कटनि

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search

कटनि - (काव्य प्रयोग, पुरानी हिन्दी) संज्ञा स्त्रीलिंग (हिन्दी कटना)[1]

  • काट।

उदाहरण-

करत जात जेती कटनि बढ़ि रस सरिता सोत। आलबाल उर प्रेम तरू तितो तितो दृढ़ होत। - कवि बिहारी

  • प्रीति। आसक्ति। रीझन।

उदाहरण-

फिरत जो अटकत कटनि बिन रसिक सुरसन खियाल्। अनत अनत नित नित हितनि कत सकुचावत लाल। - कवि बिहारी

कटनी - संज्ञा स्त्रीलिंग (हिन्दी कटना)

  • काटने का औज़ार।
  • काटने का काम। फ़सल की कटाई का काम।

उदाहरण-

काटनी के घूँघुर रुनझुन। - वीणा

क्रिया प्रयोग- करना। पड़ना। होना।

मुहावरा- 'कटनी मारना' = वैशाख ज्येष्ठ में अर्थात जोतने के पहले कुदाल से खेतों की घास खोदना।

  • एक ओर से भागकर दूसरी ओर और फिर उधर से मुड़कर किसी ओर, इसी प्रकार आड़े-तिरछे भागना। कटनी।

क्रिया प्रयोग- काटना। मारना।

मुहावरा- 'कटनी काटना' = इधर से उधर और उधर से इधर भागना। दाहिने से बाईं और बाईं से दाहिने ओर भागना।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिंदी शब्दसागर, द्वितीय भाग |लेखक: श्यामसुंदरदास बी. ए. |प्रकाशक: नागरी मुद्रण, वाराणसी |पृष्ठ संख्या: 748 |

संबंधित लेख


वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः