बीटिंग द रिट्रीट: Difference between revisions
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'''बीटिंग द रिट्रीट''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Beating The Retreat'') [[भारत]] में [[गणतंत्र दिवस]] के अवसर पर हुए आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन की घोषणा है। इस कार्यक्रम में [[थल सेना]], [[वायु सेना]] और [[नौसेना]] के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। यह सेना की बैरक वापसी का प्रतीक है। सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को [[26 जनवरी]] से [[29 जनवरी]] के बीच रोशनी से सुंदरतापूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष [[29 जनवरी]] की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा 'एबाइडिड विद मी' (यह [[महात्मा गाँधी]] की प्रिय धुनों में से एक कही जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्टर [[राष्ट्रपति]] के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि 'समापन समारोह' पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन '''सारे जहाँ से अच्छा''' बजाते हैं। ठीक शाम 6 बजे 'बगलर्स रिट्रीट' की धुन बजाते हैं और [[राष्ट्रीय ध्वज]] को उतार लिया जाता है तथा [[राष्ट्रगान]] गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।<ref>{{cite web |url=http://aviratyatra26jan.blogspot.in/2009/01/blog-post.html |title=गणतंत्र दिवस परेड का सीधा प्रसारण |accessmonthday=30 जनवरी |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=अविरत यात्रा: जन-गण-मन |language=हिन्दी}}</ref>[[चित्र:Beating Retreat-flag.jpg|thumb|left|'बीटिंग द रिट्रीट' के अवसर पर [[राष्ट्रीय ध्वज]] को उतारते हुए]] | '''बीटिंग द रिट्रीट''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Beating The Retreat'') [[भारत]] में [[गणतंत्र दिवस]] के अवसर पर हुए आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन की घोषणा है। इस कार्यक्रम में [[थल सेना]], [[वायु सेना]] और [[नौसेना]] के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। यह सेना की बैरक वापसी का प्रतीक है। सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को [[26 जनवरी]] से [[29 जनवरी]] के बीच रोशनी से सुंदरतापूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष [[29 जनवरी]] की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा 'एबाइडिड विद मी' (यह [[महात्मा गाँधी]] की प्रिय धुनों में से एक कही जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्टर [[राष्ट्रपति]] के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि 'समापन समारोह' पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन '''सारे जहाँ से अच्छा''' बजाते हैं। ठीक शाम 6 बजे 'बगलर्स रिट्रीट' की धुन बजाते हैं और [[राष्ट्रीय ध्वज]] को उतार लिया जाता है तथा [[राष्ट्रगान]] गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।<ref>{{cite web |url=http://aviratyatra26jan.blogspot.in/2009/01/blog-post.html |title=गणतंत्र दिवस परेड का सीधा प्रसारण |accessmonthday=30 जनवरी |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=अविरत यात्रा: जन-गण-मन |language=हिन्दी}}</ref>[[चित्र:Beating Retreat-flag.jpg|thumb|left|'बीटिंग द रिट्रीट' के अवसर पर [[राष्ट्रीय ध्वज]] को उतारते हुए]] | ||
==क्या है बीटिंग रिट्रीट== | ==क्या है बीटिंग रिट्रीट== | ||
