नन्दोत्सव

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Revision as of 12:26, 5 September 2010 by व्यवस्थापन (talk | contribs) (Text replace - ":पर्व और त्योहार]]" to ":पर्व और त्योहार]] Category:व्रत और उत्सव")
Jump to navigation Jump to search

उत्सव

अर्धरात्रि में श्री कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में होने के वाद उनके पिता वसुदेव कंस के भय से बालक को रात्रि में ही यमुना नदी पार कर नन्द बाबा के यहां गोकुल में छोड़ आये थे। इसीलिए कृष्ण जन्म के दूसरे दिन गोकुल में 'नन्दोत्सव' मनाया जाता है। भाद्रपद नवमी के दिन समस्त ब्रजमंड़ल में नन्दोत्सव की धूम रहती है।

दधिकांदों

यह उत्सव 'दधिकांदों' के रूप मनाया जाता है। 'दधिकांदो' का अर्थ है दही की कीच। हल्दी मिश्रित दही फेंकने की परम्परा आज भी निभाई जाती है। मंदिर के पुजारी नन्द बाबा और जसोदा के वेष में भगवान कृष्ण को पालने को झुलाते हैं। मिठाई, फल, मेवा व मिश्री लुटायी जाती है। श्रद्धालु इस प्रसाद को पाकर अपने आपको धन्य मानते हैं।

श्री रंगनाथ मंदिर में

वृंदावन में उत्तर भारत के विशाल श्री रंगनाथ मंदिर में ब्रज के नायक भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के दूसरे दिन नन्दोत्सव की धूम रहती है। नन्दोत्सव में सुप्रसिद्ध 'लठ्ठे के मेले' का आयोजन किया जाता है। धार्मिक नगरी वृंदावन में श्री कृष्ण जन्माष्टमी जगह-जगह मनाई जाती है। उत्तर भारत के सबसे विशाल मंदिर में नन्दोत्सव की निराली छटा देखने को मिलती है। दक्षिण भारतीय शैली में बना प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में नन्दोत्सव के दिन श्रद्धालु लठ्ठा के मेला की एक झलक पाने को खड़े होकर देखते रहते हैं। जब भगवान 'रंगनाथ' रथ पर विराजमान होकर मंदिर के पश्चिमी द्वार पर आते हैं तो लठ्ठे पर चढ़ने वाले पहलवान भगवान रंगनाथ को दण्डवत कर विजयश्री का आर्शीवाद लेते हैं और लठ्ठे पर चढ़ना प्रारम्भ करते हैं। 35 फुट ऊंचे लठ्ठे पर जब पहलवान चढ़ना शुरू करते हैं उसी समय मचान के ऊपर से कई मन तेल और पानी की धार अन्य ग्वाल-वाल लठ्ठे पर गिराते हैं, जिससे पहलवान फिसलकर नीचे जमीन पर आ गिरते हैं। इसको देखकर श्रद्धालुओं में रोमांच की अनुभूति होती है। भगवान का आर्शीवाद लेकर ग्वाल-वाल पहलवान पुन: एक दूसरे को सहारा देकर लठ्ठे पर चढ़ने का प्रयास करते है और तेज पानी की धार और तेल की धार के बीच पूरे यत्न के साथ ऊपर की ओर चढ़ने लगते हैं। कई घंटे की मेहनत के बाद आख़िर ग्वाल-वालों को भगवान के आर्शीवाद से लठ्ठे पर चढ़कर जीत प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इस रोमांचक मेले को देखकर देश-विदेश के श्रद्धालु श्रृद्धा से अभिभूत हो जाते हैं। ग्वाल-वाल खम्भे पर चढ़कर नारियल, लोटा, अमरूद, केला, फल मेवा व पैसे लूटने लगते हैं। इसी प्रकार वृंदावन में ही नहीं भारत के अन्य भागों में भी भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर नन्दोत्सव मनाया जाता है।

सम्बंधित लिंक

Template:साँचा:पर्व और त्योहार

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः