नीमच: Difference between revisions
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*1857 के महान् विद्रोह में नीमच छावनी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और यह मालवा में उपद्रव का केन्द्र था। | *1857 के महान् विद्रोह में नीमच छावनी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और यह मालवा में उपद्रव का केन्द्र था। | ||
*नीमच के दर्शनीय स्थलों में भादवा माता का मंदिर है, जिसमें [[शैलपुत्री]], [[ब्रह्मचारिणी]], [[चंद्रघंटा तृतीय|चंद्रघटा]], [[काली]], [[स्कन्दमाता]], और [[कात्यायनी]] माता की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। | *नीमच के दर्शनीय स्थलों में [[भादवा माता मंदिर|भादवा माता का मंदिर]] है, जिसमें [[शैलपुत्री]], [[ब्रह्मचारिणी]], [[चंद्रघंटा तृतीय|चंद्रघटा]], [[काली]], [[स्कन्दमाता]], और [[कात्यायनी]] माता की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। | ||
*इस मंदिर में काले पत्थर से निर्मित [[विष्णु]] की प्रतिमा भी है। | *इस मंदिर में काले पत्थर से निर्मित [[विष्णु]] की प्रतिमा भी है। | ||
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चित्र:Icon-edit.gif | इस लेख का पुनरीक्षण एवं सम्पादन होना आवश्यक है। आप इसमें सहायता कर सकते हैं। "सुझाव" |
thumb|250px|नव तोरण मंदिर, नीमच नीमच मध्य प्रदेश राज्य के मंदसौर ज़िले के पास 500 मीटर की ऊँचाई पर बंजर बैसाल्ट पर्वत चौटी पर स्थित है।
- ग्वालियर रियासत की पूर्व ब्रिटिश छावनी रहा यह नगर 1822 में संयुक्त राजपूताना-मालवा राजनीतिक एजेंसी का और 1895 में मालवा एजेंसी का मुख्यालय बना।
- नीमच के पास बारूखेड़ा है, जहाँ विशाल पत्थरों से निर्मित आकर्षक धर्मस्थल है।
- नीमच के समीप ही प्राचीन बालसहर गाँव में कई जैन मन्दिर हैं।
- नीमच अजमेर सूबे की सरकार (ज़िला) का एक महल था।
- यह मूलतः उदयपुर राज्य का हिस्सा था और 1768 ई. में मेवाड़ के राणा द्वारा लिए गए कर्ज़ की अदायगी के रूप में सिंधिया शासकों को दे दिया गया।
- उसके बाद से यह ग्वालियर राज्य का हिस्सा रहा।
- 1799 ई. और 1844 ई. में कुछ समय के लिए यह इससे अलग रहा।
- 1857 के महान् विद्रोह में नीमच छावनी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और यह मालवा में उपद्रव का केन्द्र था।
- नीमच के दर्शनीय स्थलों में भादवा माता का मंदिर है, जिसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघटा, काली, स्कन्दमाता, और कात्यायनी माता की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।
- इस मंदिर में काले पत्थर से निर्मित विष्णु की प्रतिमा भी है।
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