दिया क्यों जीवन का वरदान? इसमें है स्मृतियों का कम्पन; सुप्त व्यथाओं का उन्मीलन; स्वप्नलोक की परियाँ इसमें भूल गयी मुस्कान! इसमें है झंझा का शैशव; अनुरंजित कलियों का वैभव; मलयपवन इसमें भर जाता मृदु लहरों के गान! इन्द्रधनुष सा घन-अंचल में; तुहिन बिन्दु सा किसलय दल में; करता है पल पल में देखो मिटने का अभिमान! सिकता में अंकित रेखा सा; वात-विकम्पित दीपशिखा सा; काल कपोलों पर आँसू सा ढुल जाता हो म्लान!