आशा का दीपक -रामधारी सिंह दिनकर: Difference between revisions
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अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का; | अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का; | ||
सारी रात चले तुम | सारी रात चले तुम दु:ख झेलते कुलिश का। | ||
एक खेय है शेष, किसी विध पार उसे कर जाओ; | एक खेय है शेष, किसी विध पार उसे कर जाओ; | ||
वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का। | वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का। |
Latest revision as of 14:00, 2 June 2017
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वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नहीं है; |
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