍चन जी की ही तरह राम और हनुमान भक्‍त थीं।

गायन व अभिनय

तेजी एक अभिनेत्री भी थी। वे कॉलेज के दिनों में नाटकों में भाग लेती थीं। तेजी बच्चन अच्छी गायिका भी थीं और उन्होंने कई बार मंच पर अपनी कला का जौहर भी दिखाया था। यही नहीं विवाह के बाद भी वे इलाहाबाद और दिल्ली में कई बार मंचों पर अभिनय के लिए उतरीं हैं। हरिवंश राय बच्चन ने शेक्सपीयर के कई नाटकों का अनुवाद किया था और तेजी बच्चन ने कई नाटकों में अभिनय भी किया था। अमिताभ में अभिनय के संस्‍कार अपनी माँ से ही आए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता

श्रीमती बच्चन इलाहाबाद में एक सामाजिक कार्यकर्ता और रंगकर्मी के रुप में जानी जाती थी। वह आनंद भवन भी आया-जाया करती थीं और वहीं उनकी मुलाकात पंडित जवाहर लाल नेहरू से हुई थी। श्रीमती बच्चन ने ही हरिवंश राय बच्चन का परिचय नेहरु जी से कराया था।[1]

नेहरू परिवार से सम्बंध

अपने समय में कवि हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की जोड़ी भारत की चर्चित और लोकप्रिय जोड़ी मानी जाती थी। हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बेहद क़रीब माने जाते थे। सोनिया गाँधी जब राजीव गाँधी से शादी करके पहली बार भारत आई तो स्वर्गीय इन्दिरा गाँधी ने उन्हें साड़ी पहनने से लेकर भारतीय संस्कारों, भारतीय परंपराओं और तीज त्यौहारों का महत्व जानने व समझने के लिए तेजी बच्चन के पास ही भेजा था।[2]

पुत्र प्रेम

बिग बी 26 जुलाई, 1982 को कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान बुरी तरह जख्मी हो गए थे। दुनिया भर में उनके स्वस्थ होने की दुआएं की गई थीं। यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी विदेश दौरे को रद्द कर अमिताभ को देखने अस्पताल पहुंची थीं। लेकिन बहुत कम लोगों को यह तथ्य मालूम है कि अमिताभ की मां तेजी बच्चन के कहने पर महानायक की इस फिल्म की स्क्रिप्ट में क्लाइमेक्स ही चेंज कर दिया गया था। 'कुली' की मूल स्क्रिप्ट में अंत में अमिताभ बच्चन अभिनीत किरदार को मर जाना था, लेकिन तेजी बच्चन के अनुरोध पर यह सीन बदल दिया गया। इससे पहले अमिताभ कई फिल्मों के अंत में मरते हुए दिखाए गए थे, लेकिन कुली में तेजी बच्चन उन्हें मरते हुए नहीं देखना चाहती थीं, क्योंकि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके बेटे को नया जीवन मिला था। उन्होंने कुली के निर्देशक मनमोहन देसाई से आग्रह किया कि फिल्म के अंत में अमिताभ को मरते हुए न दिखाया जाए। 

पुष्पा भारती के विचार

विगत पचास साल से इलाहाबाद से लेकर मुंबई तक बच्चन परिवार पारिवारिक मित्र और तेजी बच्चन के हर सुख-दुःख में साथ रही पुष्पा भारती ने कहा कि इलाहाबाद में हमारे परिवार के बीच साहित्यिक नाते थे, लेकिन मुंबई आने के बाद हम पारिवारिक मित्र हो गए। उन्होंने कहा कि तेजी मनोविज्ञान की प्रोफेसर थी और साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी और वे युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करती थीं। उनके लिखे पत्र आज भी मेरे पास रखे हैं। उन्हें पढ़ने से पता चलता है कि उनकी भाषा में अद्‍भुत लालित्य था।[2] स्व. धर्मवीर भारती की पत्‍‌नी पुष्पा भारती ने हरिवंश राय बच्चन एवं तेजी बच्चन की 1941 में हुई पहली मुलाकात एवं उसके बाद तेजी बच्चन की सुंदरता से जुड़े अनेक किस्से सुनाए। पुष्पा भारती के अनुसार, जब सरोजिनी नायडू ने पहली बार बच्चन दंपती को पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिलवाया तो उनका परिचय यह कहकर करवाया- 'नेहरू जी, ये हैं देश के एक महान कवि हरिवंशराय बच्चन एवं ये हैं इनकी कविता।'[3]

खराब स्वास्थ्य

वर्ष 2004 से तेजी बच्चन ने ज़्यादा समय बीमारी की वजह से अस्पतालों में ही गुज़ारा। ख़राब स्वास्थ्य की वजह से वे अप्रैल में अपने पौत्र अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या की शादी में भी शामिल नहीं हो सकीं थीं। शादी के तुरंत बाद नवविवाहित जोड़े ने अस्पताल जाकर अपनी दादी से आशीर्वाद लिया था।[4]

प्रियंका गाँधी के विचार

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी ने अपनी अच्छी हिंदी के लिए सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन को श्रेय दिया है। प्रियंका ने ‘एनडीटीवी’ के साथ एक साक्षात्कार में अपनी अच्छी हिंदी के बारे में कहा, “यह सब तेजी बच्चन के कारण है”। प्रियंका गांधी ने आगे कहा, “बचपन में मैंने तेजी बच्चन के साथ बहुत समय बिताया है। वह मुझे हरिवंश राय बच्चन की कविताएं और पुस्तकें पढ़ने को देती थीं। वाकई में उन्होंने ही मेरे भीतर हिंदी साहित्य के प्रति रुचि जगाई है”।[5]

निधन

21 दिसम्बर 2007 शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद मुंबई के 'लीलावती अस्पताल' में उनका देहांत हो गया। वे 93 वर्ष की थीं।


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शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. श्रीमती तेजी बच्‍चन का निधन (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  2. 2.0 2.1 तेजी बच्चन-संस्कार और शालीनता की प्रतिमूर्ति (हिंदी) हिन्दी मीडिया डॉट इन। अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  3. तेजी बच्चन की सुंदरता का बखान सुन ऐश्वर्या थीं दंग (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  4. अमिताभ की माँ तेजी बच्चन का निधन (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  5. तेजी बच्चन ने सिखाई है हिंदी: प्रियंका गांधी (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।

बाहरी कड़ियाँ

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