कोच्चि बंदरगाह: Difference between revisions

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'''कोच्चि बंदरगाह''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kochi Port)" [[केरल|केरल राज्य]] और मालाबार तट का प्रमुख बंदरगाह है जो मुम्बई से लगभग 920 किलोमीटर दक्षिण में है। यह [[समुद्र]] के समांतर एक विशाल अनूप के मुहाने पर स्थित प्राकृतिक [[बंदरगाह]] है।<ref>{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=भारत का भूगोल|लेखक=डॉ. चतुर्भुज मामोरिया |अनुवादक=| आलोचक=| प्रकाशक=साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, आगरा|संकलन= |संपादन= |पृष्ठ संख्या=367|url=|ISBN=}}</ref>   
'''कोच्चि बंदरगाह''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Kochi Port'') [[केरल|केरल राज्य]] और मालाबार तट का प्रमुख बंदरगाह है जो मुम्बई से लगभग 920 किलोमीटर दक्षिण में है। यह [[समुद्र]] के समांतर एक विशाल अनूप के मुहाने पर स्थित प्राकृतिक [[बंदरगाह]] है।<ref>{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=भारत का भूगोल|लेखक=डॉ. चतुर्भुज मामोरिया |अनुवादक=| आलोचक=| प्रकाशक=साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, आगरा|संकलन= |संपादन= |पृष्ठ संख्या=367|url=|ISBN=}}</ref>   
==इतिहास==
==इतिहास==
कोच्चि बंदरगाह पालघाट दर्रे से बनाये गये रेलमार्गों द्वारा [[दक्षिण भारत]] के भीतरी भागों से जुड़ा है। पोताश्रय से सम्बधित जलधारा 140 मीटर चौड़ी और 7 किलोमीटर लम्बी है, अत: बड़े जहाज़ सरलता से खड़े हो सकते हैं। सुदूर पूर्व, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[यूरोप]] के जलमार्ग यहां से जाते हैं। अत: यह अंतराष्ट्रीय दृष्टि से मुख्य व्यापारिक मार्ग के निकट ही स्थित है। इस बंदरगाह के निकट एक जहाज़ निर्माणशाला एवं एक तेल शोधनशाला भी स्थित है। अब इस बंदरगाह में अनेक पेट्रो-रसायन के कारखाने खोले जा चुके हैं।
कोच्चि बंदरगाह पालघाट दर्रे से बनाये गये रेलमार्गों द्वारा [[दक्षिण भारत]] के भीतरी भागों से जुड़ा है। पोताश्रय से सम्बधित जलधारा 140 मीटर चौड़ी और 7 किलोमीटर लम्बी है, अत: बड़े जहाज़ सरलता से खड़े हो सकते हैं। सुदूर पूर्व, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[यूरोप]] के जलमार्ग यहां से जाते हैं। अत: यह अंतराष्ट्रीय दृष्टि से मुख्य व्यापारिक मार्ग के निकट ही स्थित है। इस बंदरगाह के निकट एक जहाज़ निर्माणशाला एवं एक तेल शोधनशाला भी स्थित है। अब इस बंदरगाह में अनेक पेट्रो-रसायन के कारखाने खोले जा चुके हैं।

Revision as of 12:21, 10 November 2016

कोच्चि बंदरगाह (अंग्रेज़ी: Kochi Port) केरल राज्य और मालाबार तट का प्रमुख बंदरगाह है जो मुम्बई से लगभग 920 किलोमीटर दक्षिण में है। यह समुद्र के समांतर एक विशाल अनूप के मुहाने पर स्थित प्राकृतिक बंदरगाह है।[1]

इतिहास

कोच्चि बंदरगाह पालघाट दर्रे से बनाये गये रेलमार्गों द्वारा दक्षिण भारत के भीतरी भागों से जुड़ा है। पोताश्रय से सम्बधित जलधारा 140 मीटर चौड़ी और 7 किलोमीटर लम्बी है, अत: बड़े जहाज़ सरलता से खड़े हो सकते हैं। सुदूर पूर्व, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के जलमार्ग यहां से जाते हैं। अत: यह अंतराष्ट्रीय दृष्टि से मुख्य व्यापारिक मार्ग के निकट ही स्थित है। इस बंदरगाह के निकट एक जहाज़ निर्माणशाला एवं एक तेल शोधनशाला भी स्थित है। अब इस बंदरगाह में अनेक पेट्रो-रसायन के कारखाने खोले जा चुके हैं।

पृष्ठदेश

कोच्चि बंदरगाह के पृष्ठदेश में आलाबार तट, नीलगिरि और इलाहची पहाड़ियां और केरल, कर्नाटक तथा पश्चिमी तमिलनाडु के अन्य भाग आते हैं। दक्षिण भारत के शेष भागों से यह रेलमार्गों और उत्तम सड़को द्वारा जुड़ा है। इस बंदरगाह के पृष्ठदेश में सुपारी, चाय, कहवा, नारियल, गरम मसाले, रबड़ अधिक पैदा होता है।

आयात एवं निर्यात

कोच्चि बंदरगाह से निर्यात होने वाली बस्तुओं में नारियल की जटा, रस्से, चटाइयाँ, खोपरा, गिरि, नारियल का तेल, कहवा, रबड़, काजू, गरम मसाले, इलाइची आदि हैं। आयात के अंतर्गत चावल, गेहूं, कोयला, कपड़ा, खाद, इंजीनियरी सामान, खनिज तेल, आदि मुख्य हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारत का भूगोल |लेखक: डॉ. चतुर्भुज मामोरिया |प्रकाशक: साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, आगरा |पृष्ठ संख्या: 367 |

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