वीर -रामधारी सिंह दिनकर: Difference between revisions
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ख़म ठोंक ठेलता है जब नर | ख़म ठोंक ठेलता है जब नर | ||
पर्वत के जाते पाँव उखड़, | पर्वत के जाते पाँव उखड़, | ||
मानव जब | मानव जब ज़ोर लगाता है, | ||
पत्थर पानी बन जाता है। | पत्थर पानी बन जाता है। | ||
Latest revision as of 14:46, 27 May 2012
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सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं |
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