Difference between revisions of "मैथिली भाषा"

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पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में [[देवनागरी लिपि|देवनागरी]] का प्रयोग होने लगा ।
 
पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में [[देवनागरी लिपि|देवनागरी]] का प्रयोग होने लगा ।
 
==विकास==
 
==विकास==
प्राचीन मैथिली के विकास का शुरूआती दौर प्राकृत और अपभ्रंश के विकास से जोड़ा जाता है। लगभग 700 ई. के आसपास इसमें रचनाएं की जाने लगी। विद्यापति मैथिली के आदिकवि तथा सर्वाधिक ज्ञात कवि हैं। विद्यापति ने मैथिली के अतिरिक्त संस्कृत तथा अवहट्ट में भी रचनाएं लिखीं। ये वह दो प्रमुख भाषाएं हैं जहाँ से मैथिली का विकास हुआ। लगभग 1 से 1.2 करोड़ लोग मैथिली को मातृ-भाषा के रुप में प्रयोग करते हैं और इसके प्रयोगकर्ता [[भारत]] के विभिन्न हिस्सों सहित विश्व के कई देशों मे फैले हैं।
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प्राचीन मैथिली के विकास का शुरूआती दौर प्राकृत और अपभ्रंश के विकास से जोड़ा जाता है। लगभग 700 ई. के आसपास इसमें रचनाएं की जाने लगी। विद्यापति मैथिली के आदिकवि तथा सर्वाधिक ज्ञात कवि हैं। विद्यापति ने मैथिली के अतिरिक्त संस्कृत तथा अवहट्ट में भी रचनाएं लिखीं। ये वह दो प्रमुख भाषाएं हैं जहाँ से मैथिली का विकास हुआ। लगभग 1 से 1.2 करोड़ लोग मैथिली को मातृ-भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं और इसके प्रयोगकर्ता [[भारत]] के विभिन्न हिस्सों सहित विश्व के कई देशों मे फैले हैं।
  
 
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Revision as of 11:34, 11 January 2011

maithili mukhy roop se bharat mean uttari bihar aur nepal ke taraee ke eelaqoan me boli jane vali bhasha hai. yah prachin bhasha hind ary parivar ki sadasy hai aur bhashaee taur par hindi,(jisase isaki lagabhag 65 pratishat shabdavali ati hai), baangla, asamiya, u diya aur nepali se isaka kafi nikat ka sanbandh hai.

lipi

pahale ise mithilakshar tatha kaithi lipi mean likha jata tha jo baangla aur asamiya lipiyoan se milati thi par kalantar mean devanagari ka prayog hone laga .

vikas

prachin maithili ke vikas ka shurooati daur prakrit aur apabhransh ke vikas se jo da jata hai. lagabhag 700 ee. ke asapas isamean rachanaean ki jane lagi. vidyapati maithili ke adikavi tatha sarvadhik jnat kavi haian. vidyapati ne maithili ke atirikt sanskrit tatha avahatt mean bhi rachanaean likhian. ye vah do pramukh bhashaean haian jahaan se maithili ka vikas hua. lagabhag 1 se 1.2 karo d log maithili ko matri-bhasha ke roop mean prayog karate haian aur isake prayogakarta bharat ke vibhinn hissoan sahit vishv ke kee deshoan me phaile haian.

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panne ki pragati avastha
adhar
prarambhik
madhyamik
poornata
shodh

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sanbandhit lekh

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