'बीटिंग रिट्रीट' सोलहवीं सदी के [[ब्रिटेन]] की परंपरा है। 'बीटिंग | 'बीटिंग रिट्रीट' सोलहवीं सदी के [[ब्रिटेन]] की परंपरा है। 'बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी' का असली नाम 'वॉच सेटिंग' है और [[सूर्य]] डूबने के समय यह समारोह होता है। [[18 जून]], 1690 में इंग्लैंड के राजा जेम्स टू ने अपनी सेनाओं को उनके ट्रूप्स के वापस आने पर ड्रम बजाने का आदेश दिया था। सन 1694 में विलियम थर्ड ने रेजीमेंट के कैप्टन को ट्रूप्स के वापस आने पर गलियों में ड्रम बजाकर उनका स्वागत करने का नया आदेश जारी किया।<ref name="aa">{{cite web |url=http://hindi.oneindia.com/news/features/what-is-beating-retreat-ceremony-and-its-importance-for-india/slider-pf63726-396195.html |title=जानिए 26 जनवरी के बाद होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का महत्व |accessmonthday=31 जनवरी |accessyear=2017 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=hindi.oneindia.com |language=हिन्दी}}</ref> लेकिन [[भारत]] में यह समारोह गणतंत्र दिवस जलसों के आधिकारिक समापन का सूचक है। इस दिन शानदार ढंग से विदाई समारोह आयोजित होता है और इस रस्म में [[राष्ट्रपति]] विशेष तौर से पधारते हैं। | ||
====वर्ष 1950 और बीटिंग रिट्रीट का आगाज==== | ====वर्ष 1950 और बीटिंग रिट्रीट का आगाज==== | ||
भारत में बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत सन [[1950]] से हुई। उस समय [[भारतीय सेना]] के मेजर रॉबर्ट्स ने इस सेरेमनी को सेनाओं के बैंड्स के डिस्प्ले के साथ पूरा किया। इस डिस्प्ले में मिलिट्री बैंड्स, पाइप्स और ड्रम बैंड्स, बगर्ल्स और ट्रंपेटर्स के साथ आर्मी की विभिन्न रेजीमेंट्स और [[नौसेना]] और [[भारतीय वायु सेना|वायु सेना]] के बैंड्स भी शामिल थे। इस सेरेमनी की शुरुआत तीनों सेनाओं के बैंड्स के मार्च के साथ होती है और इस दौरान वह 'कर्नल बोगे मार्च', 'संस ऑफ द ब्रेव' और 'कदम-कदम बढ़ाए जा' जैसी धुनों को बजाते हैं। सेरेमनी के दौरान [भारतीय सेना]] का बैंड पारंपरिक स्कॉटिश धुनों और भारतीय धुनों, जैसे- 'गुरखा ब्रिगेड,' नीर की 'सागर सम्राट' और 'चांदनी' जैसी धुनों को बजाता है। आखिर में सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड्स एक साथ परफॉर्म करते हैं। | भारत में बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत सन [[1950]] से हुई। उस समय [[भारतीय सेना]] के मेजर रॉबर्ट्स ने इस सेरेमनी को सेनाओं के बैंड्स के डिस्प्ले के साथ पूरा किया। इस डिस्प्ले में मिलिट्री बैंड्स, पाइप्स और ड्रम बैंड्स, बगर्ल्स और ट्रंपेटर्स के साथ आर्मी की विभिन्न रेजीमेंट्स और [[नौसेना]] और [[भारतीय वायु सेना|वायु सेना]] के बैंड्स भी शामिल थे। इस सेरेमनी की शुरुआत तीनों सेनाओं के बैंड्स के मार्च के साथ होती है और इस दौरान वह 'कर्नल बोगे मार्च', 'संस ऑफ द ब्रेव' और 'कदम-कदम बढ़ाए जा' जैसी धुनों को बजाते हैं। सेरेमनी के दौरान [भारतीय सेना]] का बैंड पारंपरिक स्कॉटिश धुनों और भारतीय धुनों, जैसे- 'गुरखा ब्रिगेड,' नीर की 'सागर सम्राट' और 'चांदनी' जैसी धुनों को बजाता है। आखिर में सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड्स एक साथ परफॉर्म करते हैं। आजकल कॉमनवेल्थ देशों की सेनाएं इस समारोह को परंपरा के तौर पर निभाती हैं। इस समारोह को कुछ लोग नए बैंड मेंबर्स के लिए उनका कौशल साबित करने वाला टेस्ट मानते हैं तो कुछ इसे कठिन ड्रिल्स के अभ्यास का तरीका भी मानते हैं। | ||
