प्रतिलोम विवाह: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search
[unchecked revision][unchecked revision]
(''''प्रतिलोम विवाह''' उस विवाह को कहते हैं, जिसमें उच्च ...' के साथ नया पन्ना बनाया)
 
m (Text replace - " कानून" to " क़ानून")
 
(2 intermediate revisions by 2 users not shown)
Line 1: Line 1:
'''प्रतिलोम विवाह''' उस [[विवाह]] को कहते हैं, जिसमें उच्च कुल की स्त्री निम्न कुल के पुरुष से विवाह करती है। विशेष विवाह अधिनियम 1954, [[हिन्दू विवाह अधिनियम 1955]], हिन्दू विवाह कानून (संशोधन) अधिनियम [[1976]] इत्यादि के कारण अब [[अंतर्जातीय विवाह]] को कानूनी मान्यता प्राप्त हो गई है। फलस्वरूप प्रतिलोम नियम कमजोर हो गया है।
'''प्रतिलोम विवाह''' उस [[विवाह]] को कहते हैं, जिसमें उच्च कुल की स्त्री निम्न कुल के पुरुष से विवाह करती है। विशेष विवाह अधिनियम 1954, [[हिन्दू विवाह अधिनियम 1955]], हिन्दू विवाह क़ानून (संशोधन) अधिनियम [[1976]] इत्यादि के कारण अब [[अंतर्जातीय विवाह]] को क़ानूनी मान्यता प्राप्त हो गई है। फलस्वरूप प्रतिलोम नियम कमज़ोर हो गया है। इस प्रकार के विवाहों के उदाहरण प्राचीन साहित्य में मिलते हैं। यद्यपि
इतिहास में ऐसा समय कभी नहीं रहा, जिसमें प्रतिलोम विवाह, पूर्णरूप  से प्रचलित रहे हों। फिर भी कुछ उदाहरण अवश्य मिलते हैं। कदम्ब वंश के शकुतृस्थ वर्मा नामक ब्राह्मण राजा ने अपनी कन्याएँ गुप्त राजाओं की दी थी। प्रतिलोम विवाह के जो उदाहरण मिलते हैं, वे ऊँचे स्तर के व्यक्तियों के हैं। इससे यह विदित होता है कि समान आर्थिक स्तर के व्यक्तियों के सांस्कृतिक जीवन में अंतर नहीं था, इसलिए उनके बीच प्रतिलोम विवाहों की प्रथा प्रचलित थी। 10वीं शताब्दी तक भारत में अनुलोम विवाह उच्च वंशों में समान आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्तर के व्यक्तियों में प्रचलित था। अत: कहा जा सकता है कि अंतर-जातीय विवाह केवल 20वीं शताब्दी की ही अपनी मौलिक विशेषता नहीं हैं।
 




Line 6: Line 8:
<references/>
<references/>
==बाहरी कड़ियाँ==
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://books.google.co.in/books?id=SjVCpxYBSUwC&pg=PA322&lpg=PA322&dq=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&source=bl&ots=2NMf-aOLm7&sig=mJP_Et6oMjkcIXa0ca93FFTuTW8&hl=en&sa=X&ei=ze9jUca1KpHJrQek84DABw&ved=0CGkQ6AEwCA#v=onepage&q=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&f=false समाजविज्ञान विश्वकोश (गूगल बुक्स)]
==संबंधित लेख==
==संबंधित लेख==
{{विवाह}}  
{{विवाह}}  

Latest revision as of 14:11, 30 July 2013

प्रतिलोम विवाह उस विवाह को कहते हैं, जिसमें उच्च कुल की स्त्री निम्न कुल के पुरुष से विवाह करती है। विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955, हिन्दू विवाह क़ानून (संशोधन) अधिनियम 1976 इत्यादि के कारण अब अंतर्जातीय विवाह को क़ानूनी मान्यता प्राप्त हो गई है। फलस्वरूप प्रतिलोम नियम कमज़ोर हो गया है। इस प्रकार के विवाहों के उदाहरण प्राचीन साहित्य में मिलते हैं। यद्यपि इतिहास में ऐसा समय कभी नहीं रहा, जिसमें प्रतिलोम विवाह, पूर्णरूप से प्रचलित रहे हों। फिर भी कुछ उदाहरण अवश्य मिलते हैं। कदम्ब वंश के शकुतृस्थ वर्मा नामक ब्राह्मण राजा ने अपनी कन्याएँ गुप्त राजाओं की दी थी। प्रतिलोम विवाह के जो उदाहरण मिलते हैं, वे ऊँचे स्तर के व्यक्तियों के हैं। इससे यह विदित होता है कि समान आर्थिक स्तर के व्यक्तियों के सांस्कृतिक जीवन में अंतर नहीं था, इसलिए उनके बीच प्रतिलोम विवाहों की प्रथा प्रचलित थी। 10वीं शताब्दी तक भारत में अनुलोम विवाह उच्च वंशों में समान आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्तर के व्यक्तियों में प्रचलित था। अत: कहा जा सकता है कि अंतर-जातीय विवाह केवल 20वीं शताब्दी की ही अपनी मौलिक विशेषता नहीं हैं।



पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख