जब तक मैं मैं हूँ, तुम तुम हो, है जीवन में जीवन। कोई नहीं छीन सकता तुमको मुझसे मेरे धन॥ आओ मेरे हृदय-कुंज में निर्भय करो विहार। सदा बंद रखूँगी मैं अपने अंतर का द्वार॥ नहीं लांछना की लपटें प्रिय तुम तक जाने पाएँगीं। पीड़ित करने तुम्हें वेदनाएं न वहाँ आएँगीं॥ अपने उच्छ्वासों से मिश्रित कर आँसू की बूँद। शीतल कर दूँगी तुम प्रियतम सोना आँखें मूँद॥ जगने पर पीना छक-छककर मेरी मदिरा की प्याली। एक बूँद भी शेष न रहने देना करना ख़ाली॥ नशा उतर जाए फिर भी बाकी रह जाए खुमारी। रह जाए लाली आँखों में स्मृतियाँ प्यारी-प्यारी॥