शनिवार व्रत: Difference between revisions
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*स्मृतिकौस्तुभ<ref>स्मृतिकौस्तुभ 555-56</ref> में [[स्कन्द पुराण]] से उद्धृत शनैश्चर का स्तोत्र है। | *स्मृतिकौस्तुभ<ref>स्मृतिकौस्तुभ 555-56</ref> में [[स्कन्द पुराण]] से उद्धृत शनैश्चर का स्तोत्र है। | ||
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Latest revision as of 10:48, 21 March 2011
- भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
- श्रावण के प्रत्येक शनिवार को शनि की लौहप्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराना, पुष्पों, फलों आदि का दान एवं शनि के नामों का उच्चारण, यथा–कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्र, अन्तक, यम, सौरि (सूर्य का पुत्र), शनैश्चर, मन्द (शनि की मंद गति का द्योतक) करना चाहिए।
- श्रावण के चार शनिवारों के नैवेद्य हैं–चावल एवं उर्द एक साथ पकाया हुआ, पायस, अम्बिली (चावल के आटे एवं मक्खन वाले दूध से बनी लप्सी) एवं पूरिका (गेहूँ की रोटी)।
- स्मृतिकौस्तुभ[1] में स्कन्द पुराण से उद्धृत शनैश्चर का स्तोत्र है।
टीका टिप्पणी और संदर्भ
- ↑ स्मृतिकौस्तुभ 555-56
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