मुँह की खाना
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मुँह की खाना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है।
अर्थ- विपक्षी या विरोधी द्वारा अपमानित या परास्त होना। प्रयोग- अंत में कलक्टर को मुँह की खानी पड़ी और राजा साहब डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के प्रथम भारतीय अध्यक्ष मनोनीत हुए। (राधा राधिका रमण प्रसाद सिंह)
टीका टिप्पणी और संदर्भ
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