प्रतिभूति काग़ज़ कारख़ाना, होशंगाबाद: Difference between revisions
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स्वतन्त्र भारत का यह सपना था कि देश चलार्थ मुद्रा कागज़ के वर्षों से हो रहे आयात के भार से मुक्त हो, राष्ट्र की चलार्थ एवं बैंक नोट कागज़ के उत्पादन में स्वाव्लम्बन एवं कागज़ के आयात में हो रही विदेशी मुद्रा की बचत के उद्देश्य से साठ के दशक के शुरुआती वर्षों में ही प्रतिभूति काग़ज़ कारख़ाना की स्वप्निल परियोजना साकार हुई। किसी भी कागज़ उद्योग की पूर्वाप्रेक्षित आवश्यक्ताऒं जैसे भूमि, जल, विद्युत, परिवहन एवं मानव शक्ति आदि को ध्यान में रखते हुए [[होशंगाबाद]] को सर्वाधिक उपयक्त विकल्प मानकर चुना गया। कारखाने के भवन का अभिकल्पन तथा निर्माण कार्य केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने सन 1962 में प्रारम्भ किया। कारखाने के 500 मीटर लम्बे एवं 50 मीटर चौड़े मुख्य भवन का कार्य दिनांक 28 अक्टूबर 1963 को शुरू हुआ। | स्वतन्त्र भारत का यह सपना था कि देश चलार्थ मुद्रा कागज़ के वर्षों से हो रहे आयात के भार से मुक्त हो, राष्ट्र की चलार्थ एवं बैंक नोट कागज़ के उत्पादन में स्वाव्लम्बन एवं कागज़ के आयात में हो रही विदेशी मुद्रा की बचत के उद्देश्य से साठ के दशक के शुरुआती वर्षों में ही प्रतिभूति काग़ज़ कारख़ाना की स्वप्निल परियोजना साकार हुई। किसी भी कागज़ उद्योग की पूर्वाप्रेक्षित आवश्यक्ताऒं जैसे भूमि, जल, विद्युत, परिवहन एवं मानव शक्ति आदि को ध्यान में रखते हुए [[होशंगाबाद]] को सर्वाधिक उपयक्त विकल्प मानकर चुना गया। कारखाने के भवन का अभिकल्पन तथा निर्माण कार्य केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने सन 1962 में प्रारम्भ किया। कारखाने के 500 मीटर लम्बे एवं 50 मीटर चौड़े मुख्य भवन का कार्य दिनांक 28 अक्टूबर 1963 को शुरू हुआ। |
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प्रतिभूति काग़ज़ कारख़ाना, होशंगाबाद उच्च गुणवत्ता बैंक नोट और अन्य सुरक्षा प्रतिभूति मुद्रणालयों द्वारा ज़रूरी कागजात बनाने वाली संस्था है। यह भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) की एक इकाई है जो भारत सरकार के स्वामित्वाधीन कार्य करती है।
इतिहास
स्वतन्त्र भारत का यह सपना था कि देश चलार्थ मुद्रा कागज़ के वर्षों से हो रहे आयात के भार से मुक्त हो, राष्ट्र की चलार्थ एवं बैंक नोट कागज़ के उत्पादन में स्वाव्लम्बन एवं कागज़ के आयात में हो रही विदेशी मुद्रा की बचत के उद्देश्य से साठ के दशक के शुरुआती वर्षों में ही प्रतिभूति काग़ज़ कारख़ाना की स्वप्निल परियोजना साकार हुई। किसी भी कागज़ उद्योग की पूर्वाप्रेक्षित आवश्यक्ताऒं जैसे भूमि, जल, विद्युत, परिवहन एवं मानव शक्ति आदि को ध्यान में रखते हुए होशंगाबाद को सर्वाधिक उपयक्त विकल्प मानकर चुना गया। कारखाने के भवन का अभिकल्पन तथा निर्माण कार्य केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने सन 1962 में प्रारम्भ किया। कारखाने के 500 मीटर लम्बे एवं 50 मीटर चौड़े मुख्य भवन का कार्य दिनांक 28 अक्टूबर 1963 को शुरू हुआ। इस भवन का पश्चिमी भाग दो मंजिला और शेष हिस्सा एक मंजिला बनाया गया है। कागज़ निर्माण करने वाली पहली दो मशीनों के प्रथम युग्म की स्थापना का कार्य 27 जून 1967 को पूर्ण हुआ जबकि मशीन क्रमांक 3 एवं 4 के दूसरे जोड़े की स्थापना 27 नवंबर 1967 को पूरी हुई। कारखाने का औपचारिक रूप से उद्घाटन एवं राष्ट्र के नाम समर्पण 9 मार्च 1967 को तत्कालीन उपप्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जी द्वारा किया गया।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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