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+[[मंगल पाण्डे]]
 
+[[मंगल पाण्डे]]
-शिवराम
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-[[राजगुरु|शिवराम राजगुरु]]
-हरदेव
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-[[बाबा हरभजन सिंह]]
-अब्दुल रहीम
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-[[बसंत कुमार दास]]
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||[[चित्र:Mangal Panday.jpg|right|border|80px|मंगल पांडे]]'मंगल पांडे' का नाम '[[भारतीय स्वाधीनता संग्राम]]' में अग्रणी योद्धाओं के रूप में लिया जाता है, जिनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से [[अंग्रेज़]] [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] का शासन बुरी तरह हिल गया था। मंगल पांडे की शहादत ने [[भारत]] में पहली क्रांति के बीज बोए थे। अंग्रेज़ी सेना में नयी एनफ़ील्ड बंदूक भरने के लिये कारतूस को दांतों से काट कर खोलना पड़ता था और उसमे भरे हुए बारूद को बंदूक की नली में भर कर कारतूस में डालना पड़ता था। कारतूस के बाहरी आवरण में चर्बी होती थी, जो कि उसे नमी अर्थात् पानी की सीलन से बचाती थी। सिपाहियों के बीच अफ़वाह फ़ैल चुकी थी कि कारतूस में लगी हुई चर्बी सुअर और [[गाय]] के मांस से बनायी जाती है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[मंगल पांडे]]
  
 
{[[सिंधु घाटी सभ्यता|सिंधु घाटी की सभ्यता]] कहाँ तक विस्तृत थी?
 
{[[सिंधु घाटी सभ्यता|सिंधु घाटी की सभ्यता]] कहाँ तक विस्तृत थी?
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-[[पंजाब]], [[राजस्थान]], [[गुजरात]], [[उड़ीसा]], [[बंगाल]]
 
-[[पंजाब]], [[राजस्थान]], [[गुजरात]], [[उड़ीसा]], [[बंगाल]]
 
+[[पंजाब]], [[राजस्थान]], [[गुजरात]], [[उत्तर प्रदेश]], [[हरियाणा]], [[सिंध]], [[बलूचिस्तान]]
 
+[[पंजाब]], [[राजस्थान]], [[गुजरात]], [[उत्तर प्रदेश]], [[हरियाणा]], [[सिंध]], [[बलूचिस्तान]]
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||[[चित्र:Mohenjodaro-Sindh.jpg|right|border|80px|सिन्ध में मोहनजोदाड़ो में हड़प्पा संस्कृति के अवशेष]]'सिंधु घाटी सभ्यता' विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह [[हड़प्पा सभ्यता]] और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है। आज से लगभग {{#expr:{{CURRENTYEAR}}-1940}} वर्ष पूर्व [[पाकिस्तान]] के पश्चिमी पंजाब प्रांत के माण्टगोमरी ज़िले में स्थित हरियाणा के निवासियों को शायद इस बात का किंचित्मात्र भी आभास नहीं था कि वे अपने आस-पास की ज़मीन में दबी जिन ईटों का प्रयोग इतने धड़ल्ले से अपने मकानों के निर्माण में कर रहे हैं, वह कोई साधारण ईटें नहीं, बल्कि लगभग 5,000 वर्ष पुरानी और पूरी तरह विकसित सभ्यता के [[अवशेष]] हैं। इसका आभास उन्हें तब हुआ जब 1856 ई. में जॉन विलियम ब्रन्टम ने [[कराची]] से [[लाहौर]] तक रेलवे लाइन बिछवाने हेतु ईटों की आपूर्ति हेतु इन खण्डहरों की खुदाई प्रारम्भ करवायी।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[सिंधु घाटी सभ्यता]]
  
 
{किस [[फ़सल|फ़सल]] का ज्ञान [[वैदिक काल]] के लोगों को नहीं था?
 
