संगति का अंग -कबीर: Difference between revisions
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ऊँचे कुल क्या जनमियां, जे करनी ऊँच न होइ । | ऊँचे कुल क्या जनमियां, जे करनी ऊँच न होइ । | ||
सोवरन् कलस सुरै भर्या, साधू निंदा सोइ ॥4॥ | |||
`कबिरा' खाई कोट की, पानी पिवै न कोइ । | `कबिरा' खाई कोट की, पानी पिवै न कोइ । |
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हरिजन सेती रूसणा, संसारी सूँ हेत । |
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