बसंत (i) -नज़ीर अकबराबादी: Difference between revisions
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जब देखिए बसंत तो कैसी बसंत हो ॥ | जब देखिए बसंत तो कैसी बसंत हो ॥ | ||
मैदां हो सब्ज | मैदां हो सब्ज साफ़ चमकती भी रेत हो। | ||
साकी भी अपने जाम सुराही समेत हो। | साकी भी अपने जाम सुराही समेत हो। | ||
कोई नशे में मस्त हो कोई सचेत हो। | कोई नशे में मस्त हो कोई सचेत हो। |
Latest revision as of 14:12, 29 January 2013
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आलम में जब बहार की आकर लगंत हो। |
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