दीनानाथ भार्गव: Difference between revisions
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दीनानाथ भार्गव का जन्म 1 नवंबर, 1927 को [[मध्य प्रदेश]] के बैतूल जिले के मुलताई में हुआ था। वह कला भवन, शांति निकेतन के कला गुरु नन्दलाल बोस के प्रिय शिष्यों में एक थे। बोस ने ही उन्हें भारतीय संविधान की पांडुलिपि पृष्ठों को डिजाइन करने वाली टीम में चुना था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जब दीनानाथ भार्गव को इस डिजाइन दल में चुना गया था, उस समय वह शांति निकेतन में ललित कला में तीन साल का डिप्लोमा कर रहे थे। | दीनानाथ भार्गव का जन्म 1 नवंबर, 1927 को [[मध्य प्रदेश]] के बैतूल जिले के मुलताई में हुआ था। वह कला भवन, शांति निकेतन के कला गुरु नन्दलाल बोस के प्रिय शिष्यों में एक थे। बोस ने ही उन्हें भारतीय संविधान की पांडुलिपि पृष्ठों को डिजाइन करने वाली टीम में चुना था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जब दीनानाथ भार्गव को इस डिजाइन दल में चुना गया था, उस समय वह शांति निकेतन में ललित कला में तीन साल का डिप्लोमा कर रहे थे। |
Revision as of 18:52, 3 May 2021
दीनानाथ भार्गव
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पूरा नाम | दीनानाथ भार्गव |
जन्म | 1 नवंबर, 1927 |
जन्म भूमि | मुलताई, ज़िला बैतूल, मध्य प्रदेश |
मृत्यु | 24 दिसंबर, 2016 |
कर्म भूमि | भारत |
कर्म-क्षेत्र | चित्रकारी |
प्रसिद्धि | भारतीय संविधान की पांडुलिपि के पृष्ठों को तैयार करने वाले नामी चित्रकार। |
नागरिकता | भारतीय |
संबंधित लेख | भारत का संविधान, नंदलाल बोस, शांति निकेतन |
अन्य जानकारी | संविधान के निर्माण के दौरान संविधान के प्रथम पृष्ठ का भी निर्माण किया गया, जिसे अशोक स्तंभ का रूप दिया गया है। संविधान के प्रथम पृष्ठ पर बनाए गए अशोक स्तंभ के मुख्य चित्रकार की भूमिका दीनानाथ भार्गव ने निभाई थी। |
दीनानाथ भार्गव (अंग्रेज़ी: Dinanath Bhargava, जन्म- 1 नवंबर, 1927; मृत्यु- 24 दिसंबर, 2016) भारत के प्रसिद्ध चित्रकार थे। वह राष्ट्रीय चिह्न (अशोक सिंह स्तंभ) को स्केच करने वाली टीम के सदस्य रहे और भारतीय संविधान की पांडुलिपि के पृष्ठों को तैयार करने वाले नामी चित्रकार थे। दीनानाथ भार्गव को विख्यात विख्यात चित्रकार नंदलाल बोस ने संविधान के पन्ने संवारने वाले दल में चुना था। दीनानाथ भार्गव तब बीस साल के थे और शांति निकेतन में फाइन आर्ट्स की पढ़ाई कर रहे थे।
परिचय
दीनानाथ भार्गव का जन्म 1 नवंबर, 1927 को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में हुआ था। वह कला भवन, शांति निकेतन के कला गुरु नन्दलाल बोस के प्रिय शिष्यों में एक थे। बोस ने ही उन्हें भारतीय संविधान की पांडुलिपि पृष्ठों को डिजाइन करने वाली टीम में चुना था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जब दीनानाथ भार्गव को इस डिजाइन दल में चुना गया था, उस समय वह शांति निकेतन में ललित कला में तीन साल का डिप्लोमा कर रहे थे।
संविधान के प्रथम पृष्ठ के निर्माता
संविधान के निर्माण के दौरान संविधान के प्रथम पृष्ठ का भी निर्माण किया गया, जिसे अशोक स्तंभ का रूप दिया गया है। संविधान के प्रथम पृष्ठ पर बनाए गए अशोक स्तंभ की मुख्य चित्रकार की भूमिका इंदौर के दीनानाथ भार्गव ने निभाई थी। दीनानाथ भार्गव ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर संविधान का यह प्रथम पृष्ठ तैयार किया था। तैयार की गई इस चित्रकारी को गोल्डन स्याही से बनाया गया था। संविधान के निर्माण की जिम्मेदारी शांति निकेतन को दी गई थी। शांति निकेतन के कला गुरु नंदलाल बोस ने इसे बनाने की जिम्मेदारी दीनानाथ भार्गव को सौंप दी थी।
प्रथम पृष्ठ तैयार करने को लेकर दीनानाथ भार्गव कई बार चिड़ियाघर गये और वहाँ शेरों को देखते थे। दीनानाथ भार्गव जी की पत्नी का कहना था कि जब प्रथम पृष्ठ की चित्रकारी को तैयार किया जाना था, उससे पहले भार्गव जी ने शेर की बनावट को समझने के लिए कई बार कोलकाता का चिड़ियाघर जाकर शेर को देखा। जिससे पेंटिंग के दौरान किसी भी तरह की कमी ना रहे। दीनानाथ भार्गव ने जब पहली पेंटिंग को तैयार किया और उसे दिल्ली भेजा था तो मुख्य पृष्ठ की कलाकृति पर ब्रश गिर जाने के कारण उसे दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद दीनानाथ भार्गव ने एक बार फिर प्रथम पृष्ठ को तैयार किया था।
दीनानाथ भार्गव ने प्रथम पृष्ठ के लिए जो कलाकृति तैयार की थी, उसका पहला मॉडल आज भी उनके परिवार के पास है। उनकी पत्नी और परिवार ने इसे सहेज कर रखा है। बताया जाता है कि दीनानाथ भार्गव ने प्रथम पृष्ठ के साथ-साथ संविधान के करीब 40 पृष्ठों की चित्रकारी भी की थी।
इंदिरा जी की साड़ियों की डिज़ाइनिंग
इंदिरा गांधी के कपड़ों को भी दीनानाथ भार्गव ने डिज़ायन किया। उनकी पत्नी के अनुसार, कुछ सालों पहले ही दीनानाथ भार्गव का निधन हुआ है। उन्होंने संविधान निर्माण के दौरान अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वे एक कुशल कलाकार थे। चित्रकारी और कलाकृति में माहिर दीनानाथ भार्गव उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की साड़ियां भी डिजाइन करते थे। इंदिरा गांधी उनकी कला और डिज़ायन के चलते उनसे काफी प्रभावित थीं।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
संबंधित लेख