==दो बार रद्द हुआ कार्यक्रम== | ==दो बार रद्द हुआ कार्यक्रम== | ||
वर्ष [[1950]] में भारत के गणतंत्र बनने के बाद 'बीटिंग द रिट्रीट' कार्यक्रम को अब तक दो बार रद्द करना पड़ा है, [[27 जनवरी]] [[2009]] को भूतपूर्व राष्ट्रपति [[रामस्वामी वेंकटरमण]] का लंबी बीमारी के बाद आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो जाने के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वह [[भारत के राष्ट्रपति|भारत के आठवें राष्ट्रपति]] थे और उनका कार्यकाल 1987 से 1992 तक रहा। इससे पहले 26 जनवरी [[2001]] को [[गुजरात]] में आए [[भूकंप]] के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था। | वर्ष [[1950]] में भारत के गणतंत्र बनने के बाद 'बीटिंग द रिट्रीट' कार्यक्रम को अब तक दो बार रद्द करना पड़ा है, [[27 जनवरी]] [[2009]] को भूतपूर्व राष्ट्रपति [[रामस्वामी वेंकटरमण]] का लंबी बीमारी के बाद आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो जाने के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वह [[भारत के राष्ट्रपति|भारत के आठवें राष्ट्रपति]] थे और उनका कार्यकाल 1987 से 1992 तक रहा। इससे पहले 26 जनवरी [[2001]] को [[गुजरात]] में आए [[भूकंप]] के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था। | ||
==बीटिंग रिट्रीट समारोह 2014== | ==बीटिंग रिट्रीट समारोह 2014== | ||
[[चित्र:Beating-retreat-2014.jpg|thumb|left|[[गणतंत्र दिवस]] समारोह 2014 के अवसर पर शाही बग्गी में भारतीय राष्ट्रपति [[प्रणब मुखर्जी]]]] | [[चित्र:Beating-retreat-2014.jpg|thumb|left|[[गणतंत्र दिवस]] समारोह 2014 के अवसर पर शाही बग्गी में भारतीय राष्ट्रपति [[प्रणब मुखर्जी]]]] | ||
[[29 जनवरी]] को [[दिल्ली]] में रंगारंग बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। [[बुधवार]] शाम विजयचौक पर चले संगीतमय समारोह में तीनों भारतीय सेनाओं के बैंडों ने एकल और सामूहिक प्रस्तुति दीं। समारोह की ख़ासियत वे नई धुनें रहीं, जिन्हें इस वर्ष ख़ासतौर पर तैयार किया गया था। इस पूरे कार्यक्रम में एक और ख़ास बात रहीं कि बीस साल बाद राष्ट्रपति [[प्रणब मुखर्जी]] ने 16वीं सदी से चली आ रही एक परंपरा को पुनजीर्वित करते हुए आज गणतंत्र दिवस की समापन परेड 'बीटिंग रिट्रीट' के लिए घोड़े बग्गी पर सवार होकर राजपथ पर सैन्य बलों की टुकड़ियों को गाजे बाजे के साथ बैरकों में वापस भेजा। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ [[उपराष्ट्रपति]] [[मोहम्मद हामिद अंसारी|हामिद अंसारी]], प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह|डॉ.मनमोहन सिंह]], रक्षामंत्री ए. के. एंटनी और [[दिल्ली के मुख्यमंत्री]] [[अरविंद केजरीवाल]] जैसे कई गणमान्य लोगों ने समारोह का आनंद लिया। | [[29 जनवरी]] को [[दिल्ली]] में रंगारंग बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। [[बुधवार]] शाम विजयचौक पर चले संगीतमय समारोह में तीनों भारतीय सेनाओं के बैंडों ने एकल और सामूहिक प्रस्तुति दीं। समारोह की ख़ासियत वे नई धुनें रहीं, जिन्हें इस वर्ष ख़ासतौर पर तैयार किया गया था। इस पूरे कार्यक्रम में एक और ख़ास बात रहीं कि बीस साल बाद राष्ट्रपति [[प्रणब मुखर्जी]] ने 16वीं सदी से चली आ रही एक परंपरा को पुनजीर्वित करते हुए आज गणतंत्र दिवस की समापन परेड 'बीटिंग रिट्रीट' के लिए घोड़े बग्गी पर सवार होकर राजपथ पर सैन्य बलों की टुकड़ियों को गाजे बाजे के साथ बैरकों में वापस भेजा। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ [[उपराष्ट्रपति]] [[मोहम्मद हामिद अंसारी|हामिद अंसारी]], प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह|डॉ.मनमोहन सिंह]], रक्षामंत्री ए. के. एंटनी और [[दिल्ली के मुख्यमंत्री]] [[अरविंद केजरीवाल]] जैसे कई गणमान्य लोगों ने समारोह का आनंद लिया। | ||
