कबीर किया कछु होत नहिं -कबीर
| ||||||||||||||||||||
|
कबीर किया कछु होत नहिं, अनकीया सब होइ। |
अर्थ सहित व्याख्या
कबीरदास कहते हैं कि हे मानव! मनुष्य ईश्वर के अनुग्रह के बिना कुछ नहीं प्राप्त कर सकता। यदि भगवद अनुग्रह प्राप्त हो जाता है तो बिना साधना किये ही सब कुछ प्राप्त हो जाता है। यदि साधना, तपस्या आदि से कुछ होता भी है तो उसका वास्तविक कर्त्ता कोई और नहीं प्रभु ही है।
|
|
|
|
|
टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
संबंधित लेख