ऋग्वेद के अनमोल वचन: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search
[unchecked revision][unchecked revision]
('<div style="float:right; width:98%; border:thin solid #aaaaaa; margin:10px"> {| width="98%" class="bharattable-purple" style="float:ri...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
m (Text replacement - " दुख " to " दु:ख ")
 
Line 8: Line 8:
|-
|-
|
|
* अविचारशील मनुष्य दुख को प्राप्त होते हैं।   
* अविचारशील मनुष्य दु:ख को प्राप्त होते हैं।   
* हे परमेश्वर, हमारे मन को शुभ संकल्प वाला बनाओ। हमें सुखदायी बल और कर्मशक्ति प्रदान करो।   
* हे परमेश्वर, हमारे मन को शुभ संकल्प वाला बनाओ। हमें सुखदायी बल और कर्मशक्ति प्रदान करो।   
* हम देवों की शुभ मति के अधीन रहें।   
* हम देवों की शुभ मति के अधीन रहें।   

Latest revision as of 14:02, 2 June 2017

ऋग्वेद के अनमोल वचन
  • अविचारशील मनुष्य दु:ख को प्राप्त होते हैं।
  • हे परमेश्वर, हमारे मन को शुभ संकल्प वाला बनाओ। हमें सुखदायी बल और कर्मशक्ति प्रदान करो।
  • हम देवों की शुभ मति के अधीन रहें।
  • जैसे रथ का पहिया इधर-उधर नीचे-ऊपर घूमता रहता है, वैसे ही धन भी विभिन्न व्यक्तियों के पास आता-जाता रहता है, वह कभी एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता।
  • देते हुए पुरुषों का धन क्षीण नहीं होता। दान न देने वाले पुरुष को अपने प्रति दया करने वाला नहीं मिलता।
  • सब लोग हृदय के दृढ़ संकल्प से श्रद्धा की उपासना करते हैं, क्योंकि श्रद्धा से ही ऐश्वर्य प्राप्त होता है।
  • हे शक्तिशाली मार्गदर्शक तेरी रक्षण शक्ति और बहु-विधि ज्ञान-शक्ति से तू हमें उत्तम शिक्षा दे। हमें अवगुण, क्षुधा और व्याधि से मुक्त कर।
  • परमेश्वर विद्वानों की संगति से प्राप्त होता है।
  • हमारी बुद्धियां विविध प्रकार की हैं। मनुष्य के कर्म भी विविध प्रकार के हैं।
  • देवता श्रम करने वाले के अतिरिक्त किसी और से मित्रता नहीं करते हैं।
  • जो श्रम नहीं करता, देवता उसके साथ मैत्री नहीं करते।


  1. REDIRECTसाँचा:इन्हें भी देखें



टीका टिप्पणी और संदर्भ


संबंधित लेख