समारोह की कई प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनीं। इस समारोह की शुरुआत 'जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया' धुन से हुई। इसे मेजर महेंद्र दास ने तैयार किया था। फिर सूबेदार जामन सिंह द्वारा रचित धुन 'हे कांचा' पर पाइप और ड्रम को बजाया गया। वहीं नायब सूबेदार दीनानाथ द्वारा तैयार की गई धुन 'पाए जांदे पाले' को पहली बार पेश किया गया। [[महात्मा गांधी]] की पसंदीदा धुन 'अबाइड विद मी' को जब सेना के बैंड ने प्रस्तुत किया, तो विजय चौक पर समारोह के साक्षी बनने आए हजारों लोग तालियां बजाने को मजबूर हो गए। इस साल बीटिंग रिट्रीट में 14 मिलिट्री बैंड और आर्मी की विभिन्न रेजीमेंट के पाइप और ड्रम ने भाग लिया। इसके अलावा [[भारतीय नौसेना]] और [[वायु सेना]] के मिलिट्री बैंडों ने भी समारोह में हिस्सा लिया। वहीं समारोह के समापन के समय [[राष्ट्रपति भवन]], नॉर्थ व साउथ ब्लॉक के अलावा [[संसद भवन]] पर की गई लाइटिंग का नज़ारा देख सभी लोग दंग रह गए।<ref>{{cite web |url=http://www.samaylive.com/gallery/photo-gallery/nation-picture-photogallery/president-pranab-mukherjee-revives-buggy-tradition-at-beating-retreat-in-2014/619760/58319.html|title=बीटिंग रिट्रीट में छाई रही राष्ट्रपति की शाही बग्गी |accessmonthday=30 जनवरी |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=समय लाइव |language=हिन्दी}}</ref> | |||
[[चित्र:Google-doodle-republic-day-india.jpg|thumb|[[भारत]] के 65वें गणतंत्र दिवस पर गूगल डूडल]] | |||
====एशियन गेम्स में हुई ऐसी सेरेमनी==== | |||
इसी तरह की सेरेमनी को वर्ष [[1982]] में देश में संपन्न हुए एशियन गेम्स के दौरान परफॉर्म किया गया था। [[भारतीय सेना]] के सेवानिवृत्त संगीत निर्देशक स्वर्गीय हैराल्ड जोसेफ, [[भारतीय नौसेना]] के जेरोमा रॉड्रिग्स और [[भारतीय वायु सेना]] के एमएस नीर को इस सेरेमनी का श्रेय दिया जाता है। | |||
====प्रतिदिन का नियम==== | |||
[[भारत]] और [[पाकिस्तान]] के [[अमृतसर]] स्थित '[[बाघा बॉर्डर अमृतसर|बाघा बॉर्डर]]' पर इस सेरेमनी की शुरुआत वर्ष [[1959]] में की गई थी। सेरेमनी को रोजाना [[सूर्य]] ढलने से कुछ घंटे पहले परफॉर्म किया जाता है। बाघा बॉर्डर पर होने वाली इस सेरेमनी में बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के जवान हिस्सा लेते हैं।<ref name="aa"/> | |||
गणतंत्र दिवस परेड में होने वाले मोटर साइकिल प्रदर्शन जैसी एक तस्वीर दिखाते हुए गूगल के डूडल ने [[रविवार]], [[26 जनवरी]], [[2014]] को भारत का 65वां गणतंत्र दिवस मनाया था। 26 जनवरी, [[1950]] को [[भारत का संविधान]] लागू हुआ था और उस दिन देश ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था। भारत के [[राष्ट्रीय ध्वज]] के तीन [[रंग]]- केसरिया, [[सफ़ेद रंग|सफ़ेद]] और [[हरा रंग|हरे रंग]] का डूडल एनिमेटेड नहीं था, लेकिन जब दर्शकों ने इस पर क्लिक किया तो सर्च पेज ख़बरों और गणतंत्र दिवस की जानकारियों के साथ खुला था।