कबीर सबद सरीर मैं -कबीर
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कबीर सबद सरीर मैं, बिन गुन बाजै तांति। |
अर्थ सहित व्याख्या
कबीरदास कहते हैं कि मेरे भीतर अनाहत नाद बिना तारों के वाद्ययन्त्र की ध्वनि के समान गूँजे रहा है। वह भीतर-बाहर चारों ओर रम रहा है। फलस्वरूप मेरा चित्त शब्द-ब्रह्म में लीन हो गया है और इससे मेरी सारी भ्रान्तियाँ जाती रही हैं।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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