कबीर थोड़ा जीवना -कबीर
| ||||||||||||||||||||
|
कबीर थोड़ा जीवना, माड़ै बहुत मँडान। |
अर्थ सहित व्याख्या
कबीरदास कहते हैं कि हे मानव! क्षणिक जीवन के लिए मनुष्य बड़े-बड़े आयोजन करता है, किन्तु चाहे वह बहुत बड़ा राजा या सुल्तान हो या साधारण, दरिद्र मनुष्य, सभी की बड़े उत्साह से निर्मित योजनाएँ ध्वस्त हो जाती है। अर्थात् राजा-रंक भी जाते हैं और उनकी योजनाएँ भी ध्वस्त हो जाती हैं।
|
|
|
|
|
टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
संबंधित लेख