{किस [[फ़सल|फ़सल]] का ज्ञान [[वैदिक काल]] के लोगों को नहीं था?
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-[[चावल]]
 
-[[चावल]]
 
+[[तम्बाकू]]
 
+[[तम्बाकू]]
 
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||[[चित्र:Tobacc-Plant.jpg|right|border|80px|तम्बाकू]]'तम्बाकू' पौधे की पत्तियों से प्राप्त होता है। यह एक मादक और उत्तेजक पदार्थ है, जो 'निकोशियाना' जाति के पौधे की बारीक कटी हुई पत्तियों, जो कि खाने-पीने तथा सूँघने के काम आती हैं, से प्राप्त किया जाता है। किसी अन्य मादक या उत्तेजक पदार्थ की अपेक्षा [[तम्बाकू]] का प्रयोग आज सबसे अधिक मात्रा में किया जा रहा है। [[भारत]] में तम्बाकू का पौधा [[पुर्तग़ाली|पुर्तग़ालियों]] द्वारा सन 1608 ई. में लाया गया था और तब से इसकी खेती का क्षेत्र भारत के लगभग सभी भागों में फैल गया है। भारत विश्व के उत्पादन का लगभग 7.8 प्रतिशत तम्बाकू उत्पन्न करता है।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[तम्बाकू]]
{[[भक्ति आंदोलन]] को [[दक्षिण भारत]] से लाकर [[उत्तर भारत]] तक प्राचारित करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
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-[[शंकराचार्य]]
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-[[रामानुज]]
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+[[रामानन्द]]
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-[[कबीर]]
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{किस [[जैन]] आचार्य को [[अकबर|बादशाह अकबर]] ने बहुत सम्मानित किया था?
 
{किस [[जैन]] आचार्य को [[अकबर|बादशाह अकबर]] ने बहुत सम्मानित किया था?
 
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-चंद्रप्रभा सूरी
 
-चंद्रप्रभा सूरी
+हरिविजय सूरी
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+[[हरिविजय सूरी]]
 
-[[पुष्पदन्त]]
 
-[[पुष्पदन्त]]
 
-यशोभद्र
 
-यशोभद्र
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{[[भक्ति आंदोलन]] को [[दक्षिण भारत]] से लाकर [[उत्तर भारत]] तक प्राचारित करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
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-[[शंकराचार्य]]
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-[[रामानुज]]
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+[[स्वामी रामानंद|रामानन्द]]
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-[[कबीर]]
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||[[चित्र:Swami-Ramanand.jpg|right|border|80px|स्वामी रामानंद]]'रामानंद' का जन्म 1299 ई. में [[प्रयाग]] में हुआ था। इनके विचारों पर गुरु राघवानंद के [[विशिष्टाद्वैतवाद|विशिष्टाद्वैतमत]] का अधिक प्रभाव पड़ा। अपने मत के प्रचार के लिए इन्होंने [[भारत]] के विभिन्न तीर्थों की यात्रा कीं। तीर्थाटन से लौटने पर अनेक गुरु-भाइयों ने यह कहकर [[स्वामी रामानंद]] के साथ भोजन करने से इंकार कर दिया कि इन्होंने तीर्थाटन में छुआछूत का विचार नहीं किया होगा। इस पर रामानंद ने अपने शिष्यों को नया संप्रदाय चलाने की सलाह दी।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[स्वामी रामानंद]]
 
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samany gyan prashnottari
hindi    bhoogol    krishi    itihas    vigyan    arthashastr    samajashastr    shiksha    rajavyavastha    kampyootar    kala    rajaniti    chitr    mahabharat    ramayan    sharirik shiksha    nagarik shastr    khel    tarkik   fasabuk paheli
rajyon ke samany gyan


is vishay se snbndhit lekh padhen:- itihas prangan, itihas kosh, aitihasik sthan kosh

panne par jaen

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1. charbi vale karatooson ka prayog karane se sarvapratham kisane inkar kiya?

mngal pande
shivaram rajaguru
baba harabhajan sinh
basnt kumar das
mngal pande
'mngal pande' ka nam 'bharatiy svadhinata sngram' men agrani yoddhaon ke roop men liya jata hai, jinake dvara bhadakaee gee kranti ki jvala se angrez eest indiya knpani ka shasan buri tarah hil gaya tha. mngal pande ki shahadat ne bharat men pahali kranti ke bij boe the. angrezi sena men nayi enafild bndook bharane ke liye karatoos ko danton se kat kar kholana padata tha aur usame bhare hue barood ko bndook ki nali men bhar kar karatoos men dalana padata tha. karatoos ke bahari avaran men charbi hoti thi, jo ki use nami arthath pani ki silan se bachati thi. sipahiyon ke bich afavah fail chuki thi ki karatoos men lagi huee charbi suar aur gay ke mans se banayi jati hai.dhyan denadhik janakari ke lie dekhen:-mngal pande

