संस्कृति के चार अध्याय -रामधारी सिंह दिनकर

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संस्कृति के चार अध्याय राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक बहुचर्चित पुस्तक है जिसे साहित्य अकादमी ने सन् 1956 में न केवल पहली बार प्रकाशित किया अपितु आगे चलकर उसे पुरस्कृत भी किया। इस पुस्तक में दिनकर जी ने भारत के संस्कृतिक इतिहास को चार भागों में बाँटकर उसे लिखने का प्रयत्न किया है। वे यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारत का आधुनिक साहित्य प्राचीन साहित्य से किन-किन बातों में भिन्न है और इस भिन्नता का कारण क्या है ? उनका विश्वास है कि भारतीय संस्कृति में चार बड़ी क्रान्तियाँ हुई हैं और हमारी संस्कृति का इतिहास उन्हीं चार क्रान्तियों का इतिहास है।

भूमिका

इस पुस्तक की भूमिका पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखी थी। दिनकर जी की मान्यता है कि भारतीय संस्कृति के निर्माण में आर्य एवं द्रविड़ भाषा परिवार के लोगों के साथ-साथ मध्यकालीन मुस्लिम संस्कृति एवं आधुनिक अंग्रेज़ी संस्कृति का भी महत्वपूर्ण योगदान है। आर्य, द्रविड़, मुस्लिम और अंग्रेज़ी प्रभाव को दिनकर जी भारतीय संस्कृति के चार अध्याय मानते हैं। उनकी उपरोक्त मान्यता नेहरू जी की 'भारत की खोज' अथवा डिस्कवरी ऑफ इंडिया से प्रभावित मानी जाती है। प्रस्तुत लेख में भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा की गई है। ये विशेषतायें दिनकर जी की उर्वशी, रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र और संस्कृति के चार अध्याय के अध्ययन के आधार पर विकसित की गई है।[1]</poem>

लेखक का निवेदन

भारत की संस्कृति, आरम्भ से ही, सामासिक रही है। उत्तर-दक्षिण पूर्व पश्चिम देश में जहां भी जो हिन्दू बसते है। उनकी संस्कृति एक है एवं भारत की प्रत्येक क्षेत्रीय विशेषता हमारी इसी सामासिक संस्कृति की विशेषता है। तब हिन्दू एवं मुसलमान हैं, जो देखने में अब भी दो लगते हैं। किन्तु उनके बीच भी सांस्कृतिक एकता विद्यमान है जो उनकी भिन्नता को कम करती है। दुर्भाग्य की बात है कि हम इस एकता को पूर्ण रूप से समझने में समर्थ रहे है। यह कार्य राजनीति नहीं, शिक्षा और साहित्य के द्वारा सम्पन्न किया जाना चाहिए। इस दिशा में साहित्य के भीतर कितने ही छोटे-बड़े प्रयत्न हो चुके है। वर्तमान पुस्तक भी उसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है।[2]</poem>


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. शर्मा, डॉ. अमित कुमार। भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता (हिंदी) ब्रांड बिहार डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 23 सितम्बर, 2013।
  2. संस्कृति के चार अध्याय (हिंदी) भारतीय साहित्य संग्रह। अभिगमन तिथि: 23 सितम्बर, 2013।

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