स्नेह दीप -दिनेश सिंह: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
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देख पाते कुछ पल ये नैन  
देख पाते कुछ पल ये नैन  
हुयी ओझल वो कर पद चाप
हुई ओझल वो कर पद चाप
दिखाकर तिरछे अपने गात  
दिखाकर तिरछे अपने गात  
हिला ज्यों मंद पवन में पात  
हिला ज्यों मंद पवन में पात  

Latest revision as of 07:41, 7 November 2017

चित्र:Icon-edit.gif यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है भारतकोश का नहीं।

गयी भर हृदय कोई झंकार
कली ज्यो अस्फुट त्यों थे गात
नयन यूँ चंचल ज्यों द्युतिमान
तेज मुख पर उर्वशी सामान

देख पाते कुछ पल ये नैन
हुई ओझल वो कर पद चाप
दिखाकर तिरछे अपने गात
हिला ज्यों मंद पवन में पात

अधर में यूँ मधुरिम मुस्कान
खिला ज्यों मुकुलों का मधुमास
पगो के नूपुर की रुनझुन
जलद से गिरे बूंद ज्यों धुन

खुले थे अनुपम केश कलाप
छायी हो ज्यों बदली आकाश
तरुण सुन्दरता-ज्यों जलजात
हुआ मन पल भर को अज्ञात

थे फैले तिछर्न नयन के जाल
गयी अविस्मित चितवन डाल
गूंथता ये मन सौरभ हार
कौन भर गयी हृदय झंकार

मेरे मानस का ये अंतरिछ
अभी सूना था कुछ पल पूर्व
एकाएक कौतूहल ये बोल
बोलने लगे जलद पट खोल

मेरे मन भावों का आकाश
उड़ा कैसे ये नही याख्यान
सहज भावो से वो सुकुमारि
हर लिया कैसे था अनजान

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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