<ref>{{cite web |url=http://m.livehindustan.com/mobile/news/deshlocal/national/article1-story-0-39-395895.html |title=गूगल डूडल ने भी मनाया 65वां गणतंत्र दिवस |accessmonthday=30 जनवरी |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=हिंदुस्तान लाइव |language=हिन्दी}}</ref> | गणतंत्र दिवस परेड में होने वाले मोटर साइकिल प्रदर्शन जैसी एक तस्वीर दिखाते हुए गूगल के डूडल ने [[रविवार]], [[26 जनवरी]], [[2014]] को भारत का 65वां गणतंत्र दिवस मनाया था। 26 जनवरी, [[1950]] को [[भारत का संविधान]] लागू हुआ था और उस दिन देश ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था। भारत के [[राष्ट्रीय ध्वज]] के तीन [[रंग]]- केसरिया, [[सफ़ेद रंग|सफ़ेद]] और [[हरा रंग|हरे रंग]] का डूडल एनिमेटेड नहीं था, लेकिन जब दर्शकों ने इस पर क्लिक किया तो सर्च पेज ख़बरों और गणतंत्र दिवस की जानकारियों के साथ खुला था।<ref>{{cite web |url=http://m.livehindustan.com/mobile/news/deshlocal/national/article1-story-0-39-395895.html |title=गूगल डूडल ने भी मनाया 65वां गणतंत्र दिवस |accessmonthday=30 जनवरी |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format=पी.एच.पी |publisher=हिंदुस्तान लाइव |language=हिन्दी}}</ref> |
Revision as of 10:09, 31 January 2017
बीटिंग द रिट्रीट
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विवरण | बीटिंग द रिट्रीट गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुए आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन घोषित करता है। इस कार्यक्रम में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। |
तिथि | 29 जनवरी |
आयोजन-कार्यक्रम | यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर भी एकल प्रदर्शन करते हैं। ड्रमर्स द्वारा एबाइडिड विद मी (महात्मा गाँधी की प्रिय धुनों में से एक) बजाई जाती है। |
मुख्य अतिथि | भारतीय राष्ट्रपति |
अन्य जानकारी | गणतंत्र दिवस परेड में होने वाले मोटरसाइकिल प्रदर्शन जैसी एक तस्वीर दिखाते हुए गूगल के डूडल ने 26 जनवरी, 2014 को भारत का 65वां गणतंत्र दिवस मनाया। |
अद्यतन | 14:28, 30 जनवरी 2014 (IST)
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बीटिंग द रिट्रीट (अंग्रेज़ी: Beating The Retreat) भारत में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुए आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन की घोषणा है। इस कार्यक्रम में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। यह सेना की बैरक वापसी का प्रतीक है। सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच रोशनी से सुंदरतापूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष 29 जनवरी की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा 'एबाइडिड विद मी' (यह महात्मा गाँधी की प्रिय धुनों में से एक कही जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्टर राष्ट्रपति के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि 'समापन समारोह' पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन सारे जहाँ से अच्छा बजाते हैं। ठीक शाम 6 बजे 'बगलर्स रिट्रीट' की धुन बजाते हैं और राष्ट्रीय ध्वज को उतार लिया जाता है तथा राष्ट्रगान गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।[1][[चित्र:Beating Retreat-flag.jpg|thumb|left|'बीटिंग द रिट्रीट' के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज को उतारते हुए]]
क्या है बीटिंग रिट्रीट
