कला-संस्कृति और धर्म सामान्य ज्ञान 424: Difference between revisions
Jump to navigation
Jump to search
[unchecked revision] | [unchecked revision] |
('{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}} {{कला सामान्य ज्ञान न...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) |
No edit summary |
||
Line 14: | Line 14: | ||
-[[पुष्कर]] | -[[पुष्कर]] | ||
-[[अयोध्या]] | -[[अयोध्या]] | ||
||[[चित्र:Mahabodhi-Temple-1.jpg|right|border|80px|महाबोधि मंदिर, बोधगया]]'गया' [[झारखंड]] और [[बिहार]] की सीमा और [[फल्गु नदी]] के [[तट]] पर बसा [[बिहार]] का एक प्रमुख नगर है। [[वाराणसी]] की तरह [[गया]] की प्रसिद्धि मुख्य रूप से एक धार्मिक नगरी के रूप में है। [[पितृपक्ष]] के अवसर पर यहाँ हज़ारों श्रद्धालु [[पिंडदान]] के लिये जुटते हैं। गया सड़क, रेल और वायु मार्ग द्वारा पूरे [[भारत]] से अच्छी तरह जुड़ा है। नवनिर्मित 'गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा' द्वारा यह [[थाइलैंड]] से भी सीधे जुड़ा हुआ है। गया से 17 किलोमीटर की दूरी पर [[बोधगया]] स्थित है जो [[बौद्ध]] [[तीर्थ]] स्थल है और यहीं 'बोधिवृक्ष' के नीचे भगवान [[बुद्ध]] को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[गया]] | |||
{[[देवता|देवों]] एवं [[असुर|असुरों]] द्वारा किये गए [[समुद्र मंथन]] से निकले अश्व का नाम क्या था? | {[[देवता|देवों]] एवं [[असुर|असुरों]] द्वारा किये गए [[समुद्र मंथन]] से निकले अश्व का नाम क्या था? | ||
Line 20: | Line 21: | ||
-[[ऐरावत]] | -[[ऐरावत]] | ||
-[[बाज़]] | -[[बाज़]] | ||
+[[ | +[[उच्चैश्रवा]] | ||
||[[चित्र:Samudra-manthan-2.jpg|right|border|80px|समुद्र मंथन]]'उच्चैश्रवा' पौराणिक धर्म ग्रंथों और [[हिन्दू]] मान्यताओं के अनुसार [[इन्द्र]] के अश्व का नाम है। यह अश्व [[समुद्र मंथन]] के दौरान जो चौदह वस्तुएँ प्राप्त हुई थीं, उनमें से एक था। इसे देवराज इन्द्र को दे दिया गया था।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[उच्चैश्रवा]] | |||
{[[विष्णु|भगवान विष्णु]] के [[परिवार]] में 'वेदमूर्ति' नाम से कौन प्रख्यात है? | {[[विष्णु|भगवान विष्णु]] के [[परिवार]] में 'वेदमूर्ति' नाम से कौन प्रख्यात है? | ||
Line 28: | Line 30: | ||
-[[अनन्त (नाग) |अनंत]] | -[[अनन्त (नाग) |अनंत]] | ||
+[[गरुड़]] | +[[गरुड़]] | ||
||[[चित्र:Garuda.jpg|right|border|80px|गरुड़]]'गरुड़' [[हिन्दू धर्म]] के अनुसार पक्षियों के राजा और [[विष्णु|भगवान विष्णु]] के वाहन हैं। ये [[कश्यप|कश्यप ऋषि]] और [[विनता]] के पुत्र तथा [[अरुण देवता|अरुण]] के भ्राता हैं। [[लंका]] के राजा [[रावण]] के पुत्र [[इन्द्रजित]] ने जब युद्ध में [[राम]] और [[लक्ष्मण]] को नागपाश से बाँध लिया, तब [[गरुड़]] ने ही उन्हें इस बंधन से मुक्त किया था। [[काकभुशुंडी]] नामक एक कौए ने गरुड़ को [[श्रीराम]] कथा सुनाई थी।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[गरुड़]] | |||
{जिस बहेलिए के हाथों [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] की मृत्यु हुई, उसका नाम क्या था? | {जिस बहेलिए के हाथों [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] की मृत्यु हुई, उसका नाम क्या था? | ||
Line 35: | Line 38: | ||
-[[दशरथ]] | -[[दशरथ]] | ||
+[[जरा (बहेलिया)|जरा]] | +[[जरा (बहेलिया)|जरा]] | ||
||[[चित्र:Radha-Krishna-1.jpg|right|border|80px|राधा-कृष्ण]]'कृष्ण' [[हिन्दू धर्म]] में [[विष्णु|भगवान विष्णु]] का [[अवतार]] माना जाता है। [[सनातन धर्म]] के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा [[मोक्ष]] प्रदान करने वाले प्रमुख [[देवता]] हैं। श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति न होकर 'युग पुरुष' थे। उनके व्यक्तित्व में [[भारत]] को एक प्रतिभा सम्पन्न 'राजनीतिवेत्ता' ही नही, एक महान् 'कर्मयोगी' और 'दार्शनिक' प्राप्त हुआ, जिसका '[[गीता]]' ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[कृष्ण]] | |||
{[[समुद्र मंथन]] के परिणामस्वरूप निकलने वाले [[हलाहल विष]] को सबसे पहले किसने देखा था? | {[[समुद्र मंथन]] के परिणामस्वरूप निकलने वाले [[हलाहल विष]] को सबसे पहले किसने देखा था? | ||
|type="()"} | |type="()"} | ||
+[[नारद | +[[नारद]] | ||
-[[इंद्र|देवरज इंद्र]] | -[[इंद्र|देवरज इंद्र]] | ||
-[[वासुकि नाग]] | -[[वासुकि नाग]] | ||
-[[बलि|असुर बलि]] | -[[बलि|असुर बलि]] | ||
||[[चित्र:Narada-Muni.jpg|right|border|80px|नारद मुनि]]'नारद' [[ब्रह्मा]] के सात मानस पुत्रों में से एक माने गये हैं। ये [[विष्णु|भगवान विष्णु]] के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते है। ये स्वयं [[वैष्णव]] हैं और वैष्णवों के परमाचार्य तथा मार्गदर्शक हैं। ये प्रत्येक [[युग]] में भगवान की [[भक्ति]] और उनकी महिमा का विस्तार करते हुए लोक-कल्याण के लिए सर्वदा सर्वत्र विचरण किया करते हैं। भक्ति तथा संकीर्तन के ये आद्य-आचार्य हैं। इनकी [[वीणा]] भगवन जप 'महती' के नाम से विख्यात है। उससे 'नारायण-नारायण' की ध्वनि निकलती रहती है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[नारद]] | |||
</quiz> | </quiz> | ||
|} | |} |
Latest revision as of 05:36, 17 February 2020
सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
राज्यों के सामान्य ज्ञान
- REDIRECTसाँचा:नीलाइस विषय से संबंधित लेख पढ़ें:-
- REDIRECTसाँचा:नीला बन्द कला प्रांगण, कला कोश, संस्कृति प्रांगण, संस्कृति कोश, धर्म प्रांगण, धर्म कोश
पन्ने पर जाएँ
|
पन्ने पर जाएँ
सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
राज्यों के सामान्य ज्ञान