उनवास उदयपुर: Difference between revisions
Jump to navigation
Jump to search
[unchecked revision] | [unchecked revision] |
कविता भाटिया (talk | contribs) No edit summary |
व्यवस्थापन (talk | contribs) m (Text replacement - " जगत " to " जगत् ") |
||
Line 2: | Line 2: | ||
|चित्र=Blank-Image-2.jpg | |चित्र=Blank-Image-2.jpg | ||
|चित्र का नाम= | |चित्र का नाम= | ||
|विवरण=उनवास''' [[राजस्थान]] के [[उदयपुर]] शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं [[सदी]] में निर्मित यह मंदिर | |विवरण=उनवास''' [[राजस्थान]] के [[उदयपुर]] शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं [[सदी]] में निर्मित यह मंदिर जगत् के अम्बिका मंदिर का समकालीन है | ||
|शीर्षक 1=राज्य | |शीर्षक 1=राज्य | ||
|पाठ 1=[[राजस्थान]] | |पाठ 1=[[राजस्थान]] | ||
Line 30: | Line 30: | ||
'''उनवास''' [[राजस्थान]] के [[उदयपुर]] शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं [[सदी]] में निर्मित यह मंदिर | '''उनवास''' [[राजस्थान]] के [[उदयपुर]] शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं [[सदी]] में निर्मित यह मंदिर जगत् के अम्बिका मंदिर का समकालीन है तथा यह एक गुहिल शासक अल्लट के राज्यकाल में निर्मित हुआ था। इस मंदिर की गणना मातृपूजा परंपरा के अंतर्गत बने [[झालरापाटन]] तथा जगत् के मंदिर समूहों में की जाती है, जहाँ पर एकान्तिक रूप से शक्ति के किसी रूप की ही अर्चना की जाती थी। इसमें [[दुर्गा|दुर्गा देवी]] के महिषमर्दिनी स्वरूप को शांत व वरद रूप की दिव्यता को प्रस्तुत किया गया है। [[मूर्तिकला]] की अपेक्षा [[वास्तुकला]] के अभिप्रायों के विकास के अध्ययन के लिए उनवास का मंदिर अधिक महत्त्वपूर्ण है। मंदिर की पीठिका के अलंकरणात्मक अभिप्रायों का इस मंदिर में अभाव है। | ||
{{लेख प्रगति | {{लेख प्रगति |
Latest revision as of 13:54, 30 June 2017
उनवास उदयपुर
| |
विवरण | उनवास राजस्थान के उदयपुर शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं सदी में निर्मित यह मंदिर जगत् के अम्बिका मंदिर का समकालीन है |
राज्य | राजस्थान |
ज़िला | उदयपुर |
निर्माण काल | 10वीं सदी |
समर्पित देवी | दुर्गा देवी |
स्थिति | राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर उदयपुर से 23 कि.मी. की दूरी पर स्थित। |
संबंधित लेख | राजस्थान, उदयपुर, मेवाड़, मेवाड़ का इतिहास, मेवाड़ (आज़ादी से पूर्व) |
उनवास राजस्थान के उदयपुर शाहर में स्थित एक मंदिर है। 10वीं सदी में निर्मित यह मंदिर जगत् के अम्बिका मंदिर का समकालीन है तथा यह एक गुहिल शासक अल्लट के राज्यकाल में निर्मित हुआ था। इस मंदिर की गणना मातृपूजा परंपरा के अंतर्गत बने झालरापाटन तथा जगत् के मंदिर समूहों में की जाती है, जहाँ पर एकान्तिक रूप से शक्ति के किसी रूप की ही अर्चना की जाती थी। इसमें दुर्गा देवी के महिषमर्दिनी स्वरूप को शांत व वरद रूप की दिव्यता को प्रस्तुत किया गया है। मूर्तिकला की अपेक्षा वास्तुकला के अभिप्रायों के विकास के अध्ययन के लिए उनवास का मंदिर अधिक महत्त्वपूर्ण है। मंदिर की पीठिका के अलंकरणात्मक अभिप्रायों का इस मंदिर में अभाव है।
|
|
|
|
|