'बीटिंग रिट्रीट' सोलहवीं सदी के ब्रिटेन की परंपरा है। 'बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी' का असली नाम 'वॉच सेटिंग' है और सूर्य डूबने के समय यह समारोह होता है। 18 जून, 1690 में इंग्लैंड के राजा जेम्स टू ने अपनी सेनाओं को उनके ट्रूप्स के वापस आने पर ड्रम बजाने का आदेश दिया था। सन 1694 में विलियम थर्ड ने रेजीमेंट के कैप्टन को ट्रूप्स के वापस आने पर गलियों में ड्रम बजाकर उनका स्वागत करने का नया आदेश जारी किया।[2] लेकिन भारत में यह समारोह गणतंत्र दिवस जलसों के आधिकारिक समापन का सूचक है। इस दिन शानदार ढंग से विदाई समारोह आयोजित होता है और इस रस्म में राष्ट्रपति विशेष तौर से पधारते हैं।
वर्ष 1950 और बीटिंग रिट्रीट का आगाज
भारत में बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत सन 1950 से हुई। उस समय भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स ने इस सेरेमनी को सेनाओं के बैंड्स के डिस्प्ले के साथ पूरा किया। इस डिस्प्ले में मिलिट्री बैंड्स, पाइप्स और ड्रम बैंड्स, बगर्ल्स और ट्रंपेटर्स के साथ आर्मी की विभिन्न रेजीमेंट्स और नौसेना और वायु सेना के बैंड्स भी शामिल थे। इस सेरेमनी की शुरुआत तीनों सेनाओं के बैंड्स के मार्च के साथ होती है और इस दौरान वह 'कर्नल बोगे मार्च', 'संस ऑफ द ब्रेव' और 'कदम-कदम बढ़ाए जा' जैसी धुनों को बजाते हैं। सेरेमनी के दौरान [भारतीय सेना]] का बैंड पारंपरिक स्कॉटिश धुनों और भारतीय धुनों, जैसे- 'गुरखा ब्रिगेड,' नीर की 'सागर सम्राट' और 'चांदनी' जैसी धुनों को बजाता है। आखिर में सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड्स एक साथ परफॉर्म करते हैं। आजकल कॉमनवेल्थ देशों की सेनाएं इस समारोह को परंपरा के तौर पर निभाती हैं। इस समारोह को कुछ लोग नए बैंड मेंबर्स के लिए उनका कौशल साबित करने वाला टेस्ट मानते हैं तो कुछ इसे कठिन ड्रिल्स के अभ्यास का तरीका भी मानते हैं।
दो बार रद्द हुआ कार्यक्रम
वर्ष 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद 'बीटिंग द रिट्रीट' कार्यक्रम को अब तक दो बार रद्द करना पड़ा है, 27 जनवरी 2009 को भूतपूर्व राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण का लंबी बीमारी के बाद आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो जाने के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वह भारत के आठवें राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल 1987 से 1992 तक रहा। इससे पहले 26 जनवरी 2001 को गुजरात में आए भूकंप के कारण बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था।
बीटिंग रिट्रीट समारोह 2014
[[चित्र:Beating-retreat-2014.jpg|thumb|left|गणतंत्र दिवस समारोह 2014 के अवसर पर शाही बग्गी में भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी]] 29 जनवरी को दिल्ली में रंगारंग बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। बुधवार शाम विजयचौक पर चले संगीतमय समारोह में तीनों भारतीय सेनाओं के बैंडों ने एकल और सामूहिक प्रस्तुति दीं। समारोह की ख़ासियत वे नई धुनें रहीं, जिन्हें इस वर्ष ख़ासतौर पर तैयार किया गया था। इस पूरे कार्यक्रम में एक और ख़ास बात रहीं कि बीस साल बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 16वीं सदी से चली आ रही एक परंपरा को पुनजीर्वित करते हुए आज गणतंत्र दिवस की समापन परेड 'बीटिंग रिट्रीट' के लिए घोड़े बग्गी पर सवार होकर राजपथ पर सैन्य बलों की टुकड़ियों को गाजे बाजे के साथ बैरकों में वापस भेजा। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, रक्षामंत्री ए. के. एंटनी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे कई गणमान्य लोगों ने समारोह का आनंद लिया।
