कहरानामा -जायसी

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Revision as of 13:12, 14 October 2011 by कात्या सिंह (talk | contribs) (कहरानामा का नाम बदलकर कहरानामा -जायसी कर दिया गया है)
Jump to navigation Jump to search
  • कहरानामा का रचना काल 947 हिजरी बताया गया है।
  • यह काव्य ग्रंथ 'कहरवा' या 'कहार गीत' उत्तर प्रदेश की एक लोक - गीत पर आधारित है। कहरानामा में कवि ने संसार से डोली जाने की बात की है।

या भिनुसारा चलै कहारा होतहि पाछिल पहारे। सबद सुनावा सखियन्ह माना, हंस के बोला मारा रे।।

  • जायसी ने हिन्दी में 'कहारा लोक धुन' के आधार पर इस ग्रंथ की रचना करके स्वयं को गाँव के लोक जीवन एवं सामाजिक सौहार्द बनाने का प्रयत्न किया है।
  • कहरानामा में कहरा का अर्थ कहर, कष्ट, दुख या कहा और गीत विशेष है। हमारे देश भारत में ब्रह्मा का गुणगान करना, आत्मा और परमात्मा के प्रेम परक गीत गाना की अत्यंत प्राचीन लोक परंपरा है।[1]
  • इनके अतिरिक्त 'महरी बाईसी' तथा 'मसलानामा' भी आपकी ही रचनाएँ मानी जाती हैं परन्तु जायसी की प्रसिद्धि का आधार तो 'पद्मावत' महाकाव्य ही है।



पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कविता कोश (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल)। । अभिगमन तिथि: 16 अक्टूबर, 2010

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः