ऐसा यहु संसार है, जैसा सैंबल फूल -कबीर
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ऐसा यहु संसार है, जैसा सैंबल फूल। |
अर्थ सहित व्याख्या
कबीरदास कहते हैं कि हे मानव! यह संसार सेमर के फूल के समान है, जो ऊपर से देखने में सुन्दर और मोहक प्रतीत होता है, किन्तु उसके भीतर कोई तत्त्व नहीं होता। अल्पकाल के जीवन और उसकी विरंगात्मक भुलावे में नहीं आना चाहिए।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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