समारोह की कई प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनीं। इस समारोह की शुरुआत 'जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया' धुन से हुई। इसे मेजर महेंद्र दास ने तैयार किया था। फिर सूबेदार जामन सिंह द्वारा रचित धुन 'हे कांचा' पर पाइप और ड्रम को बजाया गया। वहीं नायब सूबेदार दीनानाथ द्वारा तैयार की गई धुन 'पाए जांदे पाले' को पहली बार पेश किया गया। महात्मा गांधी की पसंदीदा धुन 'अबाइड विद मी' को जब सेना के बैंड ने प्रस्तुत किया, तो विजय चौक पर समारोह के साक्षी बनने आए हजारों लोग तालियां बजाने को मजबूर हो गए। इस साल बीटिंग रिट्रीट में 14 मिलिट्री बैंड और आर्मी की विभिन्न रेजीमेंट के पाइप और ड्रम ने भाग लिया। इसके अलावा भारतीय नौसेना और वायु सेना के मिलिट्री बैंडों ने भी समारोह में हिस्सा लिया। वहीं समारोह के समापन के समय राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ व साउथ ब्लॉक के अलावा संसद भवन पर की गई लाइटिंग का नज़ारा देख सभी लोग दंग रह गए।[3]
[[चित्र:Google-doodle-republic-day-india.jpg|thumb|भारत के 65वें गणतंत्र दिवस पर गूगल डूडल]]
एशियन गेम्स में हुई ऐसी सेरेमनी
इसी तरह की सेरेमनी को वर्ष 1982 में देश में संपन्न हुए एशियन गेम्स के दौरान परफॉर्म किया गया था। भारतीय सेना के सेवानिवृत्त संगीत निर्देशक स्वर्गीय हैराल्ड जोसेफ, भारतीय नौसेना के जेरोमा रॉड्रिग्स और भारतीय वायु सेना के एमएस नीर को इस सेरेमनी का श्रेय दिया जाता है।
प्रतिदिन का नियम
भारत और पाकिस्तान के अमृतसर स्थित 'बाघा बॉर्डर' पर इस सेरेमनी की शुरुआत वर्ष 1959 में की गई थी। सेरेमनी को रोजाना सूर्य ढलने से कुछ घंटे पहले परफॉर्म किया जाता है। बाघा बॉर्डर पर होने वाली इस सेरेमनी में बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के जवान हिस्सा लेते हैं।[2]
गणतंत्र दिवस परेड में होने वाले मोटर साइकिल प्रदर्शन जैसी एक तस्वीर दिखाते हुए गूगल के डूडल ने रविवार, 26 जनवरी, 2014 को भारत का 65वां गणतंत्र दिवस मनाया था। 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था और उस दिन देश ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था। भारत के राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंग- केसरिया, सफ़ेद और हरे रंग का डूडल एनिमेटेड नहीं था, लेकिन जब दर्शकों ने इस पर क्लिक किया तो सर्च पेज ख़बरों और गणतंत्र दिवस की जानकारियों के साथ खुला था।[4]
बीटिंग रिट्रीट चित्र वीथिका
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
- ↑ गणतंत्र दिवस परेड का सीधा प्रसारण (हिन्दी) (पी.एच.पी) अविरत यात्रा: जन-गण-मन। अभिगमन तिथि: 30 जनवरी, 2014।
- ↑ 2.0 2.1 जानिए 26 जनवरी के बाद होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का महत्व (हिन्दी) hindi.oneindia.com। अभिगमन तिथि: 31 जनवरी, 2017।
- ↑ बीटिंग रिट्रीट में छाई रही राष्ट्रपति की शाही बग्गी (हिन्दी) (पी.एच.पी) समय लाइव। अभिगमन तिथि: 30 जनवरी, 2014।
- ↑ गूगल डूडल ने भी मनाया 65वां गणतंत्र दिवस (हिन्दी) (पी.एच.पी) हिंदुस्तान लाइव। अभिगमन तिथि: 30 जनवरी, 2014।
बाहरी कड़ियाँ
- भारतीय गणतंत्र दिवस के बारे में जानें (एक विडियो)
- Google doodle celebrates India's 65th Republic Day
- रायसीना हिल्स से लालकिले तक अनूठी विरासत-ताकत का प्रदर्शन
- गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए राजपथ पर उमड़े लोग
- बीटिंग रिट्रीट में गूंजी शानदार धुनें
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