2. sindhu ghati ki sabhyata kahan tak vistrit thi?

pnjab, dilli, jammoo aur kashmir
rajasthan, bihar, bngal, udisa
pnjab, rajasthan, gujarat, udisa, bngal
pnjab, rajasthan, gujarat, uttar pradesh, hariyana, sindh, baloochistan
sindh men mohanajodado men hadappa snskriti ke avashesh
'sindhu ghati sabhyata' vishv ki prachin nadi ghati sabhyataon men se ek pramukh sabhyata thi. yah hadappa sabhyata aur sindhu-sarasvati sabhyata ke nam se bhi jani jati hai. aj se lagabhag 80 varsh poorv pakistan ke pashchimi pnjab prant ke mantagomari zile men sthit hariyana ke nivasiyon ko shayad is bat ka kinchitmatr bhi abhas nahin tha ki ve apane as-pas ki zamin men dabi jin eeton ka prayog itane dhadalle se apane makanon ke nirman men kar rahe hain, vah koee sadharan eeten nahin, balki lagabhag 5,000 varsh purani aur poori tarah vikasit sabhyata ke avashesh hain. isaka abhas unhen tab hua jab 1856 ee. men jaaun viliyam brantam ne karachi se lahaur tak relave lain bichhavane hetu eeton ki apoorti hetu in khandaharon ki khudaee prarambh karavayi.dhyan denadhik janakari ke lie dekhen:-sindhu ghati sabhyata

3. kis fasal ka gyan vaidik kal ke logon ko nahin tha?

jau
gehoon
chaval
tambakoo
tambakoo
'tambakoo' paudhe ki pattiyon se prapt hota hai. yah ek madak aur uttejak padarth hai, jo 'nikoshiyana' jati ke paudhe ki barik kati huee pattiyon, jo ki khane-pine tatha soonghane ke kam ati hain, se prapt kiya jata hai. kisi any madak ya uttejak padarth ki apeksha tambakoo ka prayog aj sabase adhik matra men kiya ja raha hai. bharat men tambakoo ka paudha purtagaliyon dvara san 1608 ee. men laya gaya tha aur tab se isaki kheti ka kshetr bharat ke lagabhag sabhi bhagon men phail gaya hai. bharat vishv ke utpadan ka lagabhag 7.8 pratishat tambakoo utpann karata hai.dhyan denadhik janakari ke lie dekhen:-tambakoo

4. kis jain achary ko badashah akabar ne bahut sammanit kiya tha?

chndraprabha soori
harivijay soori
pushpadant
yashobhadr

5. bhakti andolan ko dakshin bharat se lakar uttar bharat tak pracharit karane ka shrey kise diya jata hai?

shnkarachary
ramanuj
ramanand
kabir
svami ramannd
'ramannd' ka janm 1299 ee. men prayag men hua tha. inake vicharon par guru raghavannd ke vishishtadvaitamat ka adhik prabhav pada. apane mat ke prachar ke lie inhonne bharat ke vibhinn tirthon ki yatra kin. tirthatan se lautane par anek guru-bhaiyon ne yah kahakar svami ramannd ke sath bhojan karane se inkar kar diya ki inhonne tirthatan men chhuachhoot ka vichar nahin kiya hoga. is par ramannd ne apane shishyon ko naya snpraday chalane ki salah di.dhyan denadhik janakari ke lie dekhen:-svami ramannd

apake kul ank hai 0 / 0

panne par jaen

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samany gyan prashnottari
hindi    bhoogol    krishi    itihas    vigyan    arthashastr    samajashastr    shiksha    rajavyavastha    kampyootar    kala    rajaniti    chitr    mahabharat    ramayan    sharirik shiksha    nagarik shastr    khel    tarkik   fasabuk paheli
rajyon ke samany gyan